Haryana News: बारिश से सरसों की फसल तबाह, उत्पादन घटा... किसानों ने किया स्टॉक, क्या महंगा होगा तेल?
हरियाणा सरकार की एजेंसी हैफेड सरसों की खरीद कर रही है लेकिन अभी तक 26,594 किसान 46,894 मीट्रिक टन सरसों लेकर ही पहुंचे। सरसों का एमएसपी 5050 रुपये है लेकिन किसानों को बारिश के चलते दाने में नमी होने के चलते एमएसपी रेट भी नहीं मिल रहा है।
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हरियाणा में पाला पड़ने और बेमौसमी बारिश का असर अब आम से लेकर खास व्यक्ति की रसोई पर पड़ने वाला है। बारिश से अकेले हरियाणा में सरसों का उत्पादन 50 प्रतशित तक प्रभावित हुआ है। सरसों की नई आवक से फिलहाल सरसों के तेल के दाम ठहरे हैं लेकिन आशंका जताई जा रही है कि आगामी कुछ माह में सरसों के तेल पर इसका असर दिखेगा। एक तो उत्पादन संभावना के मुताबिक कम हुआ है, दूसरा एमएसपी से कम भाव मिलने पर किसानों ने सरसों का स्टॉक कर लिया है।
इस बार हरियाणा में 18.16 लाख एकड़ में सरसों की बिजाई की गई थी। मौसम का साथ मिलने से इसमें 13.89 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के आसार थे लेकिन जनवरी में पड़े पाले और मार्च में हुई बेमौसमी बारिश ने सारे अनुमानों को धो दिया। दाना झड़ने और बारिश से दाने में फंगस लगने से उत्पादन प्रभावित हुआ है। प्रदेश के 13 जिलों में 10 लाख एकड़ सरसों की फसल बारिश से खराब हुई है। हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, भिवानी, रोहतक, झज्जर, पलवल, कैथल, अंबाला, जींद, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी जिले में सरसों की फसल में 20 से 50 फीसदी तक नुकसान का अनुमान है।
मंडियों में कम आ रहा सरसों
फसल खराब का असर मंडियों में दिख रहा है। इस बार समय से पहले 15 मार्च से सरसों की खरीद शुरू की गई। हरियाणा सरकार की एजेंसी हैफेड सरसों की खरीद कर रही है लेकिन अभी तक 26,594 किसान 46,894 मीट्रिक टन सरसों लेकर ही पहुंचे। सरसों का एमएसपी 5050 रुपये है लेकिन किसानों को बारिश के चलते दाने में नमी होने के चलते एमएसपी रेट भी नहीं मिल रहा है।
प्राइवेट मिलर्स भी सस्ते दामों पर खरीद कर रहे हैं। 2018-19 में प्रदेश में 2.35 लाख एमटी, 2019-20 में 5.11 लाख एमटी और 2020-21 में 4.53 लाख एमटी सरसों खरीदा गया था। 2021-22 में सरसों को एमएसपी से ऊपर भाव मिले थे। इसी फेर में इस बार किसानों ने सरसों की बंपर खेती की थी।
सरसों उत्पादन में तीसरे स्थान पर हरियाणा
देश में कुल सरसों उत्पादन में राजस्थान नंबर एक पर है। देश के कुल सरसों उत्पादन में 40.82 फीसदी हिस्सा अकेले राजस्थान का है। इसके बाद दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है। यहां 13.33 प्रतिशत सरसों पैदा होता है। इसके बाद हरियाणा का नंबर आता है। अन्य राज्यों की बात करें तो मध्य प्रदेश में 11.40 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 8.64 फीसदी सरसों की पैदावार होती है। सरसों के कारोबारी हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के राज्य प्रधान अशोक गुप्ता व चेयरमैन रजनीश चौधरी ने बताया कि पिछले साल सरसों के कॉमर्शियल खरीद पर आढ़त 2.50 प्रतिशत थी। इसे अब आधा यानी 1.25 प्रतिशत कर दिया है।
उत्तर प्रदेश में भी बारिश का असर
इस बार उत्तर प्रदेश में 13.28 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई थी और सरसों का उत्पादन 16.26 लाख मीट्रिक टन का है। जबकि पिछले साल 14.17 लाख हेक्टेयर में सरसों की खेती की गई थी और उत्पादन 15 लाख टन था। सरकारी आंकड़े सरसों की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं बता रहे हैं। किसानों का कहना है कि 20 से 30 प्रतिशत सरसों की फसल बारिश के कारण खराब हुई है।
फिलहाल सरसों आवक से घटे तेल के दाम
इस समय प्रदेश की मंडियों में सरसों आवक होने के चलते सरसों के तेल के दामों में गिरावट देखने को मिल रही है। हैफैड का सरसों का तेल पहले एक लीटर 180 रुपये से अधिक का था। अब यह घटकर 145 रुपये तक आ गया है। इसी प्रकार, तीन माह पहले 15 लीटर टीन का रेट 2500 रुपये था, अब यह 2020 में मिल रहा है। 15 किलोग्राम टीन सरसों के तेल का रेट 2203 रुपये है। इस बारे में हैफेड के चेयरमैन कैलाश भगत का कहना है कि नई फसल आने से सरसों के तेल के दाम में गिरावट आई है। मापदंडों पर खरे उतरने वाले सरसों को खरीदा जा रहा है। पूरी मार्केट के आधार पर ही तेल के दाम तय किए जाते हैं।
अभी नई फसल आने से सरसों के तेल के बाजार में स्थिरता है। बारिश के चलते खराब हुई फसल का असर मई और जून में दिखेगा। उस समय जरूर तेल के दाम बढ़ सकते हैं लेकिन यह सब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करता है। - संजीव कुमार, कारोबारी।