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Chandigarh News: पीजीआई में आज नए मरीजों को नहीं मिलेगा इलाज, कल से रेजिडेंट डॉक्टर भी हड़ताल पर

Mon, 14 Oct 2024 05:47 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Oct 2024 05:47 AM IST
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New patients will not get treatment in PGI today, resident doctors also on strike from tomorrow
चंडीगढ़। पीजीआई में अनुबंध पर तैनात हॉस्पिटल अटेंडेंट, सैनिटरी अटेंडेंट और वाहकों (बियरर) की हड़ताल के बीच अब रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी 15 अक्तूबर से एकबार फिर कोलकाता कांड के विरोध में हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया है। बीते चार दिन से चल रही हड़ताल की वजह से पीजीआई की व्यवस्था पहले ही चरमरा गई है, अब रेजिडेंट डॉक्टरों के भी हड़ताल पर जाने से हालात और बिगड़ सकते हैं।
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अनुबंधकर्मियों की हड़ताल के चलते सोमवार को पीजीआई में नए मरीजों का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। सिर्फ फॉलोअप मरीजों का सुबह 8 से 10 बजे तक पंजीकरण होगा। ऑनलाइन पंजीकरण भी रद्द कर दिए गए हैं। साथ ही पड़ोसी राज्यों से अपील की गई है कि अगले आदेश तक मरीजों को रेफर न करें। पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने इसकी पुष्टि की।
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उधर, पुलिस ने रविवार को हड़ताली अनुबंधकर्मियों के यूनियन नेताओं के खिलाफ सेक्टर-11 थाने में केस दर्ज कर लिया। यह कार्रवाई जिला मजिस्ट्रेट के आदेश का उल्लंघन करने पर एएसआई दिलबाग सिंह की शिकायत पर की गई है। पुलिस ने अनुबंध आधारित हॉस्पिटल अटेंडेंट वर्कर यूनियन के अध्यक्ष राजेश चौहान, सुखदेव व अन्य को नामजद किया है। उधर, रविवार को अवकाश के बावजूद अनुबंधकर्मियों ने प्रदर्शन कर रोष जताया। रविार को इमरजेंसी और ट्रॉमा में भर्ती मरीजों को हड़ताल के चलते परेशानी झेलनी पड़ी। कई मरीजों को घर भेजा गया।
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पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने बताया कि डे केयर यूनिट में निर्धारित कीमोथेरेपी के अलावा आपातकालीन, ट्रॉमा और आईसीयू सेवाएं जारी रहेंगी। कोई भी वैकल्पिक प्रवेश नहीं किया जाएगा और वैकल्पिक सर्जरी स्थगित कर दी गई हैं। इस बारे में मरीजों को सूचित किया जा रहा है। चंडीगढ़ और पड़ोसी राज्यों के अस्पतालों से अपील की गई है कि वे अगले आदेश तक नए मरीज पीजीआई में न भेजें।
बता दें कि बकाया एरियर और बढ़े वेतन भुगतान की मांग को लेकर हॉस्पिटल अटेंडेंट, किचन स्टाफ, सफाई कर्मचारी और ऑफिस वाहक (बीयरर) हड़ताल कर रहे हैं। स्थिति पर काबू के लिए पीजीआई प्रशासन ने विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ एनएसएस स्वयंसेवकों से भी मदद मांगी है।
आपातकालीन सेवा रोकने पर भी विचार कर रहे रेजिडेंट्स
कोलकाता कांड पर देश भर के रेजिडेंट एसोसिएशनों को लिखे पत्र में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने पीजीआई, एम्स, जेआईपीएमईआर, निमहंस सहित अन्य संस्थानों से अपील की है कि वे आपातकालीन सेवाओं को बाधित किए बिना सोमवार से वैकल्पिक सेवाओं को बंद करने के आह्वान में शामिल हों। पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों के संघ ने रविवार शाम को आम सभा कर मंगलवार से हड़ताल में शामिल होने के लिए मतदान किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हरिहरन ने बताया कि अधिकांश रोगियों ने सोमवार की ओपीडी की योजना बना ली होगी, इसलिए हमने मंगलवार से हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। हम वैकल्पिक ओटी और ओपीडी को बंद कर शुरुआत करेंगे और अन्य रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन व राष्ट्रीय संघ के साथ विचार-विमर्श के बाद आपातकालीन सेवाओं को रोकने के बारे में सोच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हमारे साथी 65 दिनों से अधिक समय से बहादुरी से विरोध कर रहे हैं। यहां तक कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी कर रहे हैं, जिससे उनमें से कुछ गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। सुरक्षित और संरक्षित कार्य वातावरण के हमारे मौलिक अधिकार के प्रति अधिकारियों की निरंतर उदासीनता और उदासीनता ने हमें एकजुट होने और एक स्टैंड लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा है।


रेजिडेंट डॉक्टरों पर हो सकती है कार्रवाई
बीते सात अक्तूबर को एआरडी (एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर) पीजीआई ने आपातकालीन चिकित्सा ओपीडी को तीन घंटे से ज्यादा समय तक रोके रखा। ऐसा करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई के मामले में पीजीआई प्रशासन चुप है। एक प्रोफेसर ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा सेवा से इन्कार करना अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। ऐसी स्थिति में पीजीआई प्रशासन कानूनी कार्रवाई कर सकता है। सूत्रों से पता चला है कि एआरडी पैनल सामूहिक इस्तीफा दे सकता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि पीजीआई प्रशासन उनसे अनावश्यक पूछताछ कर रहा है जबकि पीजीआई प्रशासन का मानना है कि जब संविदा कर्मचारी पहले से ही हड़ताल पर हैं तो डॉक्टरों को देशव्यापी विरोध में शामिल नहीं होना चाहिए था क्योंकि इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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