फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   nitin goyal: struggle against arbitrary of private schools changed in movement

नितिन गोयल: निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ जिद ने दिलाई जीत

Mon, 23 May 2016 02:12 AM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 23 May 2016 02:12 AM IST
विज्ञापन
nitin goyal: struggle against arbitrary of private schools changed in movement
नितिन गोयल - फोटो : amar ujala

वैसे तो अधिकतर पेरेंट्स निजी स्कूलों की मनमानी से परेशान थे, मगर बच्चों के भविष्य को लेकर डर के कारण कोई आवाज नहीं उठा रहा था। नितिन गोयल एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने न केवल बिना किसी की परवाह किए निजी स्कूलों की मजबूत लॉबी के खिलाफ आवाज उठाई, बल्कि इस संघर्ष को एक आंदोलन में बदल दिया। जबकि नितिन गोयल की दो बेटियां भी एक निजी स्कूल में पढ़ती हैं। आंदोलन के दबाव से प्रशासन ने निजी स्कूलों में चल रही दुकानों को बंद करवाया। निजी स्कूलों में छापे भी मारे, कई स्कूलों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए।

विज्ञापन


जब आदोलन रंग लाने लगा तो उन्होंने चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन का गठन कर लोगों को एक मंच दिया, जिसमें अब 800 अभिभावक सदस्य हैं। गोयल पर आंदोलन से पीछे हटने का भी दबाव बना, लेकिन वह नहीं माने। एसोसिएशन और आंदोलन के दबाव ने प्रशासन को निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए पॉलिसी बनाने के लिए मजबूर कर दिया। इस पर अब लोगों के सुझाव मांगे गए हैं। इस पॉलिसी के लागू होने से अभिभावकों पर बोझ घटेगा।
विज्ञापन


संघर्ष की प्रेरणा यहां से मिली
ऑनलाइन ट्रांसलेशन की कंपनी चलाने वाले नितिन का कहना है कि 2009 में राइट टू एजुकेशन एक्ट लागू हुआ था। इसके तहत हर स्कूल को 25 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस कोटे में दाखिला देना था, लेकिन अधिकतर स्कूल ऐसा नहीं कर रहे थे। उन्होंने इसके लिए प्रयास किया। नितिन के अनुसार अब तक वह 50 बच्चों का ईडब्लयूएस कोटे में दाखिला करवा चुके हैं। नितिन का कहना है कि  इससे उन्हें संतुष्टि मिलने लगी, लेकिन इसी दौरान स्कूलों की ओर से वसूली जा रही फीस, फंड, कंप्यूटर फीस, किताबों और वर्दी के कमीशन की कई शिकायतें आने लगीं। उन्होंने अधिकारियों से बात की तो उन्होंने कहा कि किसी और अभिभावक को तो कोई शिकायत नहीं है फिर आपको क्या दिक्कत है। इसके बाद उन्होंने संघर्ष शुरू करने की ठानी।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्कूल समाजसेवा करें, मुनाफाखोरी नहीं
नितिन गोयल का कहना है कि उनकी एसोसिएशन कोई नया कानून बनाने के पक्ष में नहीं है। वह तो पहले से बने नियमों को लागू करवाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट साफ कह चुका है कि निजी स्कूल समाजसेवा के तौर पर काम करें, मुनाफा कमाने के लिए नहीं। उनका कहना है कि अभिभावक निजी स्कूलों की मनमानी के कारण लगातार पिसते जा रहे हैं। उन्हें इससे मुक्त करवाकर ही उनकी एसोसिएशन दम लेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed