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पंजाबः विधायकों के लिए लाभ के पद संबंधी नए बिल को हरी झंडी, विधानसभा में पेश होगा बिल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 22 Aug 2018 09:38 AM IST
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पंजाब मंत्रीमंडल ने विधायकों को कई अन्य नई श्रेणियों में ‘लाभ का पद’ रखने योग्य बनाने के लिए एक नया कानून बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। मंगलवार को मंत्रिमंडल की सहमति के बाद ‘दा पंजाब स्टेट लैजिस्लेचर (प्रीवेंशन ऑफ डिसक्वालीफिकेशन) (संशोधन) बिल -2018 को विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, इस बिल में प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, लाभ के पदों की विभिन्न श्रेणियों को पद /ऑफिस की मौजूदा सूची में शामिल किया जाएगा। इसके अनुसार, इन पदों पर विधायक बने रह सकेंगे और वह अयोग्य नहीं होंगे। यह संशोधन प्रशासन के मौजूदा दौर की उलझनों के हल के लिए लाया गया है। इसमें नया सेक्शन 1-ए शामिल किया गया है, जिसमें ‘लाज़िमी भत्तों’ को ‘संवैधानिक संस्था’ और ‘असंवैधानिक संस्था ’ में परिभाषित किया गया है।
सैक्शन 1 (ए) के अनुसार ‘लाज़िमी भत्तों ’ का मतलब कुछ ऐसी राशि से होगा जो पद पर मौजूद व्यक्ति को रोज़मर्रा के भत्तों, सफरी भत्तों, आवास भत्तों या यात्रा भत्तों के रूप में दी जाएगी जिससे वह पदों के कामकाज को निभाने के लिए आने वाले किसी भी खर्च किए के लिए प्रतिफल के रूप में इसकी प्राप्ति के योग्य हो सके। इस एक्ट के सैक्शन -2 के तहत लाभ के पद की श्रेणियों को शामिल और विस्तार किया जायेगा।
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इस एक्ट के सेक्शन-2 के अनुसार इसमें एक मंत्री (सहित मुख्यमंत्री) राज्यमंत्री या उपमंत्री, चेयरमैन, उप चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन, राज्य योजना बोर्ड के पद, विधानसभा में मान्यता प्राप्त पार्टी और मान्यता प्राप्त ग्रुप (हरेक नेता और हरेक डिप्टी नेता) के पद, विधानसभा में मुख्य सचेतक, उप सचेतक या सचेतक के पद शामिल किए गए हैं। गए हैं। बिल का सेक्शन-2 संशोधित किया गया है, जिसके अनुसार इसमें एक कमेटी के चेयरमैन या मैंबर जो सरकार को सलाह देने के उद्देश्य के साथ अस्थायी तौर पर
स्थापित की गई है या सार्वजनिक महत्ता के मामलों संबंधी कोई अथॉरटी के पद पर मौजूद कोई व्यक्ति लाज़िमी भत्तों को छोड़ कर कोई अन्य पारिश्रमिक के लिए हकदार नहीं है, शामिल किया गया है। इसमें किसी भी संवैधानिक या असंवैधानिक संस्था के चेयरमैन, डायरैक्टर या मैंबर के पद को भी शामिल किया गया है अगर वह लाज़िमी भत्तों को छोड़ कर किसी अन्य पारिश्रमिक का हकदार नहीं है।
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सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, इस बिल में प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, लाभ के पदों की विभिन्न श्रेणियों को पद /ऑफिस की मौजूदा सूची में शामिल किया जाएगा। इसके अनुसार, इन पदों पर विधायक बने रह सकेंगे और वह अयोग्य नहीं होंगे। यह संशोधन प्रशासन के मौजूदा दौर की उलझनों के हल के लिए लाया गया है। इसमें नया सेक्शन 1-ए शामिल किया गया है, जिसमें ‘लाज़िमी भत्तों’ को ‘संवैधानिक संस्था’ और ‘असंवैधानिक संस्था ’ में परिभाषित किया गया है।
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सैक्शन 1 (ए) के अनुसार ‘लाज़िमी भत्तों ’ का मतलब कुछ ऐसी राशि से होगा जो पद पर मौजूद व्यक्ति को रोज़मर्रा के भत्तों, सफरी भत्तों, आवास भत्तों या यात्रा भत्तों के रूप में दी जाएगी जिससे वह पदों के कामकाज को निभाने के लिए आने वाले किसी भी खर्च किए के लिए प्रतिफल के रूप में इसकी प्राप्ति के योग्य हो सके। इस एक्ट के सैक्शन -2 के तहत लाभ के पद की श्रेणियों को शामिल और विस्तार किया जायेगा।
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इस एक्ट के सेक्शन-2 के अनुसार इसमें एक मंत्री (सहित मुख्यमंत्री) राज्यमंत्री या उपमंत्री, चेयरमैन, उप चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन, राज्य योजना बोर्ड के पद, विधानसभा में मान्यता प्राप्त पार्टी और मान्यता प्राप्त ग्रुप (हरेक नेता और हरेक डिप्टी नेता) के पद, विधानसभा में मुख्य सचेतक, उप सचेतक या सचेतक के पद शामिल किए गए हैं। गए हैं। बिल का सेक्शन-2 संशोधित किया गया है, जिसके अनुसार इसमें एक कमेटी के चेयरमैन या मैंबर जो सरकार को सलाह देने के उद्देश्य के साथ अस्थायी तौर पर
स्थापित की गई है या सार्वजनिक महत्ता के मामलों संबंधी कोई अथॉरटी के पद पर मौजूद कोई व्यक्ति लाज़िमी भत्तों को छोड़ कर कोई अन्य पारिश्रमिक के लिए हकदार नहीं है, शामिल किया गया है। इसमें किसी भी संवैधानिक या असंवैधानिक संस्था के चेयरमैन, डायरैक्टर या मैंबर के पद को भी शामिल किया गया है अगर वह लाज़िमी भत्तों को छोड़ कर किसी अन्य पारिश्रमिक का हकदार नहीं है।