पंजाब: नवजोत सिद्धू बोले- डीजीपी सहोता व महाधिवक्ता दयोल दागी, सीएम चन्नी ने दोनों का किया बचाव
पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी ने अफसरों का बचाव करते हुए कहा कि सहोता के नेतृत्व में बेअदबी मामले की जांच पूरी होने से पहले ही मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। ऐसे में सहोता द्वारा बादलों को क्लीनचिट देने की बात सही नहीं है।
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पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच गुरुवार को पंजाब भवन में विवाद सुलझाने के लिए हुई बैठक में दोनों ही पक्ष अपने-अपने तर्कों पर कायम रहे। सिद्धू कथित दागी अफसरों को हटाने पर अड़े रहे तो चन्नी ने उनकी नियुक्ति को सही ठहराया। बाद में पर्यवेक्षक हरीश चौधरी ने बीचबचाव कर तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की बात कही जो दोनों अफसरों लगे आरोपों पर विचार करेगी। इसके साथ ही कमेटी भविष्य में अफसरों की नियुक्ति के संबंध में हाईकमान को रिपोर्ट देगी और उसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।
बैठक में कैबिनेट मंत्री परगट सिंह, विधायक कुलजीत सिंह नागरा और पार्टी हाईकमान के पर्यवेक्षक हरीश चौधरी मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश प्रधान नवजोत सिद्धू मौजूद रहे। सूत्रों का कहना है कि बैठक शुरू होते ही सिद्धू का कहना था कि वह कांग्रेसी हैं और रहेंगे। न तो कांग्रेस छोड़ रहे हैं और न ही पार्टी की साख को नुकसान पहुंचने देंगे।
उन्होंने डीजीपी इकबाल सहोता और एजी दयोल की नियुक्ति पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सहोता ने बेअदबी कांड की जांच सही ढंग से नहीं की और बादल परिवार को क्लीनचिट दी। ऐसे व्यक्ति को प्रदेश का डीजीपी बनाना गलत है। सिद्धू ने एजी देयोल की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया और कहा कि वह पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के वकील रहे हैं।
राज्य सरकार के विरोध के विपरीत सैनी को ब्लैंकेट बेल दिलाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। उनका कहना था कि जो अधिकारी आरोपियों को जमानत दिला सकते हैं, वे पंजाब के हितों की रक्षा के लिए क्या लडे़ंगे? इसलिए ऐसे व्यक्ति को महाधिवक्ता के पद पर रखने का कोई औचित्य नहीं है।
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पता चला है कि बैठक में सिद्दू अपने साथ दो फाइलें लेकर पहुंचे थे। उनमें डीजीपी सहोता और एजी देयोल से संबंधित दस्तावेज थे। फाइलों में दोनों अफसरों के खिलाफ मीडिया में छपी खबरों की कतरनें भी थीं। उन पर सिद्धू ने नोटिंग लगा रखी थी। इनके आधार पर ही उन्होंने दलीलें पेश कीं।
बताया जाता है कि करीब आधा घंटे तक सिद्धू दोनों अफसरों पर जमकर बरसे और अन्य नेता चुपचाप सुनते रहे। इसके बाद परगट सिंह ने बैठक में सिद्धू के आरोपों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अफसरों के बारे में दी गई जानकारी बहुत गंभीर है, इसलिए दोनों अफसरों की तैनाती पर फिर से विचार होना चाहिए।
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इसके जवाब में मुख्यमंत्री चन्नी ने अफसरों का बचाव करते हुए कहा कि सहोता के नेतृत्व में बेअदबी मामले की जांच पूरी होने से पहले ही मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। ऐसे में सहोता द्वारा बादलों को क्लीनचिट देने की बात सही नहीं है। चन्नी ने एजी का भी बचाव करते हुए कहा कि सैनी के मामले में भी एडवोकेट के रूप में वे अपना कार्य कर रहे थे।
सूत्रों ने बताया कि विवाद बढ़ता देख हरीश चौधरी ने हस्तक्षेप किया और तीन सदस्यीय कमेटी के गठन की बात कही। यह कमेटी जहां भविष्य में अफसरों की नियुक्ति पर सर्वसम्मति से फैसला लेगी, वहीं डीजीपी सहोता और एजी देयोल पर लगाए आरोपों का भी गहराई से आकलन करेगी। चौधरी ने यह भी कहा कि यह कमेटी हाईकमान को अपनी रिपोर्ट दिया करेगी और अंतिम फैसले के अनुसार अफसरों की नियु्क्ति पर फैसला लिया जाएगा।