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चंडीगढ़ के विकास को चाहिए ट्राइसिटी विजन

Thu, 29 Jan 2015 01:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 29 Jan 2015 01:41 PM IST
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Need of Tricity Vision for Chandigarh Development

चंडीगढ़ का विकास सीमाओं में रहकर नहीं किया जा सकता है। इसके लिए ट्राइसिटी का विजन चाहिए, जिसमें जीरकपुर, मोहाली, पंचकूला को भी एक साथ रखना होगा।

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यह है यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न से मान्यता प्राप्त भारतीय आर्किटेक्ट डा. अनिल एस. ठाकुर की स्टडी का एक निचोड़। उन्होंने चंडीगढ़ के आर्किटेक्चर पर की गई स्टडी में सिटी के रेजीडेंट्स, ब्यूरोक्रेट और बाशिंदों की भूमिका पर प्रकाश डाला है।
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चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने बताया कि उन्होंने नौ मुख्य सेक्टर और 350 रेजीडेंट्स का इंटरव्यू किया, जिसमें निष्कर्ष निकाला कि चंडीगढ़ अब एक हाइब्रिड सिटी बन रहा है। अब चंडीगढ़ के फ्यूचर ग्रोथ के लिए आर्किटेक्चर पेरीफेरी एरिया को लांघना होगा।
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अब चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए बनाए जाने वाले मास्टर प्लान में पंचकूला, मोहाली, जीरकपुर और मुल्लांपुर को भी शामिल करना चाहिए। सिटी प्लानर डा. अनिल ठाकुर ने कहा कि चंडीगढ़ ली कार्बूजिए मॉडल से भी ज्यादा विकसित हो गया है। अपनी रिसर्च के दौरान वर्ष 2004 से 2011 के बीच उन्होंने चंडीगढ़ के कुल 14 ट्रिप लगाए। वह चंडीगढ़ के ही निवासी हैं और 45 साल यहां आर्किटेक्ट रहे।

यहां की स्टडी

डा. अनिल ठाकुर ने चंडीगढ़ के नौ सेक्टरों की स्टडी की। इसमें लेक, सेक्टर-17, सेक्टर-25, जनता और कुम्हार कॉलोनी, सेक्टर-22, 15 की मार्केट, फर्नीचर मार्केट, इंडस्ट्रियल एरिया, बुटरेला, बढ़ेहरी और राउंड अबाउट पर स्टडी की। स्टडी में स्पष्ट हुआ कि चंडीगढ़ का कैरेक्टर स्टेक होल्डरों और स्ट्रगल करने वालों की वजह से बदलता जा रहा है।


उन्होंने कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था भी बदलाव का मुख्य कारण है। उन्होंने बताया कि 350 लोगों की इंटरव्यू में लेबर से लेकर हर तबके के लोग शामिल हैं। सिटी कई ऑथरशिप का प्रोडक्ट है न कि सिर्फ ली कार्बूजिए का। ली कार्बूजिए के आइडिया और उनकी डिजाइन समय के साथ बदलती जा रही हैं।

मेट्रो की जगह ट्राम हो तो बेहतर
मेट्रो को लाने में चंडीगढ़ प्रशासन को काफी समय लग जाएगा। इस प्रोजेक्ट में काम करने से सिटी का मूल स्वरूप भी बिगड़ सकता है। इसकी बजाय ट्राम की प्लानिंग की जाए तो बेहतर होगा।

मुख्य बिंदु
चंडीगढ़ के गांव 52 से घटकर 23 हो गए हैं। इसमें जनसंख्या काफी ज्यादा है।
कॉलोनी की जगह धनास, सेक्टर-49 और मौली जांगरां में वन रूम फ्लैट बने।
माइग्रेंट वेंडर रेहड़ी मार्केट और दीवारों पर भी सामान बेचने लगे हैं।

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