चुनाव लड़ने से पहले पढ़ लें आयोग की नई गाइडलाइंस
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पेड न्यूज के बारे में आयोग ने सख्त कदम उठाए हैं। इसकी निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र बनाया गया है। यह जानकारी चुनाव आयोग के महानिदेशक अक्षय राउत ने वीरवार को यहां मीडिया वर्कशाप में इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया के प्रतिनिधियों की वर्कशाप में बोलते हुए दी।
चर्चाओं में जीत का दावा न करे वक्ता
चुनाव आयोग के महानिदेशक अक्षय राउत ने कहा कि मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले तक चैनलों पर जितनी भी चर्चाएं हों, उनमें जिन वक्ताओं को बुलाया जाए।
यह सुनिश्चित कर लें कि वे कोई ऐसी बात न करें, जिससे किसी दल या उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में कोई दावा किया जाए। यानी कोई भी व्यक्ति पार्टी या उम्मीदवार की जीत या हार का दावा नहीं कर सकेगा। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि ओपीनियन पोल भी इन 48 घंटों के दौरान प्रसारित नहीं हो सकेंगे।
एग्जिट पोल भी आखिरी चरण के मतदान की समाप्ति के आधे घंटे बाद प्रसारित हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि मीडिया को मतदान से 48 घंटे पहले आदर्श आचार संहिता को लेकर संवेदनशील रहना चाहिए।
उन्होंने इन 48 घंटों के भीतर किसी उम्मीदवार की हार या जीत को प्रभावित करने वाली खबरें दिखाना जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 126 के अंतर्गत आती हैं। उन्हें आदर्श आचार संहिता उल्लंघन माना जाएगा। जिसमें सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
कौन-कौन सी खबरें पेड न्यूज के दायरे में
महानिदेशक अक्षय राउत ने कहा कि प्रिंट मीडिया में अगर कोई ऐसी खबर प्रकाशित हुई जिससे किसी किसी दल या उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में जाने का आभास होता हो, उसे पेड न्यूज के शक के दायरे में रखा जाएगा।
पेड न्यूज पर निगाह रखने के लिए पहली बार चुनाव आयोग ने मजबूत निगरानी तंत्र बनाया है। राज्य और जिला स्तर पर कमेटियां गठित की गई हैं। ये कमेटियां अखबारों में छप रही खबरों पर निगाह रखेंगी।
अगर कोई खबर पेड न्यूज साबित हो गई तो उसे विज्ञापन मानकर डीएवीपी रेट के अनुसार उम्मीदवार के खाते में खर्च जोड़ दिया जाएगा। साथ में प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को भी शिकायत भेजी जाएगी।
सोशल मीडिया पर कोई दूसरा भी नहीं कर सकेगा प्रचार
महानिदेशक ने बताया कि सोशल मीडिया में अगर कोई उम्मीदवार अपने अकाउंट से प्रचार करेगा तो उसका खर्च खाते में जोड़ा जाएगा।
अगर उम्मीदवार या दल का कोई समर्थक ऐसी सामग्री अपलोड करेगा या प्रचार करेगा, तो उसे संबंधित उम्मीदवार की लिखित अनुमति होनी होगी। ऐसी सामग्री को भी खर्च मानकर संबंधित उम्मीदवार के खाते में जोड़ दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों की तरफ से प्रसारित की जाने वाली प्रचार सामग्री जनप्रतिनिधि अधिनियम एवं मीडिया के लिए लागू दिशा-निर्देश के अंतर्गत आएगी।
उस अकाउंट पर प्रचारित और प्रसारित किर एजाने वाली सामग्री को आयोग से प्रमाणित करवाना होगा। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीकांत वाल्गद, पंजाब के अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी बी. पुरुषार्थ, अतिरिक्त निदेशक राजीव खोसला और अन्य अफसर मौजूद थे।