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Hindi News ›   Chandigarh ›   Navjot Sidhu, Punjab CM Captain Amrinder Singh Decision Against Pargat Singh

पंजाब के सीएम ने खेला बड़ा 'दांव', नवजोत सिद्ध़ के बाद परगट सिंह की मुश्किलें बढ़ेंगी, जानिए कैसे

Wed, 11 Sep 2019 10:02 AM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 11 Sep 2019 10:02 AM IST
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Navjot Sidhu, Punjab CM Captain Amrinder Singh Decision Against Pargat Singh
नवजोत सिद्ध़, परगट सिंह - फोटो : फाइल फोटो
नवजोत सिंह सिद्धू के पंजाब सियासत में साइड लाइन होने से उनका दाहिना हाथ माने जाने वाले पद्मश्री परगट सिंह भी पंजाब में अलग-थलग पड़ने शुरू हो गए हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने परगट सिंह के विरोधी जगबीर सिंह बराड़ को पंजाब वाटर रिसोर्स का चेयरमैन बनाकर नई सियासत को जन्म दे दिया है।
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परगट सिंह, जगबीर सिंह बराड़ की जालंधर कैंट से टिकट कटवाकर खुद कांग्रेस की टिकट लेकर पंजाब विधायक बने थे। अब कैप्टन अमरिंदर सिंह जगबीर सिंह बराड़ को आगे ला रहे हैं, जिससे परगट सिंह व उनके निकटवर्तियों के लिए परेशान होना स्वभाविक है।
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मनप्रीत बादल ने ही अपने रिश्तेदार जगबीर बराड़ को 2007 में अकाली दल की तरफ से कैंट हलके से टिकट दिलाई थी, जिसके बाद बराड़ कैंट से विधायक बने थे। लेकिन मनप्रीत बादल ने अकाली दल को अलविदा कहकर पीपीपी पार्टी का गठन किया तो जगबीर बराड़ ने भी उनका साथ दिया और पीपीपी ज्वाइन कर ली।
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2012 में विधानसभा चुनावों से ठीक कुछ समय पहले जगबीर बराड़ ने पीपीपी को छोड़कर कैप्टन अमरिंदर सिंह का हाथ थाम लिया। कैप्टन जगबीर बराड़ को कांग्रेस में ले आए और टिकट देकर मैदान में उतारा। वहीं अकाली दल ने 2012 में पद्मश्री परगट सिंह को डायरेक्टर स्पोर्ट्स पद से रिजाइन करवाकर उसको अकाली दल की तरफ से कैंट हलके से टिकट दिया। 2012 के विधानसभा चुनावों में परगट सिंह ने अकाली दल की तरफ से सीट जीत ली और जगबीर बराड़ को करीब सात हजार वोट से हरा दिया। दोनों के बीच छत्तीस का आंकड़ा चल रहा था।

2017 के विधानसभा चुनावों में कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने चहेते जगबीर सिंह बराड़ को कैंट विधानसभा हलके से टिकट देना चाहते थे लेकिन परगट सिंह ने अकाली दल को अलविदा कहकर नवजोत सिंह सिद्धू के साथ जाकर अपना खेमा बना लिया। नवजोत सिंह सिद्धू व परगट सिंह को राहुल गांधी ने कांग्रेस ज्वाइन करवाई। उसी दिन लगने लगा था कि अब कैंट में कांग्रेस की टिकट के लिए जंग परगट सिंह व जगबीर बराड़ के बीच होगी। इसमें परगट सिंह का पलड़ा भारी रहा और राहुल गांधी तक सीधी पहुंच होने के बाद परगट सिंह ने कैंट से टिकट हासिल कर ली और बराड़ को नकोदर में भेज दिया गया।

नया इलाका होने के कारण बराड़ चुनाव हार गए जबकि परगट सिंह कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत गए। सरकार बनते ही सिद्धू को पंजाब का निकायमंत्री बनाया गया तो उसका दाहिना हाथ माने जाते परगट सिंह पंजाब की सियासत में पॉवरफुल हो गए। निकाय विभाग में उनकी तूती बोलने लगी। परगट सिंह सिद्धू के साथ हर जगह कांग्रेस का प्रचार करने के लिए जाते रहे।

हाल ही में सिद्धू व कैप्टन के बीच चले युद्ध के बाद सिद्धू पंजाब की सियासत से आउट हो गए हैं। सिद्धू के बाहर होते ही पद्मश्री परगट सिंह भी अलग थलग पड़ गए। हालांकि उन्होंने सिद्धू मामले में कोई बयानबाजी नहीं की लेकिन उनके साइडलाइन होते ही कैप्टन ने अपने चहेते जगबीर बराड़ को दोबारा पॉवरफुल करना शुरू कर दिया है।

जगबीर बराड़ को पंजाब स्तरीय चेयरमैनी देकर बराड़ को तगड़ा दिया है। बराड़ ने चेयरमैन बनने के बाद कैंट हलके में शक्ति प्रदर्शन कर अपने इरादे अभी से जाहिर कर दिए हैं। पंजाब विधानसभा चुनावों में दो साल से अधिक समय पड़ा होने के बाद भी अभी से बिसात बिछनी शुरू हो गई है।

कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार फिर कांग्रेस की टिकट के लिए जंग जगबीर बराड़ व परगट सिंह के बीच होगी, बस फर्क सिर्फ इतना होगा कि इस बार सिद्धू उतने पॉवरफुल नहीं होंगे, जितने 2017 में विधानसभा चुनावों से पहले थे।
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