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जात-पात के बंधन से परे होती है सच्ची 'प्रेम कथा'

Wed, 19 Mar 2014 01:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 19 Mar 2014 01:43 AM IST
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Natak Manchan at Punjab Kala Bhawan
अगर आप किसी से प्यार करते हैं तो उसका धर्म नहीं बल्कि उसकी पसंद और नापसंद पूछते हैं। प्यार के इस सशक्त भाव को पंजाब कला भवन में मंचित किया शहर के थिएटर ग्रुप फूल्स पैराडाइज ने। मोहनीश कल्याण के निर्देशन में रविवार शाम ‘प्रेम कथा’ नाटक खेला गया। यह नाटक शरद जोशी द्वारा लिखा गया है।
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नाटक की शुरुआत सूत्रधार करता है, जो पहले तो प्यार के बारे में बड़ी सी स्पीच देता है और फिर शुरू होता है प्यार का सफर। श्याम और सुषमा एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं।
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श्याम सुषमा को इंप्रेस करने के लिए कई तरीके अपनाता है। धीरे-धीरे सुषमा भी श्याम को चाहने लगती है लेकिन इस बीच विलेन बनकर दोनों के मां-बाप बीच में खड़े हो जाते हैं।
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नाटक में दोनों पक्षों की बात सामने रखते हुए छह अंत बताए हैं। सूत्रधार आखिरी अंत यानी कि दोनों की शादी और फिर नाती होने पर दादा के समक्ष जाने को बेहतर और इंसानी अंत मानता है। 


नाटक में अरुण चावला (सूत्रधार), अशोक कुमार (श्याम), किरन चावला ( सुषमा), हनी (दोस्त), सुप्रीत सिद्धू (लड़की की मां), उपकार बराड़ (लड़के के पिता), पंकज (दोस्त) दिनेश ( दोस्त), हरप्रीत सिंह ( कैंटीन वाला) ने भूमिका निभाई। म्यूजिक में समीर और लाइट्स पर अमित ने साथ दिया। नाटक की अवधि 1 घंटा 15 मिनट रही।
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