निकिता तोमर हत्याकांड: आरोपी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका खारिज
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फरीदाबाद के बहुचर्चित निकिता तोमर हत्याकांड के आरोपी तौसीफ को बड़ा झटका देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी नए सिरे से निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका दाखिल करते हुए नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब आलम के चचेरे भाई तौसीफ ने एडवोकेट महक साहनी के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया था कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है।
राजनीतिक कारणों से पुलिस कमिश्नर जांच को प्रभावित कर रहे हैं। याची ने कहा कि मुझ पर आरोप लगाया जा रहा है कि मैं निकिता पर धर्म परिवर्तित कर विवाह करने के लिए दबाव बना रहा था, जो पूरी तरह से गलत है। तौसीफ पर आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर निकिता का अपहरण किया और विरोध करने पर उसे गोली मार दी।
याची ने कहा कि लव जिहाद के नाम पर उसे फंसाया जा रहा है। जो वीडियो पुलिस के पास है उसमें आरोपियों का मुंह पूरी तरह से ढका हुआ था और नंबर प्लेट तो कोई भी बदल सकता है। केवल ऐसी वीडियो के आधार पर पुलिस ने जल्दबाजी दिखाते हुए मुझे गिरफ्तार कर लिया। याची ने कहा कि यह मामला लव जिहाद का नहीं बल्कि ऑनर किलिंग का है। याची ने कहा कि उसके पास ऐसी कोई वजह नहीं थी जिसके कारण वह निकिता की हत्या करे।
कोर्ट ने याची की यह दलील सिरे से नकार दी कि नेताओं, मीडिया और पंचायत के दबाव में जांच प्रभावित हुई है। जांच का केवल 11 दिनों में पूरा होना और चालान पेश करना हाईकोर्ट ने खामी नहीं मानी। फॉरेंसिक रिपोर्ट के बिना चालान पेश करने की दलील पर हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस चाहे तो रिपोर्ट आने के बाद सप्लीमेंट्री चालान पेश कर सकती है।
यह था मामला
हरियाणा के बल्लभगढ़ में परिवार के साथ रह रही उत्तर प्रदेश के हापुड़ निवासी निकिता तोमर अग्रवाल कॉलेज में बीकॉम अंतिम वर्ष की छात्रा थी। 26 अक्तूबर 2020 की शाम वह परीक्षा देकर कॉलेज के बाहर निकली। आरोप के अनुसार इसी दौरान सोहना निवासी तौसीफ ने अपने दोस्त के साथ मिलकर निकिता को कार में अगवा करने की कोशिश की। विरोध करने पर निकिता को गोली मार दी थी। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जांच एसआईटी को सौंप दी थी।