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इंपैक्टः जीएमसीएच-32 चंडीगढ़ में इमरजेंसी की गैलरी से हटे स्ट्रेचर, वार्ड में शिफ्ट किए गए मरीज
Thu, 16 Jan 2020 11:37 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 16 Jan 2020 11:37 AM IST
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जीएमसीएच 32 चंडीगढ़
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) की इमरजेंसी का नजारा अब बदल गया है। कुछ दिन पहले तक जहां इमरजेंसी की गैलरी स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों से खचाखच भरी रहती थी और पैर रखने तक की जगह नहीं होती थी, अब वहां खुला-खुला नजर आ रहा है। गैलरी से मरीजों को शिफ्ट कर दिया गया है।
बता दें कि अमर उजाला ने बीते 25 दिसंबर के अंक में जीएमसीएच की इमरजेंसी की पड़ताल कर वहां की स्थिति को ‘यहां जुगाड़ से हो रहा इलाज.. स्ट्रेचर को बनाया बेड और पिलर बनी ड्रिप स्टैंड’ शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसे गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था में सुधार शुरू कर दिया है।
नतीजतन यहां की इमरजेंसी गैलरी से अब स्ट्रेचर गायब हो चुके हैं। पिलर को ड्रिप स्टैंड के तौर पर प्रयोग नहीं किया जा रहा। अब इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को इलाज के चंद घंटे बाद ही वार्ड में शिफ्ट कर दिया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी के डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि इलाज के बाद मरीज को तुरंत वार्ड में शिफ्ट किया जाए।
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इसके लिए पांचवें तल पर बनाए गए ओवरफ्लो वार्ड में बेड की संख्या भी बढ़ा दी गई है। वहीं अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि इमरजेंसी से स्ट्रेचर हटने के बाद मरीजों को काफी आराम मिला है। जिन मरीजों व उनके परिजनों को हर वक्त स्ट्रेचर से गिरने का डर सताता रहता था वह अब वार्ड में बेफिक्र हैं।
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बता दें कि अमर उजाला ने बीते 25 दिसंबर के अंक में जीएमसीएच की इमरजेंसी की पड़ताल कर वहां की स्थिति को ‘यहां जुगाड़ से हो रहा इलाज.. स्ट्रेचर को बनाया बेड और पिलर बनी ड्रिप स्टैंड’ शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसे गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था में सुधार शुरू कर दिया है।
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नतीजतन यहां की इमरजेंसी गैलरी से अब स्ट्रेचर गायब हो चुके हैं। पिलर को ड्रिप स्टैंड के तौर पर प्रयोग नहीं किया जा रहा। अब इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को इलाज के चंद घंटे बाद ही वार्ड में शिफ्ट कर दिया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी के डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि इलाज के बाद मरीज को तुरंत वार्ड में शिफ्ट किया जाए।
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इसके लिए पांचवें तल पर बनाए गए ओवरफ्लो वार्ड में बेड की संख्या भी बढ़ा दी गई है। वहीं अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि इमरजेंसी से स्ट्रेचर हटने के बाद मरीजों को काफी आराम मिला है। जिन मरीजों व उनके परिजनों को हर वक्त स्ट्रेचर से गिरने का डर सताता रहता था वह अब वार्ड में बेफिक्र हैं।