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नायब शाही इमाम बोले- फैसले का सम्मान, विवादित ढांचा गिराने वालों पर होनी चाहिए थी कार्रवाई
Sun, 10 Nov 2019 12:04 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 10 Nov 2019 12:04 PM IST
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नायब शाही इमाम
- फोटो : अमर उजाला
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बाबरी मस्जिद और श्रीराम जन्मभूमि मामले के फैसले पर जामा मस्जिद के नायब शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मुसलमान सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। अच्छा होता जो इसके साथ विवादित ढांचा गिराने वाले लोगों के लिए भी सजा का ऐलान किया जाता। क्योंकि फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा है कि विवादित इमारत को गिराना कानून का उल्लंघन था।
नायब शाही इमाम ने पंजाब निवासियों को आपसी भाईचारा बनाकर शांति बनाए रखने की अपील की। नायब शाही इमाम ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी, सुप्रीम कोर्ट सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड की दलीलों पर तस्लीम करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस फैसले से मुस्लिम समाज में खुशी नहीं है। मस्जिद की जगह पर सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड ने दावे किए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के दावे खारिज कर दिए।
मस्जिद के लिए अलग से पांच एकड़ जमीन देने का फैसला सुना दिया। जब दोनों बोर्ड का दावा ही खारिज हो गया तो दूसरी जगह पर जमीन देने की बात मायने नहीं रखती। कुछ राजनीतिक पार्टियों ने धर्म के नाम पर लोगों को बांट कर वोट हासिल करने के लिए इस मुद्दे को पूर्ण रुप से गर्म रखा। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कुछ पार्टियों को इसका लाभ मिलेगा।
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नायब शाही इमाम ने पंजाब निवासियों को आपसी भाईचारा बनाकर शांति बनाए रखने की अपील की। नायब शाही इमाम ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी, सुप्रीम कोर्ट सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड की दलीलों पर तस्लीम करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस फैसले से मुस्लिम समाज में खुशी नहीं है। मस्जिद की जगह पर सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड ने दावे किए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के दावे खारिज कर दिए।
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मस्जिद के लिए अलग से पांच एकड़ जमीन देने का फैसला सुना दिया। जब दोनों बोर्ड का दावा ही खारिज हो गया तो दूसरी जगह पर जमीन देने की बात मायने नहीं रखती। कुछ राजनीतिक पार्टियों ने धर्म के नाम पर लोगों को बांट कर वोट हासिल करने के लिए इस मुद्दे को पूर्ण रुप से गर्म रखा। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कुछ पार्टियों को इसका लाभ मिलेगा।
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