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Chandigarh News: शिक्षा के माध्यम से समाज को दी नई दिशा, मरने के बाद देश का काम आए शरीर, यही इच्छा

Sun, 13 Aug 2023 01:14 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Aug 2023 01:14 AM IST
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New direction given to the society through education, the body should be useful for the country after death, this is the desire
पंचकूला। अपने जीवन में देश के काम तो काफी लोग आते हैं। मगर कुछ विरले शख्सियत मरने के बाद भी देश के लिए अपना योगदान देते हैं। इनमें पिंजौर निवासी बृज भूषण शर्मा और अमरावती निवासी मदनमोहन बक्शी भी शामिल हैं। दोनों ने ही मरणोपरांत देहदान करने का शपथ पत्र दिया है। दोनों ही रिटायर प्रिंसिपल हैं। उनका कहना है कि जीवनभर शिक्षा के माध्यम से समाज को नई दिशा दिखाने का प्रयास किया। अब इच्छा है कि मरने के बाद देश के काम आए शरीर और किसी अच्छे काम का हिस्सा बन सकें। शहर की हितैषी फाउंडेशन अंगदान और देहदान के लिए काम कर रही है। संस्था लोगों को इसके लिए प्रेरित करती है। सहमत होने के बाद उससे शपथ पत्र भरवाया जाता है। फाउंडेशन के चेयरमैन भारत हितैषी ने बताया कि उनकी संस्था ने फरवरी 2009 से यह बीड़ा उठाया कि लोगों को नेत्रदान, अंगदान और देहदान के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि एक ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति 8 से 10 लोगों को जीवनदान दे सकता है। फाउंडेशन के प्रयासों से अब तक 3950 लोग देहदान के लिए संकल्प पत्र भर चुके हैं। इन सभी को पीजीआई चंडीगढ़ की ओर से डोनर कार्ड भी दिए जा चुके हैं।
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पत्नी के नेत्रदान किए, अब खुद का देहदान कर लोगों को देंगे नई जिंदगी
पिंजौर निवासी बृज भूषण शर्मा ने बताया कि उनकी पत्नी की छह साल पहले मृत्यु हुई थी। उनके नेत्रदान करवाए गए थे। अब उनकी भी इच्छा है मरणोपरांत शरीर और अंगों को दान किया जाए, ताकि किसी को नई जिंदगी मिल सके। उन्होंने बताया कि इसके लिए पीजीआई को पत्र लिखा मगर कोई रिस्पांस नहीं मिला। फिर हितैषी फाउंडेशन के बारे में पता चला तो उसके माध्यम से शरीर दान के लिए शपथ पत्र भरा।
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बक्शी बोले- अगर शरीर नहीं मिलेगा तो नए रिसर्च कैसे होंगे
अमरावती निवासी मदनमोहन बक्शी ने कहा, ‘जीवन के 36 साल युवाओं को पढ़ाने में गुजार दिए। इस दौरान रोहतक भी तैनाती रही। तब पता चला कि मेडिकल कॉलेजों में बच्चों को रिसर्च के लिए शरीर पर्याप्त संख्या में नहीं मिल रहे हैं। तब फैसला लिया कि मैं अपनी देह दान करूंगा।’ उन्होंने कहा कि शरीर को जलाने में काफी लकड़ियां बर्बाद होती हैं और वातावरण भी प्रदूषित होता है। उनका शरीर रिसर्च के काम आएगा तो ऐसा कुछ नहीं करना पड़ेगा। बक्शी ने बताया कि वे अब तक 32 बार रक्तदान कर चुके हैं। इसके अलावा निशुल्क ऑनलाइन भी उर्दू पढ़ाते हैं।
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