पंजाब: बीएसएफ मुद्दे पर केंद्र पर बरसे नवजोत सिंह सिद्धू, कैप्टन अमरिंदर सिंह पर साधा निशाना
सिद्धू ने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम लिए बिना कहा- मैं पूछना चाहता हूं कि पंजाब के हालात खराब क्यों हुए, इससे पहले क्यों नहीं हुए। सिद्धू ने आरोप लगाया कि पंजाब में केंद्र सरकार की दखलंदाजी कुछ नेताओं के कारण है। यह वो दिग्गज नेता हैं, जिनके खिलाफ ईडी के केस चल रहे हैं। ऐसे लोगों ने अपनी सुरक्षा के लिए पंजाब के हितों को बेच दिया। उल्लेखनीय है कि ईडी कैप्टन और उनके बेटे के खिलाफ लंबे समय से मनी लॉड्रिंग के मामले की जांच कर रही है।
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मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा सोमवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने भी हिस्सा लिया। सिद्धू ने बैठक में और उसके बाद प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित रहकर अपने चिर-परिचित अंदाज में केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। खास बात यह रही कि उन्होंने चन्नी सरकार पर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हमला नहीं किया, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधने से नहीं चूके।
करीब साढ़े तीन घंटे चली बैठक में जहां अन्य सभी नेताओं ने विभिन्न मुद्दों पर विचार रखे, वहीं सिद्धू बैठक में रहकर भी लगातार ट्वीट करते रहे। उन्होंने लगातार पांच ट्वीट कर केंद्र सरकार पर पंजाब पर कब्जा करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने ट्वीट किया कि केंद्र एक राज्य के भीतर एक राज्य बनाकर देश के संघीय ढांचे को कमजोर कर रहा है।
बीएसएफ, सीमा की परिभाषा क्या है? 50 किमी सार्वजनिक व्यवस्था, जो शांति और सुरक्षा का प्रतीक है, मुख्य रूप से राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। पश्चिम बंगाल में बीएसएफ दैनिक सुरक्षा के नाम पर देश के संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करती है और संभावना है कि पंजाब में भी यातना, झूठे मामले, मनमानी हिरासत और अवैध गिरफ्तारी के उदाहरण सामने आएंगे।
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार की मंशा गलत है। वह बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाकर राज्य के अधिकारों को नियंत्रित करने की सियासी साजिश रच रही है और केंद्र ने पंजाब में विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह कदम उठाया है, क्योंकि उसे अपनी हार साफ नजर आ रही है। पंजाब में भाजपा का खाता तक नहीं खुलेगा। केंद्र चुनाव में पश्चिम बंगाल जैसा खेल करना चाहता है और यह सारा मामला केंद्र की राजनीतिक गेम है।
सिद्धू ने कहा कि बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने जैसे फैसले लेने से पहले जरूरी होता है कि केंद्र पहले राज्य सरकारों से राय ले। इस मामले में केंद्र ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि केंद्र पंजाब में बैक डोर एंट्री करना चाहता है। उन्होंने कहा कि अगर बीएसएफ वाला फैसला लागू होता है तो पंजाब बर्बाद हो जाएगा। हमारे बच्चों को केंद्रीय एजेंसियां पकड़ लेंगी और वे लापता सूची में दिखाई देंगे, जैसा पूर्व में होता रहा है।
नोटिफिकेशन पर उठाए सवाल
सिद्धू ने कहा कि जब केंद्र ने बीएसएफ संबंधी फैसला लिया तो पंजाब सरकार ने इसका कड़ा विरोध किया। इसके बावजूद केंद्र ने अपने फैसले का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। सिद्धू ने सवाल उठाया कि जब विरोध हो रहा था तो नोटिफिकेशन जारी करने का क्या औचित्य है? उन्होंने कहा कि केंद्र को राज्यों के अधिकारों को छीनने नहीं देंगे और न ही हम केंद्र के आगे झुकेंगे।
बंगाल में बीएसएफ की ज्यादतियां गिनाईं
सिद्धू ने पश्चिम बंगाल में बीएसएफ की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां ऐसे कई मामले हैं कि बीएसएफ गोलीबारी की घटनाओं के बाद स्थानीय पुलिस को सूचित नहीं करती। बंगाल सरकार ने बीते पांच वर्षों में बीएसएफ पर यातना के कुल 240 मामले, केस रफा-दफा करने के 60 मामले और लोगों को लापता कर दिए जाने के 8 आठ मामले दर्ज किए हैं। इनमें से 33 मामलों में एनएचआरसी ने पीड़ितों या उनके परिजनों को मुआवजे की सिफारिश की थी। सिद्धू ने कहा कि अगर यूपी पुलिस बिना किसी वैध कारण के 60 घंटे से अधिक समय तक प्रियंका गांधी को अवैध हिरासत में रख सकती है तो बीएसएफ द्वारा हिरासत में लिए जाने पर एक आम व्यक्ति की गारंटी कौन लेगा?