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Punjab BJP: पंजाब भाजपा के नए प्रधान के लिए आसान नहीं राह, गुटबाजी को विराम देकर एक मंच पर लाना बड़ी चुनौती
Thu, 06 Jul 2023 04:06 PM IST
निवेदिता वर्मा
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 06 Jul 2023 04:06 PM IST
सार
भाजपा में एससी एसटी आयोग के चेयरमैन विजय सांपला व केंद्रीय राज्यमंत्री सोमप्रकाश के बीच छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। इन दोनों दिग्गजों को साथ लेकर चलना काफी मुश्किल व चुनौती भरा होगा। पूर्व प्रदेश प्रधान मनोरंजन कालिया के गुट को भी साथ लेकर चलना होगा।
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पंजाब भाजपा के नए प्रधान बने सुनील जाखड़।
- फोटो : twitter @BJP4Punjab
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विस्तार
पंजाब भाजपा के नए प्रधान सुनील जाखड़ बन गए हैं लेकिन जहां गुटबाजी को खत्म करना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी वहीं पार्टी का ग्राफ बढ़ाने के लिए उनको जमीनी स्तर पर वर्करों को खड़ा करना होगा। पंजाब में जहां पार्टी को 2 लोकसभा सीट से आगे बढ़ाना होगा वहीं कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं और पुराने टकसाली भाजपाईयों के बीच तालमेल बिठाना होगा।
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कांग्रेस से आए 50 फीसदी नेताओं ने भाजपा के अहम पदों पर अपना कब्जा जमा रखा है, जिससे टकसाली भाजपाई असहज महसूस कर रहे हैं। भाजपा में गुटबाजी के हालात यह हैं कि पठानकोट से पूर्व विधायक अश्वनी शर्मा जोकि पूर्व प्रदेशाध्यक्ष हैं, उन्होंने नए प्रधान जाखड़ को बधाई तक नहीं दी। उन्होंने अपने फेसबुक के अधिकारिक पेज पर तमाम भाजपा नेताओं व वर्करों का धन्यवाद किया, जिन्होंने उनको कार्यकाल में सहयोग दिया था।
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जाखड़ को नहीं दी मुबारकबाद
भाजपा की उपाध्यक्ष मोना जयसवाल ने गुरु पूर्णिमा पर बधाई दी लेकिन जाखड़ को मुबारकबाद देने के लिए कोई पोस्ट अपलोड नहीं की। इतना ही नहीं भाजपा के उपाध्यक्ष सुभाष शर्मा समेत तमाम प्रदेश महासचिवों ने जाखड़ को बधाई देने के लिए एक पोस्ट तक अपलोड नहीं की, जिससे साफ है कि पार्टी में अश्वनी शर्मा का गुट जाखड़ के बनने से असहज है।
वहीं, भाजपा में एससी एसटी आयोग के चेयरमैन विजय सांपला व केंद्रीय राज्यमंत्री सोमप्रकाश के बीच छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। इन दोनों दिग्गजों को साथ लेकर चलना काफी मुश्किल व चुनौती भरा होगा। पूर्व प्रदेश प्रधान मनोरंजन कालिया के गुट को भी साथ लेकर चलना होगा, जिनका मौजूदा उपाध्यक्ष राकेश राठौर के अलावा पूर्व निकायमंत्री तीक्ष्ण सूद से छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। भाजपा की मोना जयसवाल अपना गुट लेकर चल रही है और प्रदेश प्रधान मीनू सेठी के बावजूद मोना का सिक्का भाजपा महिला इकाई में चलता रहा है।
कई अड़चनें हैं राह में
अकाली दल के पूर्व विधायक सरूप चंद सिंगला व कांग्रेस से मनप्रीत बादल के पार्टी में शामिल होने से संकट खड़ा हो कि दोनों बठिंडा से चुनाव लड़ते रहे हैं ऐसे में जाखड़ कैसे तालमेल बिठाएंगे, यह आसान नहीं होगा। प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और पूर्व मंत्री गुरमीत सिंह सोढ़ी दोनों अब बीजेपी में हैं लेकिन दोनों के बीच खटास है। सुनील जाखड़ तो कई बैठकों में यह तक कह चुके हैं कि वह गुरमीत सिंह सोढ़ी के साथ नहीं बैठ सकते।
पार्टी के महासचिव जीवन गुप्ता व सुभाष शर्मा पूर्व प्रधान अश्वनी शर्मा के समय काफी पॉवरफुल रहे हैं और उन्होंने अपने धड़े बना रखे हैं। एससी एसटी आयोग के पूर्व चेयरमैन राजेश बाघा की सांपला गुट के साथ काफी दूरियां हैं, वह अपनी टीम अलग लेकर चलते हैं।
कांग्रेस से भी काफी नेता भाजपा में आ चुके हैं, जिनमें बलवीर सिद्धू, गुरप्रीत कांगड़, केवल सिंह ढिल्लों, कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रमुख हैं, ऐसे नेताओं को भी तरजीह देनी होगी। वहीं, पूर्व लोकसभा सांसद अविनाश राय खन्ना की लॉबी भी पंजाब में है, जो हाशिये पर चल रही हैं, उनको साथ लेकर चलना जाखड़ के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।