{"_id":"48f3812348c86f5a39f2bbd8bd64332d","slug":"natak-drama-play-at-punjab-kala-bhawan-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"कला भवन में दिखा ‘पगला’ तो सब दर्शक मुग्ध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कला भवन में दिखा ‘पगला’ तो सब दर्शक मुग्ध
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 13 Jun 2014 01:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब कला भवन के ओपन थिएटर में वीरवार शाम आर्ट चंडीगढ़ और सीटी एंटरटेनमेंट ने नाटक पगला का मंचन किया। गुरशरण सिंह द्वारा लिखित इस नाटक को आशीष शर्मा ने निर्देशित किया। पगला नाटक के दौरान सभी दर्शकों के साथ अपनी जिंदगी के अनुभव बांटना शुरू करता है।
विज्ञापन
पगला अपने बचपन से शुरू करता है जब वह स्कूल में पढ़ने के दौरान शाम को मूंगफली बेच कर अपना गुजारा करता है। स्कूल में गरीब होने के कारण उसके कपड़े भी अच्छे नहीं होते, जिसका उसके साथी अकसर मजाक उड़ाते हैं, समय गुजरता है और पगला बड़ा होता है लेकिन उसकी गरीबी की हालत यूं ही बनी रहती है, वह किराए के एक छोटे से मकान में रहता है।
विज्ञापन
पगला जितने भी पैसे कमाता है सारे अपनी बीमार गर्भवती पत्नी के इलाज में खर्च देता है। जिस वजह से वह समय पर किराया नहीं दे पाता। मकान मालिक इस पर उसे और उसकी पत्नी को गालियां देकर घर से बाहर निकाल देता है। यह अपमान पगला भूल नहीं पाता और राह चलने वाले हर आदमी से अपनी गरीबी का कारण पूछने लगता है।
विज्ञापन
लोग उसकी बातें अनसुनी कर उसे पागल समझ कोई जवाब नहीं देते। पगला अंत में पागल हो जाता है और उसे उसकी गरीबी के कारण का कभी जवाब नहीं मिल पाता। अंत में पगला दर्शकों पर इस प्रश्न को छोड़ा देता है। नाटक में पगला की भूमिका में गोल्डी लांबा थे।