फिर गरजे सिद्धू: हाईकमान से मुलाकात से पहले सरकार के सामने रखी लंबित कामों की फेहरिस्त, बचाव भी किया
नवजोत सिद्धू गुरुवार को महासचिव संगठन केसी. वेणुगोपाल और प्रभारी हरीश रावत के साथ बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके बाद साफ हो जाएगा कि सिद्धू का पार्टी में कद और भविष्य क्या होगा। चूंकि सिद्धू ने ही इस्तीफे की पहल की है इसलिए इस बात की संभावना अधिक है कि इस्तीफा मंजूर किए जाने की उन्हें सूचना दी जाए।
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पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे के बाद गुरुवार को पार्टी हाईकमान से मिलने जा रहे नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब से जुड़े मसलों को लेकर अपने विचारों पर अडिग हैं। बुधवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पार्टी के 18 सूत्री कार्यक्रम का हवाला देते हुए जहां मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार के सामने लंबित कार्यों की फेहरिस्त रख दी, वहीं उन्होंने अकाली सरकार के कारण प्रदेश के कर्ज में डूबने की बात करते हुए चन्नी सरकार का बचाव भी किया।
सिद्धू ने कानून-व्यवस्था को राज्य का सबसे अहम मुद्दा बताते हुए बेअदबी और कोटकपूरा फायरिंग के गुनाहगारों को सजा नहीं मिल पाने पर एतराज जताया है। सिद्धू ने कानून-व्यवस्था के साथ ही माफिया पर उंगली उठाते हुए कहा कि राज्य के खाली खजाने को माफिया द्वारा गैरकानूनी तरीकों से उगाहे गए पैसे से भरा जाना चाहिए। माफिया को खत्म करते हुए सारा पैसा सरकारी खजाने में डाला जाए।
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सिद्धू ने कहा कि वह जो मुद्दे उठाते रहे हैं, उन पर आज भी कायम हैं और रहेंगे। उन्होंने कहा कि लोग उन्हें मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह इनसे अलग नहीं होने वाले। दूसरी ओर, सिद्धू ने ब्यूरोक्रेट्स का बचाव करते हुए यह भी कहा कि ब्यूरोक्रेट्स काम इसलिए नहीं करते क्योंकि पंजाब सरकार वित्तीय तंगी से जूझ रही है। कर्ज का पहाड़ बड़ा होता जा रहा है, जिसके चलते पंजाब के मसले सुलझ नहीं रहे। लोगों को 3 रुपये यूनिट बिजली देने का वादा किया गया है। तकनीकी रूप से इसे कैसे पूरा किया जाना है, इस पर विचार बहुत जरूरी है।
पिछली सरकारों पर लगाया आरोप
सिद्धू ने आरोप लगाया कि सूबे की पिछली सरकारों ने पूरे पंजाब को गिरवी रख दिया है। दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज आखिरकार लोगों को ही चुकाना पड़ रहा है। पेट्रोल-डीजल पर टैक्स का जिक्र करते हुए सिद्धू ने कहा कि पंजाब सरकार की मजबूरी है कि उसे टैक्स लेना पड़ता है क्योंकि सूबे पर कर्ज की राशि बहुत बड़ी है, जिसे आसानी से चुकाया नहीं जा सकता।
वहीं, टैक्स की चोरी भी सरकार को नुकसान पहुंचा रही है। सिद्धू ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार को राजस्व बढ़ाने के कई सुझाव दिए हैं, जिनमें शराब की राज्य सरकार द्वारा बिक्री का सुझाव भी है। उन्होंने कहा कि निजी हाथों में शराब की बिक्री का एकाधिकार सरकार को ही चूना लगा रहा है और अगर राज्य सरकार खुद यह काम संभाल लें तो उसकी कमाई में सीधे इजाफा होगा और इस मद में टैक्स की चोरी भी रुकेगी। केबल माफिया पर लगाम लगाने की जरूरत है, आखिर केबल डालने का काम सरकारी जमीन पर हो रहा है तो सरकार को टैक्स क्यों न मिले?
रेत मुफ्त नहीं, दाम तय होने चाहिए : सिद्धू
चन्नी सरकार द्वारा रेत मुफ्त किए जाने के फैसले पर एतराज जताते हुए सिद्धू ने सवाल उठाया है कि आखिर रेत किसके लिए मुफ्त होगी? निकालने वाले के लिए या इस्तेमाल करने वाले के लिए? उन्होंने कहा कि आम लोगों तक रेत पैसे से ही पहुंचेगी, जिससे सीधा लाभ रेत निकालने वाले को होगा और सरकार को कुछ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि रेत का दाम तय होना चाहिए, जैसे शराब और अन्य वस्तुओं के दाम तय होते हैं।