{"_id":"65b82fe8e1435834e00f4274","slug":"nachhatar-singh-gave-new-life-to-two-people-even-after-saying-goodbye-to-the-world-chandigarh-news-c-16-sml1026-339643-2024-01-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: दुनिया को अलविदा कहकर भी दो लोगों को नया जीवन दे गए नछत्तर सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: दुनिया को अलविदा कहकर भी दो लोगों को नया जीवन दे गए नछत्तर सिंह
विज्ञापन
चंडीगढ़। पटियाला निवासी 58 वर्षीय नछत्तर सिंह दुनिया को अलविदा कहकर भी दो लोगों को नई जिंदगी दे गए। पीजीआई में नछत्तर सिंह को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उनके बेटे डॉक्टर कमल ने अपने पिता का अंगदान कराकर जिंदगी की जंग लड़ रहे दो गंभीर मरीजों को नया जीवन दिया। नछत्तर सिंह की दोनों किडनियों को पीजीआई में भर्ती दो बेहद गंभीर मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया।पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि अंगदाता परिवार करुणा और परोपकार का प्रतीक है। नछत्तर सिंह का बेटा खुद एक डॉक्टर है। वह अंगदान के बारे में जानता है, लेकिन पिता को खोने के दुःख के बीच उन्होंने अंगदान जैसे साहसिक फैसले को लेकर दो लोगों का जीवन बचाया, यह बहुत बड़ी बात है। यह कृतज्ञता के किसी भी शब्द से कहीं अधिक उदार है। डॉक्टर कमल जैसे लोग मानवता में विश्वास पैदा करते हैं और पीजीआई के लिए प्रेरणा बनते हैं।
58 वर्षीय नछत्तर सिंह को बीते नौ जनवरी को इंट्रा कपाल रक्तस्राव के बाद पीजीआई में भर्ती कराया गया था। पीजीआई के विशेषज्ञों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। संस्थान की ब्रेन डेड कमेटी ने 16 जनवरी को नछत्तर सिंह को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। डॉक्टर कमल ने इसकी सूचना मिलने पर अपनी मां के समर्थन के बाद पिता के अंगदान के लिए पीजीआई की टीम को सहमति दी।
डॉक्टर कमल का कहना है कि यह हमारे परिवार के लिए एक कड़वा क्षण है। पिता को खोना नि:सदेह हृदयविदारक है, लेकिन अंगदान के जरिए दूसरों के जीवन में योगदान करने में सक्षम होना, इस नुकसान में परोपकारी उद्देश्य की भावना लाता है। मेरे पिता की विरासत उनके द्वारा बचाई गई जिंदगियों में जीवित रहेगी। नछत्तर सिंह की पत्नी ने कहा कि उनके पति ने अपना पूरा जीवन दूसरों की मदद में लगा दिया इसलिए जाते हुए इससे बेहतर उपहार उनके लिए और कुछ नहीं हो सकता था।
विज्ञापन
कोट
नछत्तर सिंह जैसे दाता परिवार दूसरों के लिए अनुकरण और आदर्श स्थापित करते हैं। ऐसे परिवार अंगदान कार्यक्रम का आधार हैं। अपनों के अंगों को किसी के जीवन का आधार बनाइए क्योंकि धरती पर इससे मूल्यवान उपहार और कुछ नहीं हो सकता है।
-प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआई
विज्ञापन
58 वर्षीय नछत्तर सिंह को बीते नौ जनवरी को इंट्रा कपाल रक्तस्राव के बाद पीजीआई में भर्ती कराया गया था। पीजीआई के विशेषज्ञों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। संस्थान की ब्रेन डेड कमेटी ने 16 जनवरी को नछत्तर सिंह को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। डॉक्टर कमल ने इसकी सूचना मिलने पर अपनी मां के समर्थन के बाद पिता के अंगदान के लिए पीजीआई की टीम को सहमति दी।
विज्ञापन
डॉक्टर कमल का कहना है कि यह हमारे परिवार के लिए एक कड़वा क्षण है। पिता को खोना नि:सदेह हृदयविदारक है, लेकिन अंगदान के जरिए दूसरों के जीवन में योगदान करने में सक्षम होना, इस नुकसान में परोपकारी उद्देश्य की भावना लाता है। मेरे पिता की विरासत उनके द्वारा बचाई गई जिंदगियों में जीवित रहेगी। नछत्तर सिंह की पत्नी ने कहा कि उनके पति ने अपना पूरा जीवन दूसरों की मदद में लगा दिया इसलिए जाते हुए इससे बेहतर उपहार उनके लिए और कुछ नहीं हो सकता था।
विज्ञापन
कोट
नछत्तर सिंह जैसे दाता परिवार दूसरों के लिए अनुकरण और आदर्श स्थापित करते हैं। ऐसे परिवार अंगदान कार्यक्रम का आधार हैं। अपनों के अंगों को किसी के जीवन का आधार बनाइए क्योंकि धरती पर इससे मूल्यवान उपहार और कुछ नहीं हो सकता है।
-प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआई