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जुवेनाइल केसः हाईकोर्ट के जस्टिस बोले- जन्म के समय नहीं कह सकते बच्चा अपराधी ही बनेगा
Sun, 22 Sep 2019 11:52 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2019 11:52 AM IST
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जुवेनाइल जस्टिस एक्ट
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जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के तहत बच्चों की प्रोटेक्शन को ध्यान में रखते हुए शनिवार को सेक्टर -43 स्थित चंडीगढ़ ज्यूडिशियल एकेडमी के कन्वेशन हॉल में राज्य स्तरीय मीटिंग का आयोजन किया गया।
इस दौरान पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति जसवंत सिंह ने कहा कि जब बच्चे का जन्म होता है, तब यह नहीं कहा जा सकता कि वह कभी कानून को हाथ में लेकर अपराधी बन जाएगा। यह भी कहा जो बच्चे माता-पिता की देखरेख में पलते हैं, उनके अपराधी बनने की संभावना कम होती है।
साथ ही कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 एक ऐतिहासिक कानून है जो बच्चों की सुरक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रखकर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 20 और 21 बच्चे को पारिवारिक देखभाल के अधिकार को मान्यता देता है। साथ ही भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15(3) बच्चे के अधिकारों की रक्षा करता है। अनुच्छेद 14, 19 और 21 भी बच्चे के हितों की रक्षा करते हैं।
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इस दौरान पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति जसवंत सिंह ने कहा कि जब बच्चे का जन्म होता है, तब यह नहीं कहा जा सकता कि वह कभी कानून को हाथ में लेकर अपराधी बन जाएगा। यह भी कहा जो बच्चे माता-पिता की देखरेख में पलते हैं, उनके अपराधी बनने की संभावना कम होती है।
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साथ ही कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 एक ऐतिहासिक कानून है जो बच्चों की सुरक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रखकर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 20 और 21 बच्चे को पारिवारिक देखभाल के अधिकार को मान्यता देता है। साथ ही भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15(3) बच्चे के अधिकारों की रक्षा करता है। अनुच्छेद 14, 19 और 21 भी बच्चे के हितों की रक्षा करते हैं।
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