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पंजाब: बिजली संकट के बहाने सिद्धू का कैप्टन सरकार पर हमला, कहा- मंत्री सिर्फ शोपीस, विभागों पर अफसरशाही का कब्जा

Tue, 06 Jul 2021 07:37 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 06 Jul 2021 07:37 PM IST
सार

सोमवार को कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता नवजोत सिंह सिद्धू शिअद-अकाली सरकार के दौरान हुए बिजली खरीद समझौते को लेकर भड़के। उन्होंने ट्वीट कर इस समझौते पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में 2017 से मांग कर रहे हैं लेकिन विभागीय नौकरशाही और चुने हुए मंत्रियों के दिखावे के कारण यह संभव नहीं हो पाया है।

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Navjot Singh Sidhu targets on Punjab government over power crisis
नवजोत सिंह सिद्धू। (फाइल फोटो) - फोटो : twitter

विस्तार

पंजाब के बिजली संकट के मुद्दे पर पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को फिर ट्वीट कर अपनी ही पार्टी की सरकार को निशाने पर लिया। सिद्धू ने ट्वीट के जरिये कैप्टन सरकार से पूर्व बादल सरकार में किए गए बिजली खरीद समझौतों को रद्द करने की मांग की। सिद्धू ने पंजाब सरकार के मंत्रियों को शोपीस और विभागों पर अफसरशाही का कब्जा होने की बात कही।

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नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार सुबह ट्वीट किया कि मुफ्त बिजली के खोखले वादे तब तक कोई अर्थ नहीं रखते हैं, जब तक पावर परचेज समझौतों (पीपीए) को पंजाब विधानसभा रद्द नहीं करती। आगे लिखा कि 300 यूनिट मुफ्त बिजली देना महज कल्पना है, जब तक खरीद समझौतों में नुक्स वाली धाराओं ने पंजाब को बांधा हुआ है। 
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सिद्धू ने लिखा कि समझौते पंजाब को 100 फीसदी उत्पादन के लिए निर्धारित चार्ज अदा करने के लिए पाबंद करते हैं, जबकि दूसरे राज्य 80 फीसदी से ज्यादा का भुगतान नहीं करते। अगर यह निर्धारित चार्ज पीपीए के अधीन निजी बिजली प्लांटों को अदा नहीं किए जाते तो यह तुरंत बिजली की लागत में 1.20 रुपये प्रति यूनिट घटा देगा।
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आगे लिखा कि धान सीजन के दौरान पंजाब में बिजली की मांग 13000 या 14000 मेगावाट केवल चार माह के लिए है, जबकि आम दिनों में बिजली की मांग 5000-6000 मेगावाट है। लेकिन पीपीए के निर्धारित खर्च का भुगतान करना पड़ रहा है। साथ ही लिखा कि और भी चिंताजनक है कि पीपीए के तहत पीक सीजन के दौरान इन प्राइवेट पावर प्लांटों से बिजली की सुनिश्चित आपूर्ति का कोई प्रबंध नहीं है। जिससे धान की बुवाई के मौजूदा सीजन में निजी थर्मल प्लांट के दो यूनिट बिना मरम्मत बंद कर दिए गए। जिससे पंजाब को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ी।

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