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कैप्टन के मंत्रियों के बीच विवाद पर नवजोत सिद्धू की पैनी नजर, नए विकल्प की तलाश में हैं 'गुरु'

Sat, 16 May 2020 11:52 AM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमृतसर
अशोक नीर, अमृतसर Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 16 May 2020 11:52 AM IST
सार

  • सिद्धू कैप्टन विरोधी कांग्रेसियों के साथ नए राजनीतिक रास्ते की तलाश में
  • शराब बिक्री पर मंत्रियों के बीच जारी है आरोप-प्रत्यारोप का दौर
  • सिद्धू दे चुके हैं कैप्टन से दो-दो हाथ करने के संकेत

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Navjot Sidhu Reviewing Clash in Between Punjab Cabinet Ministers, Captain Amrinder Singh
Navjot Singh Sidhu

विस्तार

शराब की बिक्री में हुए राजस्व घाटे को लेकर मुख्य सचिव करण अवतार सिंह के साथ हुआ विवाद अब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मंत्रियों के बीच पहुंच चुका है। तकनीकी शिक्षा मंत्री चरण जीत सिंह चन्नी और ग्रामीण विकास मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को गहरे संकट में डाल दिया है।
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पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू के साथ पैदा हुए राजनीतिक मतभेदों के बाद यह दूसरी बार है, जब मंत्रियों ने कैप्टन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। बेशक इन मंत्रियों ने आबकारी नीति पर कैप्टन के स्थान पर मुख्य सचिव को ही कटघरे में खड़ा किया, लेकिन अपने मंत्रियों द्वारा लगाए गए आरोपों की इस तपिश से कैप्टन बच नहीं सकते।
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वहीं मंत्रियों के बीच छिड़े द्वंद्व पर राजनीतिक वनवास झेल रहे पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू की पैनी निगाह है। कैप्टन के मंत्रियों के बीच छिड़ी जंग के बीच सिद्धू इस उम्मीद में हैं कि कांग्रेस हाईकमान इस पर कोई फैसला करेगा। हाईकमान मंत्रियों के बीच छिड़ी जंग को रोकने में सफल हो गई, तो सिद्धू और कैप्टन के बीच भी दूरियां कम हो सकती हैं।

कांग्रेस हाई कमान पर दबाव बना सकते हैं सिद्धू

पंजाब विधानसभा चुनाव में अभी लगभग दो वर्ष हैं। जित्तेगा पंजाब और टिकटॉक के माध्यम से कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ दो-दो हाथ करने का संकेत दे चुके सिद्धू इस पर भी नजर गड़ाए हैं कि कुछ मंत्री इस मुद्दे पर कैप्टन से अलग होते हैं तो सिद्धू उनको अपने खेमे में लाकर कांग्रेस हाई कमान पर दबाव बना सकते हैं। इसमें सिद्धू की सबसे बड़ी मांग कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाकर किसी सीनियर कांग्रेसी विधायक को सीएम की कुर्सी सौंपने की होगी।

प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में सुलग रही चिंगारी कैप्टन की कुर्सी पर कितना प्रभाव डालेगी, यह समय तय करेगा। लेकिन 2002 में पहली बार मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की कार्यप्रणाली के खिलाफ तत्कालीन मंत्री बीबी राजिंदर कौर भट्ठल ने आवाज बुलंद की थी। तब भट्ठल को राजनीति के बाबा बोहड़ रघुनन्दन लाल भाटिया का समर्थन हासिल था।

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भाटिया समर्थक कई विधायक, जिसमें डॉ. राज कुमार भी शामिल थे, ने कैप्टन की कार्यप्रणाली का डट कर विरोध करके हाई कमान को उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने की बात की थी। अब डॉ. राजकुमार कैप्टन गुट में हैं। कैप्टन की कार्यप्रणाली के विरोधी विधायकों ने अभी चुप्पी धारण की हुई है। मंत्रियों का यह विवाद प्रदेश की राजनीति के समीकरण बदलेगा, सिद्धू गुट को इस बात का पूरा विश्वास है।
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