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मरने के बाद भी 5 लोगों को नई जिंदगी दे गया 24 साल का सौरव
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 29 Apr 2016 10:15 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़ में ऑर्गन डोनेट के बाद एंबुलेंस में लेकर जाते
- फोटो : amar ujala
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हादसे में जवान बेटे की मौत हो गई और पिता का ऐसा हौसला कि उन्होंने बेटे के अंग दान कर 5 मरते लोगों को नई जिंदगी दे दी। नालागढ़ निवासी तिलकराज के 24 वर्षीय बेटे सौरव द्विवेदी एमफार्मा का स्टूडेंट था। वह पढ़ाई के साथ फार्मास्यूटिकल कंपनी में पढ़ाई भी कर रहा था।
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26 अप्रैल को उनका एक्सीडेंट हो गया और उन्हें पीजीआई में दाखिल कराया गया। उसके बचने की हालत बिल्कुल भी नहीं थी। पीजीआई के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने सौरव के पिता तिलकराज से आर्गन डोनेशन के बारे में बातचीत शुरू की। उनकी काउंसलिंग की और आर्गन डोनेशन की विधि के बारे में समझाया।
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पहली काउंसलिंग में ही तिलकराज ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर की बात मान गए और अपने बेटे के अंग को जरूरतमंदों को देने का फैसला लिया। पीजीआई ने अपने प्रोटोकाल के मुताबिक सौरव को दो बार ब्रेन डेड घोषित किया और उसकी दो किडनी, दो कोर्निया, एक पेनक्रियाज और एक लीवर को सुरक्षित निकाल लिया। किडनी, पेनक्रियाज और कोर्निया तो पीजीआई में ही ट्रांसप्लांट किए गए, जबकि लीवर का कोई मैचिंग रिसीपीएंट नहीं मिला।
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फ्लाइट लेट थी, इसलिए लीवर समय पर दिल्ली पहुंच गया
जब लीवर का मैचिंग रिसीपीएंट नहीं मिला तो इस बारे में दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट आफ लीवर एंड बिलेरी साइंस (आईएलबीएस) में बात की गई तो वहां पर मैचिंग मिल गई। चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस से बात कर एयरपोर्ट तक तुरंत ग्रीन कारिडोर बनाया गया।
चंडीगढ़ से दिल्ली फ्लाइट का समय शाम सात बजकर 20 मिनट था। पीजीआई से लीवर को लेकर एंबुलेंस सात बजकर 12 मिनट पर निकली। मात्र 18 मिनट के भीतर पीजीआई की एंबुलेंस एयरपोर्ट पहुंच गई। गनीमत रही कि फ्लाइट 15 मिनट लेट थी और लीवर को एयरलिफ्ट कर दिल्ली पहुंचा दिया गया।
दो दिन में दो युवाओं ने आठ को दी जिंदगी
बुधवार को पंचकूला के 18 वर्षीय रंचित ग्रोवर ने तीन लोगों को जिंदगी दी थी। रंचित का चंडीगढ़ में एक्सीडेंट हो गया था। उसके बाद उसकी किडनी, किडनी-पेनक्रियाज और लीवर का पीजीआई में ट्रांसप्लांट किया गया था।
उसके अगले ही दिन वीरवार को 24 वर्षीय सौरव ने पांच लोगों को नई जिंदगी दी। पीजीआई ने बताया कि अंगदान में मुख्य भूमिका दोनों युवकों के परिजनों ने दिखाई है। यह ऐसा मौका होता कि जब लोग आर्गन डोनेशन के लिए तैयार नहीं होते।
इस साल कितने आर्गन डोनेशन
-कुल सात ब्रेन डेड आर्गन डोनेशन
- इनसे 35 आर्गन निकाले गए
-इसमें 14 किडनी थी, एक हार्ट व पांच लीवर थे
-हार्ट को एम्स भेजा गया, दो लीवर दिल्ली भेजे गए
-12 कोर्निया पीजीआई में ही लोगों को लगाए गए
- तीन पेनक्रियाज भी निकाले गए
डा. विपिन कौशल, डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेडेंट पीजीआई ने बताया कि दो दिन में जिन दो परिवारों ने साहस का परिचय दिया है, वह किसी मिसाल से कम नहीं है। दोनों परिवारों ने जो फैसला लिया है, उससे समाज की सोच जरूर बदलेगी और जरूरतमंदों को नई जिंदगी मिलेगी।
सौरव के पिता तिलकराज ने बताया कि सौरव के अंग जिन लोगों में ट्रांसप्लांट हुए हैं, उनमें अब हम सौरव को देखेंगे। मेरा बेटा बहुत मेहनती, मददगार व होनहार था। मुझे इस बात की संतुष्टि है कि मरकर भी मेरा बेटा जरूरतमंद लोगों के काम आया।