{"_id":"5b9ca45a867a557ff306d13c","slug":"nagar-nigam-chandigarh-garbage-processing-system","type":"story","status":"publish","title_hn":"बड़ा फैसलाः नगर निगम चंडीगढ़ घर-घर से उठाएगा कचरा, कर्मचारी भी नहीं हटाए जाएंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बड़ा फैसलाः नगर निगम चंडीगढ़ घर-घर से उठाएगा कचरा, कर्मचारी भी नहीं हटाए जाएंगे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 16 Sep 2018 10:01 AM IST
विज्ञापन
garbage cleaning
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़ नगर निगम अब घरों से कूड़ा उठाएगा। इसे ट्रांसपोर्ट के जरिए गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट भेजा जाएगा। नगर निगम ने डोर-टु-डोर कलेक्शन के नए सिस्टम गारबेज फ्री स्टार रेटिंग-3 को मंजूरी दे दी है। इसकी स्वीकृति शुक्रवार को सदन की बैठक दे दी गई। इस सिस्टम से शहर में कहीं पर भी गंदगी नहीं दिखेगी। मेयर देवेश मोदगिल की अध्यक्षता में सदन की बैठक में प्रस्ताव को पास किया गया। उधर, भाजपा पार्षद राजेश कालिया ने इसका विरोध किया, जबकि कांग्रेस सहित अन्य पार्षदों ने अपनी सहमति जताई। कमिश्नर केके यादव ने कहा कि शहर में वर्षों से काम कर रहे डोर-टु-डोर गारबेज कलेक्शन सोसाइटी के सदस्यों को नगर निगम काम पर रखेगा ताकि वे लोग ठेकेदार के शोषण से बच सकें।
आउटसोर्स पर 1447 लोगों को काम पर रखा जाएगा, लेकिन नियमित नहीं किया जाएगा। मेयर ने कहा कि यह फैसला शहर को आगे ले जाने के लिए लिया गया है। इससे किसी का रोजगार नहीं जाएगा। इसमें पार्षदों की राय जानने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचना संभव है। भाजपा पार्षद रविकांत ने सुझाव दिया किप्रस्ताव को पास कर कूड़ा इकट्ठा करने वाले कर्मचारियों को एडजस्ट किया जाए। वहीं, राजेश कालिया और अन्य पार्षदों में इस प्रस्ताव को लेकर हो रही बहस के बीच सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया।
सीधे गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट पहुंचेगा कूड़ा
नगर निगम कमिश्नर ने कहा कि डोर-टु-डोर कलेक्शन के नए सिस्टम से शहर का कूड़ा उठाकर ट्रांसपोर्ट सिस्टम से सीधे गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट पहुंचेगा। इससे सही ढंग से सेग्रिगेशन भी होगा। इसमें कर्मचारी कोताही नहीं बरत पाएंगे। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने का भी प्रावधान होगा। वर्तमान में कुछ हजार घरों में ही डोर-टु-डोर कलेक्शन हो रहा है। अभी शहर के 38,500 घरों में सेग्रिगेशन नहीं हो पा रहा है, लेकिन नए सिस्टम से पूरा शहर कवर हो जाएगा। इसके अलावा निगम को राजस्व भी मिलेगा। इससे लगभग 30 करोड़ का इकट्ठा होगा।
विज्ञापन
यह प्रणाली लागू होती है तो सारी प्रक्रिया तीन महीने में पूरी हो जाएगी। इस पर लगभग 27 करोड़ खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि इस काम में लगे कर्मचारियों, वाहनों के मेंटीनेंस और अन्य मदों पर 15 करोड़ रुपये खर्च होगा, जबकि हर साल नगर निगम को 15 करोड़ का लाभ भी होगा। सिस्टम को सुधारना ज्यादा जरूरी है। तभी स्वच्छता में नंबर वन हो पाएंगे। मेयर ने कहा कि नए सिस्टम में अगले सप्ताह तक पूरा शहर और हर वार्ड कवर हो जाएगा।
बबला ने ली चुटकी
कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने स्वच्छता अभियान पर चुटकी लेते हुए कहा कि मैसूर स्टडी टूर पर पहुंचे पार्षदों के दल को वहां के पार्षदों ने कहा कि चंडीगढ़ को मैसूर आने की जरूरत ही नहीं थी। मैसूर का दल चंडीगढ़ आने वाला था। मॉडर्न सिटी तो चंडीगढ़ है। फिर भी इस पर अपव्यय क्यों किया गया।
39 ट्विन बिन हॉपर टिप्पर खरीदे जाएंगे
नगर निगम की ओर से इस प्रस्ताव के तहत 39 ट्विन बिन हॉपर टिप्पर खरीदे जाएंगे। एक ट्विन बिन हॉपर टिप्पर की कीमत 6,98,000 रुपये है। इस पर कुल 2,72,22,000 का खर्च आएगा। इसके बाद इन्हें चलाने के लिए डीसी रेट पर 39 ड्राइवर रखे जाएंगे, जिन पर हर माह 19875 रुपये का खर्च आएगा। वहीं, वाहनों पर प्रति हेल्पर 13,639 रुपये प्रति माह खर्च होंगे। नगर निगम का दावा है कि एक दिन में एक वाहन 1000 घरों से गारबेज उठाएगा।
सहज सफाई केंद्र मैटीरियल रिकवरी फेसिलिटेशन सेंटर बनेंगे
शहर के सहज सफाई केंद्रों को नगर निगम मैटीरियल रिकवरी फेसिलिटेशन सेंटर में बदलने जा रहा है। प्रस्ताव में इंदौर, विजयवाड़ा और मैसूर में मैटीरियल रिकवरी फेसिलिटेशन सेंटर का जिक्र किया गया है। वहां अलग-अलग कचरे का सेग्रिगेशन किया जाता है। कचरे को कम करने में मैटीरियल रिकवरी फेसिलिटेशन सेंटर अहम भूमिका निभा रहे हैं। कचरे के सेग्रिगेशन के बाद रिसाइक्लिंग वेस्ट से वहां की नगर निगम को आय भी हो रही है। शहर में 38 सहज सफाई केंद्र हैं, जिन्हें सदन के सदस्यों की अनुमति मिलते ही मैटीरियल रिकवरी फेसिलिटेशन सेंटर में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
विज्ञापन
आउटसोर्स पर 1447 लोगों को काम पर रखा जाएगा, लेकिन नियमित नहीं किया जाएगा। मेयर ने कहा कि यह फैसला शहर को आगे ले जाने के लिए लिया गया है। इससे किसी का रोजगार नहीं जाएगा। इसमें पार्षदों की राय जानने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचना संभव है। भाजपा पार्षद रविकांत ने सुझाव दिया किप्रस्ताव को पास कर कूड़ा इकट्ठा करने वाले कर्मचारियों को एडजस्ट किया जाए। वहीं, राजेश कालिया और अन्य पार्षदों में इस प्रस्ताव को लेकर हो रही बहस के बीच सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया।
विज्ञापन
सीधे गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट पहुंचेगा कूड़ा
नगर निगम कमिश्नर ने कहा कि डोर-टु-डोर कलेक्शन के नए सिस्टम से शहर का कूड़ा उठाकर ट्रांसपोर्ट सिस्टम से सीधे गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट पहुंचेगा। इससे सही ढंग से सेग्रिगेशन भी होगा। इसमें कर्मचारी कोताही नहीं बरत पाएंगे। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने का भी प्रावधान होगा। वर्तमान में कुछ हजार घरों में ही डोर-टु-डोर कलेक्शन हो रहा है। अभी शहर के 38,500 घरों में सेग्रिगेशन नहीं हो पा रहा है, लेकिन नए सिस्टम से पूरा शहर कवर हो जाएगा। इसके अलावा निगम को राजस्व भी मिलेगा। इससे लगभग 30 करोड़ का इकट्ठा होगा।
विज्ञापन
यह प्रणाली लागू होती है तो सारी प्रक्रिया तीन महीने में पूरी हो जाएगी। इस पर लगभग 27 करोड़ खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि इस काम में लगे कर्मचारियों, वाहनों के मेंटीनेंस और अन्य मदों पर 15 करोड़ रुपये खर्च होगा, जबकि हर साल नगर निगम को 15 करोड़ का लाभ भी होगा। सिस्टम को सुधारना ज्यादा जरूरी है। तभी स्वच्छता में नंबर वन हो पाएंगे। मेयर ने कहा कि नए सिस्टम में अगले सप्ताह तक पूरा शहर और हर वार्ड कवर हो जाएगा।
बबला ने ली चुटकी
कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने स्वच्छता अभियान पर चुटकी लेते हुए कहा कि मैसूर स्टडी टूर पर पहुंचे पार्षदों के दल को वहां के पार्षदों ने कहा कि चंडीगढ़ को मैसूर आने की जरूरत ही नहीं थी। मैसूर का दल चंडीगढ़ आने वाला था। मॉडर्न सिटी तो चंडीगढ़ है। फिर भी इस पर अपव्यय क्यों किया गया।
39 ट्विन बिन हॉपर टिप्पर खरीदे जाएंगे
नगर निगम की ओर से इस प्रस्ताव के तहत 39 ट्विन बिन हॉपर टिप्पर खरीदे जाएंगे। एक ट्विन बिन हॉपर टिप्पर की कीमत 6,98,000 रुपये है। इस पर कुल 2,72,22,000 का खर्च आएगा। इसके बाद इन्हें चलाने के लिए डीसी रेट पर 39 ड्राइवर रखे जाएंगे, जिन पर हर माह 19875 रुपये का खर्च आएगा। वहीं, वाहनों पर प्रति हेल्पर 13,639 रुपये प्रति माह खर्च होंगे। नगर निगम का दावा है कि एक दिन में एक वाहन 1000 घरों से गारबेज उठाएगा।
सहज सफाई केंद्र मैटीरियल रिकवरी फेसिलिटेशन सेंटर बनेंगे
शहर के सहज सफाई केंद्रों को नगर निगम मैटीरियल रिकवरी फेसिलिटेशन सेंटर में बदलने जा रहा है। प्रस्ताव में इंदौर, विजयवाड़ा और मैसूर में मैटीरियल रिकवरी फेसिलिटेशन सेंटर का जिक्र किया गया है। वहां अलग-अलग कचरे का सेग्रिगेशन किया जाता है। कचरे को कम करने में मैटीरियल रिकवरी फेसिलिटेशन सेंटर अहम भूमिका निभा रहे हैं। कचरे के सेग्रिगेशन के बाद रिसाइक्लिंग वेस्ट से वहां की नगर निगम को आय भी हो रही है। शहर में 38 सहज सफाई केंद्र हैं, जिन्हें सदन के सदस्यों की अनुमति मिलते ही मैटीरियल रिकवरी फेसिलिटेशन सेंटर में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।