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प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग के डिप्लोमा का 31 जनवरी तक भर सकेंगे फार्म
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चंडीगढ़। गांधी स्मारक निधि सेक्टर-16 में प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग के तीन साल के डिप्लोमा में प्रवेश के लिए आखिरी तिथि 31 जनवरी है। फार्म व प्रॉस्पेक्ट्स सेक्टर-16 स्थित गांधी स्मारक भवन से प्राप्त किया जा सकता है।
गांधी स्मारक भवन के निदेशक डॉ. देव राज त्यागी ने बताया कि काफी समय से चिकित्सा के क्षेत्र में एलोपैथी का प्रयोग हो रहा है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट और बढ़ती हुई कीमतों के कारण लोगों का रुझान अब आयुर्वेदिक व प्राकृतिक चिकित्सा की ओर बढ़ रहा है। प्राकृतिक चिकित्सक बनने के इच्छुक युवाओं के लिए प्राकृतिक चिकित्सा में कॅरिअर की अच्छी संभावनाएं हैं।
डॉ. त्यागी ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा एक उभरती हुई आदर्श तथा निर्दोष चिकित्सा पद्धति हैं जिससे नियमित जीवन शैली के साथ संतुलित आहार, योग, प्राणायाम और पंच महाभूतों का उपयोग करते हुए शरीर को रोग रहित बनाया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा में किसी दवाई का प्रयोग नहीं होता है। प्राकृतिक चिकित्सा सिखाती है कि निरोग कैसे रहा जाए।
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डिप्लोमा इन नैचुरोपैथी एंड योग थैरेपी पाठ्यक्रम तीन वर्ष का है। इसमें छह माह का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है। प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के लिए मुख्य रूप से डिप्लोमा इन नैचुरोपैथी एंड योग थैरेपी का कोर्स उपलब्ध है। गांधी नेशनल एकेडमी ऑफ नैचुरोपैथी, राजघाट नई दिल्ली से यह कोर्स संचालित किया जाता है। डिप्लोमा इन नैचुरोपैथी एवं योग थैरेपी में प्रवेश के लिए बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। एमबीबीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएचएमएस डिग्री कोर्स वाले व्यक्तियों को सीधे दूसरे वर्ष में प्रवेश मिलता है। डिप्लोमा का शुल्क साढ़े छह हजार रुपये वार्षिक है।
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गांधी स्मारक भवन के निदेशक डॉ. देव राज त्यागी ने बताया कि काफी समय से चिकित्सा के क्षेत्र में एलोपैथी का प्रयोग हो रहा है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट और बढ़ती हुई कीमतों के कारण लोगों का रुझान अब आयुर्वेदिक व प्राकृतिक चिकित्सा की ओर बढ़ रहा है। प्राकृतिक चिकित्सक बनने के इच्छुक युवाओं के लिए प्राकृतिक चिकित्सा में कॅरिअर की अच्छी संभावनाएं हैं।
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डॉ. त्यागी ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा एक उभरती हुई आदर्श तथा निर्दोष चिकित्सा पद्धति हैं जिससे नियमित जीवन शैली के साथ संतुलित आहार, योग, प्राणायाम और पंच महाभूतों का उपयोग करते हुए शरीर को रोग रहित बनाया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा में किसी दवाई का प्रयोग नहीं होता है। प्राकृतिक चिकित्सा सिखाती है कि निरोग कैसे रहा जाए।
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डिप्लोमा इन नैचुरोपैथी एंड योग थैरेपी पाठ्यक्रम तीन वर्ष का है। इसमें छह माह का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है। प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के लिए मुख्य रूप से डिप्लोमा इन नैचुरोपैथी एंड योग थैरेपी का कोर्स उपलब्ध है। गांधी नेशनल एकेडमी ऑफ नैचुरोपैथी, राजघाट नई दिल्ली से यह कोर्स संचालित किया जाता है। डिप्लोमा इन नैचुरोपैथी एवं योग थैरेपी में प्रवेश के लिए बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। एमबीबीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएचएमएस डिग्री कोर्स वाले व्यक्तियों को सीधे दूसरे वर्ष में प्रवेश मिलता है। डिप्लोमा का शुल्क साढ़े छह हजार रुपये वार्षिक है।