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हरियाणा: नए डीजीपी पीके अग्रवाल ने संभाला कार्यभार, पंचकूला में मिला गार्ड ऑफ ऑनर
Mon, 16 Aug 2021 11:53 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 16 Aug 2021 11:53 AM IST
सार
पीके अग्रवाल मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं। 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और अभी तक वह डीजी स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के पद पर कार्यरत थे।
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पंचकूला सेक्टर 6 स्थित हरियाणा पुलिस मुख्यालय पहुंचे नवनियुक्त डीजीपी पीके अग्रवाल।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरियाणा पुलिस के नए डीजीपी पीके अग्रवाल ने सोमवार को अपना कार्यभार संभाल लिया। वे सुबह पंचकूला सेक्टर 6 पुलिस मुख्यालय पहुंचे और गार्ड ऑफ ऑनर के बाद अपना पदभार संभाला। अग्रवाल की रविवार देर शाम ही डीजीपी पद पर नियुक्ति की गई थी। हरियाणा सरकार ने उन्हें मनोज यादव के स्थान पर डीजीपी बनाया है।
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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए तीन नामों का पैनल हरियाणा सरकार को भेजा था। पैनल तैयार करते समय वरिष्ठता को पैमाना बनाया गया था। पैनल में आईपीएस पीके अग्रवाल, रमेश चंद्र मिश्रा और मोहम्मद अकील के नाम शामिल थे। हरियाणा सरकार ने अब पीके अग्रवाल को प्रदेश का नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया है। इनका कार्यकाल दो वर्ष का होगा।
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अग्रवाल मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं। 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और अभी तक वह डीजी स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के पद पर कार्यरत थे। वे 30 जून 2023 को सेवानिवृत्त होंगे। उन्हें 2004 में पुलिस मेडल और 2015 में राष्ट्रपति पुलिस मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।
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विवादों से रहा मनोज यादव का नाता
हरियाणा के मौजूदा डीजीपी मनोज यादव का नाता शुरू से विवादों में रहा। गृह मंत्री अनिल विज के आदेशों पर अमल न करने के कारण वह सबसे पहले सुर्खियों में आए। सीआईडी अफसरों की रिपोर्टिंग गृह मंत्री को न करने के विवाद के साथ उनका नाम जुड़ा। किसान आंदोलन के दौरान स्थिति संभालने में नाकाम रहने के भी उन पर आरोप लगे।
आईजी वाईपूर्ण कुमार के साथ उनका विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री की सुरक्षा चूक मामले में आरोपी अफसरों पर कार्रवाई न करने को लेकर वह विधानसभा अध्यक्ष के निशाने पर थे और मामला विशेषाधिकार हनन समिति के पास पहुंचा। विज उन्हें रिलीव करने के लिए गृह सचिव को पत्र तक लिख चुके थे। मनोज यादव ने 22 जून को सरकार को पत्र लिखकर उन्हें रिलीव करने को कहा था। उन्होंने वापस आईबी में जाने की इच्छा जताई है।