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नशे का नासूर: पंजाब में डेढ़ साल में 310 लोगों की गई जान, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने दिखाई खौफनाक तस्वीर
Tue, 12 Sep 2023 01:55 PM IST
निवेदिता वर्मा
पंकज शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
पंकज शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 12 Sep 2023 01:55 PM IST
सार
राज्य में औसतन हर दूसरे दिन नशे से एक मौत हो रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में बीते 20 महीनों में नशे की वजह से 310 लोगों की मौत हो चुकी है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में 2017 से 2021 तक यानी चार साल में नशे की वजह से 272 लोगों की मौत हुई थी।
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पंजाब में बढ़ रहा नशा
- फोटो : फाइल
विस्तार
पंजाब के लिए नशा सबसे बड़ा नासूर बनता जा रहा है। राज्य के युवा नशे में इस कदर फंसते चले जा रहे हैं कि यह अब उनकी जान पर भारी पड़ने लगा है। राज्य के तीन जिले मोगा, फिरोजपुर और बठिंडा में स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है, जबकि अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर व जालंधर में भी हालात ठीक नहीं हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर जारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में पिछले 20 महीने में नशे की वजह से 310 लोगों की जान गई है। इनमें युवाओं की संख्या ज्यादा है। आम आदमी पार्टी के सत्ता संभालने के बाद भी इन आंकड़ों में कोई कमी नहीं आई है। आप सरकार के कार्यकाल में भी 200 लोगों की मौत नशे के कारण हुई है। हाल के दिनों में ही अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन और जालंधर में नशे ने 12 युवाओं की जान ले ली।
यह भी पढ़ें: Zirakpur News: दोस्त के घर आया बिजनेसमैन, चाय-पानी पिया फिर गन निकाली और खुद को मार ली गोली
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डरा रही है सच्चाई
सरकार और पुलिस नशे की रोकथाम को लेकर तरह-तरह के दावे करते हैं, लेकिन सच्चाई काफी डरावनी है। स्थिति यह हो गई है कि राज्य में औसतन हर दूसरे दिन नशे से एक मौत हो रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में बीते 20 महीनों में नशे की वजह से 310 लोगों की मौत हो चुकी है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में 2017 से 2021 तक यानी चार साल में नशे की वजह से 272 लोगों की मौत हुई थी। नशे से मौत की कई घटनाएं ऐसी भी हैं, जिनकी जानकारी अस्पताल तक नहीं पहुंच पाई। विशेषज्ञों का मानना है कि बीते 20 महीनों में नशे से मौत का वास्तविक आंकड़ा कहीं ज्यादा है।
प्रदेश में 25 लाख से ज्यादा लोग नशे की चपेट में
पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रदेश में 25 लाख से ज्यादा लोग नशा की चपेट में है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के चार जिले मोगा और फिरोजपुर, लुधियाना और बठिंडा में स्थिति ज्यादा चिंताजनक हो गई है। 2022 और 2023 में इन चार जिलों में नशे की वजह से 235 लोगों की जान जा चुकी है। 2022 में मोगा और फिरोजपुर और बठिंडा में क्रमश: 37, 35, 22 लोगों की जान गई है, जबकि 2023 में क्रमश: 10, 21, 10 लोगों की मौत हुई। अमृतसर और तरनतारन जिलों में पिछले एक वर्ष में 42 के करीब लोगों की मौत नशे के कारण हो चुकी है। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में पिछले सात सातों में नशे की वजह से कुल 544 लोगों की मौत हुई है। फिलहाल पंजाब के मालवा क्षेत्र हालात अधिक चिंता वाले हैं। पिछले 20 महीने में जितनी मौतें हुई हैं, उसमें से 222 मालवा में हैं।
मरने वालों में 18 से 30 साल के युवा अधिक
रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में नशे की लत की वजह से जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें अधिकतर 18 से 30 साल के युवा शामिल हैं। 2017 से 2021 के दौरान राज्य में नशे की वजह से हुईं 320 मौतों में 136 ऐसे लोग थे, जिनकी उम्र 18 से 30 साल के बीच थी। 62 ऐसे लोग थे, जिनकी उम्र 30-40 साल, आठ लोगों की 45-60 साल, 2 लोगों की उम्र 60 साल से अधिक रही, जबकि तीन ऐसी भी मौतें दर्ज जिनकी उम्र 14 से 18 साल के बीच थी।
पुलिस राज्य स्तर पर नशा तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए अभियान चला रही है। 14,998 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनको गिरफ्तार किया है। 11382,25 किलोग्राम नशीला पदार्थ भी इन लोगों से पकड़ा है। नशा तस्करों को पकड़ने के लिए पुलिस की ओर से राज्य स्तर पर सामूहिक रूप में भी एक साथ अभियान समय-समय पर चलाया जाता है। -डॉ. सुखचैन सिंह गिल, आईजी हेड क्वार्टर, पंजाब पुलिस
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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर जारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में पिछले 20 महीने में नशे की वजह से 310 लोगों की जान गई है। इनमें युवाओं की संख्या ज्यादा है। आम आदमी पार्टी के सत्ता संभालने के बाद भी इन आंकड़ों में कोई कमी नहीं आई है। आप सरकार के कार्यकाल में भी 200 लोगों की मौत नशे के कारण हुई है। हाल के दिनों में ही अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन और जालंधर में नशे ने 12 युवाओं की जान ले ली।
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डरा रही है सच्चाई
सरकार और पुलिस नशे की रोकथाम को लेकर तरह-तरह के दावे करते हैं, लेकिन सच्चाई काफी डरावनी है। स्थिति यह हो गई है कि राज्य में औसतन हर दूसरे दिन नशे से एक मौत हो रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में बीते 20 महीनों में नशे की वजह से 310 लोगों की मौत हो चुकी है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में 2017 से 2021 तक यानी चार साल में नशे की वजह से 272 लोगों की मौत हुई थी। नशे से मौत की कई घटनाएं ऐसी भी हैं, जिनकी जानकारी अस्पताल तक नहीं पहुंच पाई। विशेषज्ञों का मानना है कि बीते 20 महीनों में नशे से मौत का वास्तविक आंकड़ा कहीं ज्यादा है।
प्रदेश में 25 लाख से ज्यादा लोग नशे की चपेट में
पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रदेश में 25 लाख से ज्यादा लोग नशा की चपेट में है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के चार जिले मोगा और फिरोजपुर, लुधियाना और बठिंडा में स्थिति ज्यादा चिंताजनक हो गई है। 2022 और 2023 में इन चार जिलों में नशे की वजह से 235 लोगों की जान जा चुकी है। 2022 में मोगा और फिरोजपुर और बठिंडा में क्रमश: 37, 35, 22 लोगों की जान गई है, जबकि 2023 में क्रमश: 10, 21, 10 लोगों की मौत हुई। अमृतसर और तरनतारन जिलों में पिछले एक वर्ष में 42 के करीब लोगों की मौत नशे के कारण हो चुकी है। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में पिछले सात सातों में नशे की वजह से कुल 544 लोगों की मौत हुई है। फिलहाल पंजाब के मालवा क्षेत्र हालात अधिक चिंता वाले हैं। पिछले 20 महीने में जितनी मौतें हुई हैं, उसमें से 222 मालवा में हैं।
मरने वालों में 18 से 30 साल के युवा अधिक
रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में नशे की लत की वजह से जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें अधिकतर 18 से 30 साल के युवा शामिल हैं। 2017 से 2021 के दौरान राज्य में नशे की वजह से हुईं 320 मौतों में 136 ऐसे लोग थे, जिनकी उम्र 18 से 30 साल के बीच थी। 62 ऐसे लोग थे, जिनकी उम्र 30-40 साल, आठ लोगों की 45-60 साल, 2 लोगों की उम्र 60 साल से अधिक रही, जबकि तीन ऐसी भी मौतें दर्ज जिनकी उम्र 14 से 18 साल के बीच थी।
पुलिस राज्य स्तर पर नशा तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए अभियान चला रही है। 14,998 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनको गिरफ्तार किया है। 11382,25 किलोग्राम नशीला पदार्थ भी इन लोगों से पकड़ा है। नशा तस्करों को पकड़ने के लिए पुलिस की ओर से राज्य स्तर पर सामूहिक रूप में भी एक साथ अभियान समय-समय पर चलाया जाता है। -डॉ. सुखचैन सिंह गिल, आईजी हेड क्वार्टर, पंजाब पुलिस