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सड़कों पर उतरे हजारों मुसलमान, विरोध प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा, रोहिंग्या बने कारण
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
Updated Tue, 12 Sep 2017 06:34 PM IST
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सड़कों पर उतरे हजारों मुसलमान, विरोध प्रदर्शन
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पिछले कई सप्ताह से म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर किए जा रहे अत्याचारों के खिलाफ मंगलवार को हजारों की संख्या में मुसलमान समुदाय के लोग सड़कों पर उतरे। रोष मार्च का नेतृत्व शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने किया। मुसलमानों ने फील्ड गंज चौक स्थित जामा मस्जिद से डीसी दफ्तर तक रोष मार्च निकाला और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नाम डीसी को ज्ञापन सौंपा।
मंगलवार सुबह से ही लुधियाना के विभिन्न इलाकों से हजारों की संख्या में मुसलमान जामा मस्जिद पहुंचना शुरू हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथ में ज्यादातर अंग्रेजी में लिखे पोस्टर उठा रखे थे, जिन पर रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार को रोकने के साथ-साथ म्यंामार की स्टेट काउंसिल व नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सांग सू की के खिलाफ नारे लिखे हुए थे।
इस मौके पर शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान ने कहा कि विश्व के इतिहास में अब तक कोई ऐसा नरसंहार नहीं हुआ जैसा कि इन दिनों म्यांमार की सरकार और वहां के दंगाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हैरत की बात है कि विश्व समुदाय जो एक छोटी सी आतंकी घटना होने के बाद आसमान सिर पर उठा लेता है, वह हजारों मुसलमानों के कत्लेआम पर खामोश है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि इस नरसंहार के खिलाफ आवाज उठाए।
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शाही इमाम ने कहा कि म्यांमार में हो रहे नरसंहार के बीच केंद्र सरकार की ओर से देश में रह रहे चालीस हजार रोहिंग्या रिफ्यूजियों को वापस भेजे जाने की खबर ने सिसक रहे रोहिंग्यों के जख्म पर नमक डालने का काम किया है। शाही इमाम ने कहा कि भारत का संविधान ही नहीं बल्कि इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि हमने कभी मुसीबत में शरण मांगने वालों को मना नहीं किया।
शाही इमाम मौलाना हबीब ने कहा कि धर्म के नाम पर अन्याय और सियासत दोनों ही गलत है। उन्होंने कहा कि रोहिंग्यों का कत्लेआम हरगिज सहन नहीं किया जाएगा, ये सिर्फ मुस्लिम समुदाय का नहीं, बल्कि समूह इंसानियत को बचाने का विषय है। जामा मस्जिद द्वारा एक फैक्स संदेश के जरिए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो जूटै्रस, ओआईसी (मुस्लिम देशों का समूह) के महासचिव डॉ. यूसुफ अल ओथम और मुस्लिम वर्ल्ड लीग मक्का के महासचिव अबू अब्दुल्ला को भी ज्ञापन भेजा गया है।
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मंगलवार सुबह से ही लुधियाना के विभिन्न इलाकों से हजारों की संख्या में मुसलमान जामा मस्जिद पहुंचना शुरू हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथ में ज्यादातर अंग्रेजी में लिखे पोस्टर उठा रखे थे, जिन पर रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार को रोकने के साथ-साथ म्यंामार की स्टेट काउंसिल व नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सांग सू की के खिलाफ नारे लिखे हुए थे।
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इस मौके पर शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान ने कहा कि विश्व के इतिहास में अब तक कोई ऐसा नरसंहार नहीं हुआ जैसा कि इन दिनों म्यांमार की सरकार और वहां के दंगाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हैरत की बात है कि विश्व समुदाय जो एक छोटी सी आतंकी घटना होने के बाद आसमान सिर पर उठा लेता है, वह हजारों मुसलमानों के कत्लेआम पर खामोश है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि इस नरसंहार के खिलाफ आवाज उठाए।
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शाही इमाम ने कहा कि म्यांमार में हो रहे नरसंहार के बीच केंद्र सरकार की ओर से देश में रह रहे चालीस हजार रोहिंग्या रिफ्यूजियों को वापस भेजे जाने की खबर ने सिसक रहे रोहिंग्यों के जख्म पर नमक डालने का काम किया है। शाही इमाम ने कहा कि भारत का संविधान ही नहीं बल्कि इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि हमने कभी मुसीबत में शरण मांगने वालों को मना नहीं किया।
शाही इमाम मौलाना हबीब ने कहा कि धर्म के नाम पर अन्याय और सियासत दोनों ही गलत है। उन्होंने कहा कि रोहिंग्यों का कत्लेआम हरगिज सहन नहीं किया जाएगा, ये सिर्फ मुस्लिम समुदाय का नहीं, बल्कि समूह इंसानियत को बचाने का विषय है। जामा मस्जिद द्वारा एक फैक्स संदेश के जरिए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो जूटै्रस, ओआईसी (मुस्लिम देशों का समूह) के महासचिव डॉ. यूसुफ अल ओथम और मुस्लिम वर्ल्ड लीग मक्का के महासचिव अबू अब्दुल्ला को भी ज्ञापन भेजा गया है।