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नवजोत सिद्धू का युवाओं को गुरुमंत्र, बताया- जिंदगी में सफल होना है तो क्या करें

Wed, 27 Sep 2017 10:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 27 Sep 2017 10:23 AM IST
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navjot singh sidhu at punjab university chandigarh
नवजोत सिद्धू
दिग्गज राजनेता व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने युवाओं को गुरुमंत्र दिए और जिंदगी में सफल होने का फंडा बताया तो ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पीयू के खचाखच भरे ऑडिटोरियम में मंगलवार को कदम रखते ही सभी ने खड़े होकर तालियां बजाई और सिद्धू का जोरदार स्वागत किया। सिद्धू ने भी अपने अंदाज में जवाब दिया. . .वो दरिया ही नहीं जिसमें नहीं है रवानी, जब जोश ही ना हो तो किस काम की है जवानी।
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दरअसल स्टूडेंट वेलफेयर सोसायटी की तरफ से पीयू में संवाद का आयोजन किया गया था। पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग के किस्से सुनाकर स्टूडेंट्स को उत्साहित किया। स्टूडेंट्स को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ाई में की गई पांच साल की मेहनत जिंदगी के आने वाले 50 साल तक सुख देती है।
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कपिल देव ने कुछ ऐसा किया
सिद्धू ने कपिल देव से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। कपिल देव ने एक मैच में नौ विकेट लिए। मीडिया उनका इंटरव्यू लेना चाहती थी। सिद्धू ने कपिल को यह कहते हुए रोका कि पंगा ना लो, अंग्रेजी आती नहीं है। लेकिन कपिल देव नहीं माने। इस दौरान किसी मीडियाकर्मी ने पूछा कि इंडिया दूसरा कपिल देव क्यों पैदा नहीं कर पा रही? अब कपिल देव को जितना समझ आया, उस लिहाज से उन्होंने टूटी- फूटी अंग्रेजी में जवाब दिया कि मेरी मां अब 62 साल की हो गई है। अब दूसरा कपिल पैदा करना संभव नहीं है।
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सिद्धू ने कहा कि इस किस्से को सुनाने का मकसद है कि कभी डरो मत, चुनौतियों का सामना करो। कपिल देव एक  ऐसे स्कूल से पढ़कर आए थे, जहां आठवीं में अंग्रेजी पढ़ना सिखाया जाता है। सिद्धू ने तब अपने अंदाज में एक शेर भी सुनाया. . . दुनिया में सबसे बड़ा रोग, मेरे बारे में क्या सोचेंगे लोग।

सचिन और फौजियों की प्रशंसा करता हूं

navjot singh sidhu at punjab university chandigarh
नवजोत सिद्धू
सिद्धू ने कहा कि वह हमेशा सचिन तेंदुलकर और फौजियों की प्रशंसा करते हैं। सिद्घू ने सचिन के भी कुछ किस्से सुनाए। सिद्धू - सचिन को टिंगलेया कहकर बुलाते थे। सचिन अपने करियर की शुरुआत में थे और मैच वेस्टइंडीज केसाथ चल रहा था। सिद्धू के मुताबिक वहां के बॉलरों की ंसमझ नहीं पड़ रही थी तो सचिन को जाकर कहा कि टप्पा पड़ने के बाद बॉल न जाने कहां से निकल रही, तो सचिन के सिर्फ इतना ही कहा खेलेगा।

जब बैटिंग साइड पर सचिन आए तो उन्होंने क्रीज से बाहर आकर छक्का मार दिया। सचिन को जाकर पूछा कि यह कैसे किया तो उसने जवाब दिया कि आपने ही तो कहा था टप्पा पड़ने के बाद बॉल का पता नहीं चल रहा, इसलिए बॉल को टप्पा पड़ने से पहले ही मार दिया। इसी तरह एक बार सचिन केनाक से खून बह रहा था, लेकिन फिर भी उसने वकार यूनूस को दो चौके मारे।।

अख्तर से सहवाग को छेड़ा तो मिला करारा जवाब
एक मैच में शोएब अख्तर की गेंद विरेंद्र सहवाग समझ नहीं पा रहे थे। लगातार तेज गेंद फेंकने के बाद सहवाग को छेड़ते और कहते हुकमारो ना। जब तीन बार ऐसा हुआ तो सहवाग ने शोएब को कह ही दिया, भाई साहब बॉल करो ना, भीख क्यों मांग रहे हो? ऐसे ही कई किस्से नवजोत सिंह ने स्टूडेंट्स को सुनाए और हर किस्से केपीछे तर्क दिया कि ऐसे ही कोई बड़ा नहीं बनता। सिद्धू ने साफ शब्दों में कहा कि सफलता को कोई शॉर्टकट नहीं होता। कड़ी मेहनत केबाद सफलता जरूर मिलती है।

पिता को धोखा देता था, रोते देखा तो अक्ल आई

navjot singh sidhu at punjab university chandigarh
Navjot singh sidhu
सिद्धू ने कहा कि अपने पिता को बचपन में धोखा देता था। सुबह पांच बजे उठकर प्रेक्टिस करने का नाटक करता और पानी से कपड़े गीले करकर पसीना बताता, लेकिन जब टीम से बाहर हुआ तो पिता को रोते देखा। उस दिन से जिंदगी बदल गई। टीम में वापसी न होने तक कोई रंगीन कपड़ा नहीं पहना। सिर्फ क्रिकेट केकपड़ों में ही रहा, दिन रात मेहनत की, लेकिन पिता दुनिया से विदा हो गए। दोस्तों की सलाह पर पिता का सपना पूरा करने केलिए और ज्यादा मेहनत की और टीम में वापसी की।

स्टूडेंट्स ने कुछ ऐसे किए सवाल
- एक छात्र से सिद्धू से पूछा कि जिंदगी में कई तरह केरोल अदा किए, सबसे पसंदीदा कौन सा है? इस पर सिद्धू ने जवाब दिया राजनीति सबसे महत्वपूर्ण रोल है। क्योंकि इसमें आप लोगों की जिंदगी बदलने का माद्दा रखते हो, अगर सच्चाई और ईमानदारी से काम किया जाए।
- पंजाबी विभाग केएक छात्र ने कहा कि पंजाबी खो चुकी है। छात्र फीस कम कराने की आवाज उठाते हैं, तो लाठियों से मारा जाता है, केस दर्ज किए जाते हैं। ऐसे छात्र पढ़ाई पूरी करने केबाद भी नौकरी कैसे करेंगे? सिद्धू ने जवाब दिया कि यह काफी चिंताजनक है। पंजाब 50 फीसदी से ज्यादा युवा आईलेट करके विदेश भाग रहा है। क्योंकि यहां यूथ के लिए कोई पॉलिसी नहीं है। उम्मीद रखें, हालात बदलेंगे।
- एक छात्रा ने सिद्धू को घेरते हुए कहा कि उम्मीद रखना जनता का काम है, आपको काम करना है। अगर आप भी उम्मीद रखेंगे तो काम कौन करेेगा? तो सिद्घू ने कहा कि जिसकेपास उम्मीद नहीं, उसकेपास कुछ भी नहीं।
- पंजाब में इन दिनों चल रहे गीतों पर भी आपत्ति जताते हुए कार्रवाई करने को कहा गया। एक छात्र ने कहा गानों में पंजाब केजट्ट को गोलियां चलाने, लड़कियां भगाने और बड़े ही अभद्र तरीकेसे दिखाया जा रहा है। इन पर सेंसर बोर्ड होना चाहिए। इस पर सिद्धू ने कहा सेंसर बोर्ड के बावजूद सबकुछ इंटरनेट पर आ जाता है। ऐसे में दूसरे की लकीर को मिटाने से अच्छा है, अपनी लकीर बड़ी करो। सच्चे पंजाबी इतने हो जाएं कि  पंजाब को बुरा कहने वाले खुद ही मिट जाएं।
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