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राष्ट्र निर्माता अपने हक के लिए सड़कों व अदालतों में लड़ाई को मजबूर, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण: हाईकोर्ट
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-अस्थाई शिक्षकों की लगातार बढ़ती याचिकाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट की टिप्पणी
-अस्थाई नियुक्तियों से सरकार को करना चाहिए परहेज, इनके कारण होती है बैकडोर एंट्री
-एनआईटी कुरुक्षेत्र की अस्थाई शिक्षिका की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट की टिप्पणी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षक, जो राष्ट्र निर्माता है, अपने अधिकारों के लिए या तो सड़कों पर या अदालतों में लड़ रहे हैं। यह सब अस्थाई नियुक्तियों के कारण हो रहा है, सरकार को चाहिए कि नियमित नियुक्ति हों ताकि बैकडोर एंट्री से भी बचा जा सके। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अस्थाई शिक्षिका की सेवा समाप्त करने के एनआईटी कुरुक्षेत्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणियां की हैं। रूबी चौहान ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि वह एनआईटी कुरुक्षेत्र में अस्थायी आधार पर नियुक्त शिक्षक थी। याची ने उसे सेवा मुक्त करने के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि अस्थाई नियुक्ति अधिकतम 5 वर्ष की अवधि के लिए हो सकती है। याचिकाकर्ता अप्रत्यक्ष रूप से यह दावा कर रही है कि अनुबंध आधार पर नियुक्त होने के बावजूद उसे कार्यमुक्त नहीं किया जाना चाहिए और उसे जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि यह संस्थान है जिसे अपनी आवश्यकता तय करनी है, याचिकाकर्ता को सेवा की निरंतरता का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस जगमोहन बंसल ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षण कर्मचारियों की संविदा, तदर्थ या अस्थायी नियुक्ति से जुड़े मामलों की संख्या अदालतों में लगातार बढ़ती जा रही है। शिक्षा हर देश की नींव होती है और शिक्षक राष्ट्र निर्माण करने वाले। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षक अपनी नियुक्ति या सेवा शर्तों के लिए सड़कों या अदालतों में लड़ रहे हैं। सरकारों को नियमित आधार पर नियुक्ति करनी चाहिए। अनुबंध, अस्थायी और तदर्थ आधार पर नियुक्ति से बचना चाहिए क्योंकि ये नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना की जाती हैं और बैकडोर एंट्री का जरिया बनती हैं।
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-अस्थाई नियुक्तियों से सरकार को करना चाहिए परहेज, इनके कारण होती है बैकडोर एंट्री
-एनआईटी कुरुक्षेत्र की अस्थाई शिक्षिका की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट की टिप्पणी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षक, जो राष्ट्र निर्माता है, अपने अधिकारों के लिए या तो सड़कों पर या अदालतों में लड़ रहे हैं। यह सब अस्थाई नियुक्तियों के कारण हो रहा है, सरकार को चाहिए कि नियमित नियुक्ति हों ताकि बैकडोर एंट्री से भी बचा जा सके। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अस्थाई शिक्षिका की सेवा समाप्त करने के एनआईटी कुरुक्षेत्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणियां की हैं। रूबी चौहान ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि वह एनआईटी कुरुक्षेत्र में अस्थायी आधार पर नियुक्त शिक्षक थी। याची ने उसे सेवा मुक्त करने के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि अस्थाई नियुक्ति अधिकतम 5 वर्ष की अवधि के लिए हो सकती है। याचिकाकर्ता अप्रत्यक्ष रूप से यह दावा कर रही है कि अनुबंध आधार पर नियुक्त होने के बावजूद उसे कार्यमुक्त नहीं किया जाना चाहिए और उसे जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि यह संस्थान है जिसे अपनी आवश्यकता तय करनी है, याचिकाकर्ता को सेवा की निरंतरता का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस जगमोहन बंसल ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षण कर्मचारियों की संविदा, तदर्थ या अस्थायी नियुक्ति से जुड़े मामलों की संख्या अदालतों में लगातार बढ़ती जा रही है। शिक्षा हर देश की नींव होती है और शिक्षक राष्ट्र निर्माण करने वाले। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षक अपनी नियुक्ति या सेवा शर्तों के लिए सड़कों या अदालतों में लड़ रहे हैं। सरकारों को नियमित आधार पर नियुक्ति करनी चाहिए। अनुबंध, अस्थायी और तदर्थ आधार पर नियुक्ति से बचना चाहिए क्योंकि ये नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना की जाती हैं और बैकडोर एंट्री का जरिया बनती हैं।