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खुलासाः नगर निगम अफसरों की लापरवाही से स्वच्छता सर्वेक्षण में 20वें पायदान पर पहुंचा चंडीगढ़
Mon, 08 Apr 2019 02:10 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 08 Apr 2019 02:10 PM IST
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- फोटो : self
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स्वच्छ सर्वेक्षण में चंडीगढ़ को 20वें स्थान पर ले जाने में नगर निगम के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। समीक्षा बैठक में इसका खुलासा किया गया। जानकारी के अनुसार, गलत आंकड़े की एंट्री के कारण चंडीगढ़ स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में इतना पीछे चला गया। यदि अधिकारी सही तरीके से आंकड़ों का एंट्री करते तो शायद ऐसी स्थिति नहीं आती। स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर के तीसरे स्थान से खिसककर 20वें स्थान पर पहुंचने की जब जांच (समीक्षा बैठक) की गई तो यह खुलासा हुआ।
अब जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है। बता दें कि चंडीगढ़ को पांच हजार अंक में से 3787 अंक मिले थे। यदि 150 अंक और मिल जाते तो चंडीगढ़ का कुल अंक 3937 होता और परिणाम बेहतर होता। चंडीगढ़ को प्रमाणन में मात्र 500 अंक मिले, इसी कारण यह स्थिति आई।
नगर निगम के सूत्र बताते हैं कि यदि प्रमाणन में ओडीएफ के अंक लेने के लिए टॉयलेट की संख्या का सही विवरण देने में ही कमी रह गई। यदि सही विवरण नगर निगम अधिकारियों ने दिया होता तो उक्त 150 अंक चंडीगढ़ को मिल जाते, जिसके बाद शहर की रैंकिंग काफी सुधर जाती। जांच में यह बात सामने आई है कि चंडीगढ़ को कम से कम 11वां स्थान तो जरूर मिल गया होता क्योंकि स्वच्छ सर्वेक्षण में भिलाई नगर का 11वां स्थान था, उसे कुल अंक 3929 मिले थे।
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अब जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है। बता दें कि चंडीगढ़ को पांच हजार अंक में से 3787 अंक मिले थे। यदि 150 अंक और मिल जाते तो चंडीगढ़ का कुल अंक 3937 होता और परिणाम बेहतर होता। चंडीगढ़ को प्रमाणन में मात्र 500 अंक मिले, इसी कारण यह स्थिति आई।
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नगर निगम के सूत्र बताते हैं कि यदि प्रमाणन में ओडीएफ के अंक लेने के लिए टॉयलेट की संख्या का सही विवरण देने में ही कमी रह गई। यदि सही विवरण नगर निगम अधिकारियों ने दिया होता तो उक्त 150 अंक चंडीगढ़ को मिल जाते, जिसके बाद शहर की रैंकिंग काफी सुधर जाती। जांच में यह बात सामने आई है कि चंडीगढ़ को कम से कम 11वां स्थान तो जरूर मिल गया होता क्योंकि स्वच्छ सर्वेक्षण में भिलाई नगर का 11वां स्थान था, उसे कुल अंक 3929 मिले थे।
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जानकारी के अनुसार, ओडीएफ के अंक जोड़ने के लिए टायलेट ब्लॉक की हालत का निरीक्षण होना था। कुल टायलेट की संख्या का 25 प्रतिशत बेहतर अवस्था में होना चाहिए था। लेकिन सभी टायलेट ब्लाक की एंटी हो गई। जब सेंट्रल की टीम आई और जांच किया तो जब बेहतर 25 प्रतिशत की सूची मांगी गई तो उन्हें कुल टायलेट की सूची प्रदान की गई। उसी के आधार पर जब निरीक्षण हुआ तो उसके अंक शामिल नहीं किए गए।
सिटी ब्यूटीफुल स्वच्छता सर्वेक्षण में काफी पिछड़ गया है। पिछले वर्ष शहर को पूरे देश में तीसरा स्थान मिला था। लेकिन एक वर्ष में ही 17 स्थान फिसलकर 20वें स्थान पर पहुंच गया। शहर की रैंकिंग चार वर्ष पूर्व 2015 में सबसे कम थी। तब चंडीगढ़ 21वें स्थान पर रहा था। चंडीगढ़ में घरों से गीले और सूखे कूड़े को अलग करने की योजना सिरे नहीं चढ़ सकी और उसके विरोध में गारबेज इकट्ठा करने वाले हड़ताल पर चले गए थे।
इस साल रैंकिंग में पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह यही मानी जा रही है। आर्थिक रूप से स्थिति की ठीक नहीं होना भी कारण माना जा रहा है लेकिन अब निकल के आया है कि एंट्री में भी कमी रह गई थी।
सिटी ब्यूटीफुल स्वच्छता सर्वेक्षण में काफी पिछड़ गया है। पिछले वर्ष शहर को पूरे देश में तीसरा स्थान मिला था। लेकिन एक वर्ष में ही 17 स्थान फिसलकर 20वें स्थान पर पहुंच गया। शहर की रैंकिंग चार वर्ष पूर्व 2015 में सबसे कम थी। तब चंडीगढ़ 21वें स्थान पर रहा था। चंडीगढ़ में घरों से गीले और सूखे कूड़े को अलग करने की योजना सिरे नहीं चढ़ सकी और उसके विरोध में गारबेज इकट्ठा करने वाले हड़ताल पर चले गए थे।
इस साल रैंकिंग में पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह यही मानी जा रही है। आर्थिक रूप से स्थिति की ठीक नहीं होना भी कारण माना जा रहा है लेकिन अब निकल के आया है कि एंट्री में भी कमी रह गई थी।
विभिन्न श्रेणियों में चंडीगढ़ की स्थिति
प्रथम भाग: सेवा स्तर प्रगति 1250 अंकों में से चंडीगढ़ को मिले 1129 (इस श्रेणी में इंदौर प्रथम)
द्वितीय भाग: प्रमाणन 1250 अंकों में से चंडीगढ़ को मिले 500 (इस श्रेणी में इंदौर प्रथम)
तृतीय भाग: प्रत्यक्ष अवलोकन 1250 अंकों में से चंडीगढ़ को मिले 1120 (इस श्रेणी में जमशेदपुर प्रथम )
चतुर्थ भाग: नागरिक प्रतिक्रिया और स्वच्छता ऐप 1250 अंकों में से चंडीगढ़ को मिले 1038 (इंदौर प्रथम)
कुल अंक 5000 में से चंडीगढ़ को 3787 नंबर मिले जबकि प्रथम नंबर पर रहे इंदौर को 4659 अंक मिले
अधिकारियों की कमी के कारण यह स्थिति आई है। इसकी जांच के लिए कहा गया है। साथ में यह भी कहा है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही न हो इसका भी ख्याल होना चाहिए।
- राजेश कालिया, मेयर नगर निगम चंडीगढ़
द्वितीय भाग: प्रमाणन 1250 अंकों में से चंडीगढ़ को मिले 500 (इस श्रेणी में इंदौर प्रथम)
तृतीय भाग: प्रत्यक्ष अवलोकन 1250 अंकों में से चंडीगढ़ को मिले 1120 (इस श्रेणी में जमशेदपुर प्रथम )
चतुर्थ भाग: नागरिक प्रतिक्रिया और स्वच्छता ऐप 1250 अंकों में से चंडीगढ़ को मिले 1038 (इंदौर प्रथम)
कुल अंक 5000 में से चंडीगढ़ को 3787 नंबर मिले जबकि प्रथम नंबर पर रहे इंदौर को 4659 अंक मिले
अधिकारियों की कमी के कारण यह स्थिति आई है। इसकी जांच के लिए कहा गया है। साथ में यह भी कहा है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही न हो इसका भी ख्याल होना चाहिए।
- राजेश कालिया, मेयर नगर निगम चंडीगढ़