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शरदीय नवरात्रि: 8 दिनों में रोज ऐसे करेंगे पूजा, तो खुश होंगी मां, पूरी करेंगी हर मनोकामना
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 09 Oct 2018 02:00 PM IST
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शरदीय नवरात्र शुरू हो रहे हैं, अगर आप 8 दिन हर रोज इस तरीके से पूजा करेंगे तो मां हर मनोकामना पूरी करेंगे। कलश की स्थापना करने समय भी सावधानी बरतें। आश्विन शुक्लपक्ष प्रतिपदा (शारदीय नवरात्र) 10 अक्तूबर दिन बुधवार से शुरू होंगे। प्रतिपदा नौ अक्तूबर को सुबह नौ बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ होकर 10 अक्तूबर को सुबह सात बजकर 25 मिनट पर समाप्त हो रहा है।
सूर्योदय सुबह छह बजकर 25 मिनट पर है। धर्म शास्त्र के अनुसार यदि सूर्योदय के तीन मुहूर्त तक प्रतिपदा है तो आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा नवरात्र का प्रारंभ बुधवार को ही होगा। यह बात सेक्टर-30 के श्रीमहाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित वीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही है। मिश्र ने कहा कि यदि चित्रा नक्षत्र वैधृति योग हो तो कलश स्थापना, नवरात्र प्रतिपदा की पूजा प्रारंभ करना निषेध माना गया है।
चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के पूर्वाद्ध को छोड़कर उत्तरार्ध में पूजन कलश स्थापना करनी चाहिए। नौ अक्तूबर को चित्रा नक्षत्र का प्रारंभ दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से होकर 10 अक्तूबर को दोपहर 11 बजे तक रहेगा। वैधृति योग नौ अक्तूबर को दोपहर दो बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 10 अक्तूबर सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा।
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पंडित वीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि नौ अक्तूबर को चित्रा नक्षत्र का पूवार्धकाल रात 11 बजकर 23 मिनट पर और वैधृति योग का पूवार्धकाल रात 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इसलिए नवरात्र का प्रारंभ और कलश स्थापना पूजन नौ अक्तूबर को न होकर 10 अक्तूबर को ही होगा।
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सूर्योदय सुबह छह बजकर 25 मिनट पर है। धर्म शास्त्र के अनुसार यदि सूर्योदय के तीन मुहूर्त तक प्रतिपदा है तो आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा नवरात्र का प्रारंभ बुधवार को ही होगा। यह बात सेक्टर-30 के श्रीमहाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित वीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही है। मिश्र ने कहा कि यदि चित्रा नक्षत्र वैधृति योग हो तो कलश स्थापना, नवरात्र प्रतिपदा की पूजा प्रारंभ करना निषेध माना गया है।
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चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के पूर्वाद्ध को छोड़कर उत्तरार्ध में पूजन कलश स्थापना करनी चाहिए। नौ अक्तूबर को चित्रा नक्षत्र का प्रारंभ दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से होकर 10 अक्तूबर को दोपहर 11 बजे तक रहेगा। वैधृति योग नौ अक्तूबर को दोपहर दो बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 10 अक्तूबर सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा।
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पंडित वीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि नौ अक्तूबर को चित्रा नक्षत्र का पूवार्धकाल रात 11 बजकर 23 मिनट पर और वैधृति योग का पूवार्धकाल रात 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इसलिए नवरात्र का प्रारंभ और कलश स्थापना पूजन नौ अक्तूबर को न होकर 10 अक्तूबर को ही होगा।
पूजन का समय...
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- फोटो : navratri
कलश स्थापना और पूजन का सबसे उत्तम समय सूर्योदय छह बजकर 25 मिनट के बाद सुबह सात बजकर 25 मिनट तक का है। इसके बाद मध्यम है। बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं होता। बुधवार को राहु काल दोपहर 12 बजे से लेकर डेढ़ बजे तक है। राहुकाल में कलश स्थापना और पूजन करना अशुभ माना जाता है। सुबह 11 बजकर 30 मिनट तक ही कलश स्थापना और पूजन प्रारंभ करना चाहिए।
ऐसे करें पूजा...
देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे और सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि सबसे पहले गणेश पूजा, कलश पूजा, नवग्रह पूजा के बाद मां दुर्गा का पूजन करना चाहिए।
आवाहन के बाद जल स्नान, दूध, दही, घी, शहद से स्नान करवाने के बाद वस्त्र चंदन, चावल, फूल मालाएं चढ़ाने के बाद धूप दीप दिखाकर प्रसाद फल, पान चढ़ाकर मां दुर्गा की आरती करनी चाहिए। पंडित वीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार अष्टमी 17 अक्तूबर को है, जबकि नवमी और विजयादशमी 18 अक्तूबर को है।
ऐसे करें पूजा...
देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे और सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि सबसे पहले गणेश पूजा, कलश पूजा, नवग्रह पूजा के बाद मां दुर्गा का पूजन करना चाहिए।
आवाहन के बाद जल स्नान, दूध, दही, घी, शहद से स्नान करवाने के बाद वस्त्र चंदन, चावल, फूल मालाएं चढ़ाने के बाद धूप दीप दिखाकर प्रसाद फल, पान चढ़ाकर मां दुर्गा की आरती करनी चाहिए। पंडित वीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार अष्टमी 17 अक्तूबर को है, जबकि नवमी और विजयादशमी 18 अक्तूबर को है।