{"_id":"64b96591c2c4e191489189d475df02fb","slug":"natak-manchan-in-punjab-kala-bhawan-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘कंप्रोमाइज’ में कुछ यूं झलकी एक मर्द की मजबूरी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘कंप्रोमाइज’ में कुछ यूं झलकी एक मर्द की मजबूरी
शंकर सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 13 Mar 2014 02:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एब्सर्ड थिएटर की एक खासियत होती है कि इसमें आप असल जिंदगी और इमेजिनेशन का इस्तेमाल करके दोनों ही तरह से अभिनय कर सकते हैं। इसी तरह का थिएटर पंजाब कला भवन-16 में देखने को मिला।
सिटी एंटरटेनमेंट द्वारा आयोजित दो दिवसीय थिएटर फेस्टिवल का आगाज मराठी कहानी पर आधारित नाटक ‘कंप्रोमाइज’ से हुआ। इस दौरान शहर के कलाकार कमल अरोड़ा, प्रवेश सेट्ठी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। नाटक का निर्देशन आशीष शर्मा ने किया।
नाटक की शुरुआत पुराने तरीके से पर्दा खुलते हुए हुई, जिसमें नायक यह अपनी जिंदगी पर एक डायरी लिख रहा होता है। लिखते लिखते वह एकाएक चौंक जाता है जब एक इंसान को अपने कमरे में देखता है। बातों बातों में पता चलता है की वह उसकी अंतर-आत्मा है।
विज्ञापन
इस बीच नायक अपनी जिंदगी में बीते हुए पलों की बात करता है, जिसमें वह कई जगह कंप्रोमाइज करता है। पहले पल में वह अपनी निजी जिंदगी के बारे में सोचता है, जिसमें वह नपुंसक होने की वजह से अपनी पत्नी द्वारा दूसरे मर्द के बच्चे को अपना लेता है।
अगले दृश्य में अपने बॉस द्वारा प्रमोशन के लिए उसकी गुलामी करने को मजबूर होता है, इसलिए कंप्रोमाइज करने को तैयार हो जाता है। इसी बीच उसकी अंतर-आत्मा उसे अपनी डायरी फाड़ने को बोलती है, जिसके लिए वह पहले अपनी आत्मा को मारने की बात करता है और उसका गला घोंट देता है, लेकिन वह मरती नहीं और अगले दृश्य में फिर जिंदा हो जाती है।
इस नाटक में मुख्य किरदार बलोचन मलिक(यह), आशीष शर्मा(अंतर-आत्मा) के रूप में नजर आए। इनके साथ ही पूजा और विक्की बावा ने अपने किरदार को बाखूबी निभाया।
दर्शकों ने सराहा नए कलाकारों का काम
नाटक बहुत अच्छा था, लेकिन एक शिकायत है कि बहुत जल्द खत्म हो गया। नाटक में उम्दा अदाकारी की गई है, लेकिन सेट पर बिछाए पत्तों का माजरा समझ में नहीं आया। नाटक में इस्तेमाल किए गए संगीत की जरूरत नहीं लगी, अगर वह न भी होता तो भी भाव बहुत अच्छे से सामने आते।
- एसएस चीमा, असिस्टेंट इंजीनियर, पंजाब मंडी बोर्ड
नाटक देखने आया और खत्म हो गया, लेकिन लगता है कि कहानी आगे बढ़ सकती थी। निर्देशन बहुत अच्छा लगा खासकर जब नायक (बलोचन मलिक) और अंतर-आत्मा (आशीष शर्मा) आपस में बात करते हैं। नाटक में कोई मैसेज भी नहीं था अंत में यह जानकर भी बुरा लगा।
- हिम्मत सिंह, रिटायर्ड कर्मचारी
नाटक को चार प्रकार से बांटा जाए तो पहले तो निर्देशन की बात करूंगा जो बहुत उम्दा था। कहीं भी कुछ बुरा नहीं लगा। सेट की बात करूं तो वह भी बहुत अच्छा लगा। कहानी कुछ अधूरी जरूर लगी इस पर और काम किया जा सकता था और अदाकारी सभी कलाकारों की बहुत उम्दा थी।
- विनीत शर्मा, दर्शक
नाटक बहुत अच्छा था। सभी लोगों ने उम्दा अभिनय किया है। यह कहानी पहली बार थिएटर में देखी और बहुत अच्छा लगा।
- पुष्पा गुप्ता, दर्शक
विज्ञापन
सिटी एंटरटेनमेंट द्वारा आयोजित दो दिवसीय थिएटर फेस्टिवल का आगाज मराठी कहानी पर आधारित नाटक ‘कंप्रोमाइज’ से हुआ। इस दौरान शहर के कलाकार कमल अरोड़ा, प्रवेश सेट्ठी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। नाटक का निर्देशन आशीष शर्मा ने किया।
विज्ञापन
नाटक की शुरुआत पुराने तरीके से पर्दा खुलते हुए हुई, जिसमें नायक यह अपनी जिंदगी पर एक डायरी लिख रहा होता है। लिखते लिखते वह एकाएक चौंक जाता है जब एक इंसान को अपने कमरे में देखता है। बातों बातों में पता चलता है की वह उसकी अंतर-आत्मा है।
विज्ञापन
इस बीच नायक अपनी जिंदगी में बीते हुए पलों की बात करता है, जिसमें वह कई जगह कंप्रोमाइज करता है। पहले पल में वह अपनी निजी जिंदगी के बारे में सोचता है, जिसमें वह नपुंसक होने की वजह से अपनी पत्नी द्वारा दूसरे मर्द के बच्चे को अपना लेता है।
अगले दृश्य में अपने बॉस द्वारा प्रमोशन के लिए उसकी गुलामी करने को मजबूर होता है, इसलिए कंप्रोमाइज करने को तैयार हो जाता है। इसी बीच उसकी अंतर-आत्मा उसे अपनी डायरी फाड़ने को बोलती है, जिसके लिए वह पहले अपनी आत्मा को मारने की बात करता है और उसका गला घोंट देता है, लेकिन वह मरती नहीं और अगले दृश्य में फिर जिंदा हो जाती है।
इस नाटक में मुख्य किरदार बलोचन मलिक(यह), आशीष शर्मा(अंतर-आत्मा) के रूप में नजर आए। इनके साथ ही पूजा और विक्की बावा ने अपने किरदार को बाखूबी निभाया।
दर्शकों ने सराहा नए कलाकारों का काम
नाटक बहुत अच्छा था, लेकिन एक शिकायत है कि बहुत जल्द खत्म हो गया। नाटक में उम्दा अदाकारी की गई है, लेकिन सेट पर बिछाए पत्तों का माजरा समझ में नहीं आया। नाटक में इस्तेमाल किए गए संगीत की जरूरत नहीं लगी, अगर वह न भी होता तो भी भाव बहुत अच्छे से सामने आते।
- एसएस चीमा, असिस्टेंट इंजीनियर, पंजाब मंडी बोर्ड
नाटक देखने आया और खत्म हो गया, लेकिन लगता है कि कहानी आगे बढ़ सकती थी। निर्देशन बहुत अच्छा लगा खासकर जब नायक (बलोचन मलिक) और अंतर-आत्मा (आशीष शर्मा) आपस में बात करते हैं। नाटक में कोई मैसेज भी नहीं था अंत में यह जानकर भी बुरा लगा।
- हिम्मत सिंह, रिटायर्ड कर्मचारी
नाटक को चार प्रकार से बांटा जाए तो पहले तो निर्देशन की बात करूंगा जो बहुत उम्दा था। कहीं भी कुछ बुरा नहीं लगा। सेट की बात करूं तो वह भी बहुत अच्छा लगा। कहानी कुछ अधूरी जरूर लगी इस पर और काम किया जा सकता था और अदाकारी सभी कलाकारों की बहुत उम्दा थी।
- विनीत शर्मा, दर्शक
नाटक बहुत अच्छा था। सभी लोगों ने उम्दा अभिनय किया है। यह कहानी पहली बार थिएटर में देखी और बहुत अच्छा लगा।
- पुष्पा गुप्ता, दर्शक