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चंडीगढ़ में एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी: नए रेट लागू नहीं, दफ्तर भी बंद; लाइसेंस सस्पेंड करने का नोटिस जारी
Fri, 03 Oct 2025 01:26 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Oct 2025 01:26 AM IST
सार
सात जुलाई को प्रशासन ने चंडीगढ़ मोटर व्हीकल एग्रीगेटर पॉलिसी-2025 के तहत कैब-टैक्सी और ऑटो के किराए में संशोधन को मंजूरी दी थी। पहली बार पहले तीन किमी तक फ्लैट रेट तय किए गए। न्यूनतम किराया 90 रुपये रखा गया जबकि कैब चालकों की मांग 100 रुपये थी।
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प्रशासक के साथ ट्राइसिटी कैब ड्राइवर यूनियन की मीटिंग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ में ओला, उबर और इन-ड्राइवर जैसी एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी पर आखिरकार यूटी प्रशासन सख्त हो गया है। नए रेट लागू न करने और शहर में वर्किंग कार्यालय न होने पर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने इन कंपनियों को नोटिस जारी करते हुए 15 दिन का समय दिया है। अगर तय समय में नियम नहीं माने तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
सात जुलाई को प्रशासन ने चंडीगढ़ मोटर व्हीकल एग्रीगेटर पॉलिसी-2025 के तहत कैब-टैक्सी और ऑटो के किराए में संशोधन को मंजूरी दी थी। पहली बार पहले तीन किमी तक फ्लैट रेट तय किए गए। न्यूनतम किराया 90 रुपये रखा गया जबकि कैब चालकों की मांग 100 रुपये थी। इसके अलावा आदेश था कि ड्राइवर को 90 फीसदी राइड का किराया मिलना चाहिए लेकिन कंपनियों ने यह रेट और नियम लागू ही नहीं किए। उल्टा उन्होंने कमीशन मॉडल खत्म कर सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू कर दिया, जिससे ड्राइवरों का शोषण और बढ़ गया। जीएसटी का बोझ भी अब ड्राइवरों पर डाल दिया गया है।
इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को चंडीगढ़ ट्राइसिटी कैब ड्राइवर यूनियन के अध्यक्ष अमनदीप सिंह, उपाध्यक्ष सुरिंदर सिंह खालसा और सचिव राजिंदर कुमार भट्टी ने पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात की और इस समस्या के बारे में बताया। अमनदीप सिंह ने प्रशासक को बताया कि एग्रीगेटर कंपनियां रोजाना करोड़ों की कमाई कर रही हैं लेकिन प्रशासनिक आदेशों को दरकिनार कर रही हैं और ड्राइवरों का शोषण कर रही हैं। उन्होंने अन्य समस्याओं की भी प्रशासक को जानकारी दी।
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सात जुलाई को प्रशासन ने चंडीगढ़ मोटर व्हीकल एग्रीगेटर पॉलिसी-2025 के तहत कैब-टैक्सी और ऑटो के किराए में संशोधन को मंजूरी दी थी। पहली बार पहले तीन किमी तक फ्लैट रेट तय किए गए। न्यूनतम किराया 90 रुपये रखा गया जबकि कैब चालकों की मांग 100 रुपये थी। इसके अलावा आदेश था कि ड्राइवर को 90 फीसदी राइड का किराया मिलना चाहिए लेकिन कंपनियों ने यह रेट और नियम लागू ही नहीं किए। उल्टा उन्होंने कमीशन मॉडल खत्म कर सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू कर दिया, जिससे ड्राइवरों का शोषण और बढ़ गया। जीएसटी का बोझ भी अब ड्राइवरों पर डाल दिया गया है।
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इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को चंडीगढ़ ट्राइसिटी कैब ड्राइवर यूनियन के अध्यक्ष अमनदीप सिंह, उपाध्यक्ष सुरिंदर सिंह खालसा और सचिव राजिंदर कुमार भट्टी ने पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात की और इस समस्या के बारे में बताया। अमनदीप सिंह ने प्रशासक को बताया कि एग्रीगेटर कंपनियां रोजाना करोड़ों की कमाई कर रही हैं लेकिन प्रशासनिक आदेशों को दरकिनार कर रही हैं और ड्राइवरों का शोषण कर रही हैं। उन्होंने अन्य समस्याओं की भी प्रशासक को जानकारी दी।
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