मिसाल: जेल में इमरान दे रहा गीता का संदेश
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सांप्रदायिकता के दौर में एक जगह ऐसी भी है, जहां गीता पुस्तक भेंट करने का कार्य मुस्लिम युवक कर रहा है। ये जगह है हरियाणा के करनाल का जिला जेल। यहां पर हर नए बंदी को गीता भेंट की जाती है, ताकि वह खाली समय में गीता पढ़ सके।
अहम बात यह है कि गीता पुस्तक भेंट करने का कार्य मुस्लिम युवक कर रहा है। कुरान की आयतें पढ़ते-पढ़ते इमरान बिनजमील कब गीता के श्लोक संस्कृत में बोलने लगा, खुद उसे भी नहीं पता। गीता के श्लोकों का अर्थ जानने के लिए उसने न केवल संस्कृत सीखी, बल्कि गीता में इतना डूब गया कि वह अब इसके प्रचार में जुट गया है।
तीन माह में वह करीब 4500 गीता की पुस्तकें जेल के स्टाफ व कैदियों व बंदियों को बांट चुका है। अब उसकी कामना है कि जेल से बाहर निकलने के बाद वह लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करेगा व कुरान, गीता, बाइबिल व गुरु ग्रंथ साहिब का प्रचार करना है।
गांव मलकपुर (यूपी, कैराना) का इमरान (30) सोनीपत में बैंक में डकैती के मामले में 2008 से दस साल की कैद करनाल जेल में काट रहा है। पढ़ने के शौकीन ग्रेजुएट इमरान तत्कालीन जेलर जगजीत सिंह के संपर्क में आया तो जेल में ही लाइब्रेरी की व्यवस्था की गई। इसके बाद उसे पढ़ने की ऐसी लगन लगी कि अब वह दूसरे कैदियों के जीवन में शिक्षा की अलख जगा रहा है।
तीन माह पहले मौजूदा जेलर शेर सिंह सिंह ने लाइब्रेरी में गीता की पुस्तक रखी तो इमरान ने उसे पढ़ा। इसके बाद वह गीता में ऐसा रमा कि इसके प्रचार में ही लग गया। इमरान की इच्छानुसार जेल में 6 हजार गीता की पुस्तकें मंगवाई गई और वह आने वाले हर कैदी को गीता पुस्तक भेंट करता है। कैदियों और बंदियों के साथ-साथ वह जेल के सारे स्टाफ को भी गीता देकर पढ़ने का आह्वान कर चुका है।
चारों ग्रंथों को पढ़ चुका है इमरान
इमरान ने गीता पढ़ने के लिए पहले संस्कृत की तालीम ली और बाद में गुरु ग्रंथ साहिब को पढ़ने के लिए जेल के ही साथी से पंजाबी का ज्ञान भी लिया। गीता और गुरु ग्रंथ साहिब पढ़ने के बाद उसने बाइबिल भी पढ़ी। इमरान का कहना है कि वह चारों ग्रंथों को पढ़ चुका है, सभी ने नेक कर्म करने और बुराइयों को त्यागने की बात कही है। वह हिंदी, उर्दू, अरबी, अंग्रेजी, पंजाबी व तेलुगू का भी जानकार है।
पांच स्कूल व इग्नू सेंटर को संभालता इमरान
करनाल जेल में कुल बंदी 2223 हैं। कैदियों और बंदियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए जेल में ही स्कूल व लाइब्रेरी खोले गए हैं। पांच स्कूल चल रहे हैं। कैदी ही यहां पर कैदियों को पढ़ाते हैं। इनके तहत हरियाणा ओपन स्कूल से 10वीं कक्षा के 215, बारहवीं के 138 कैदी पढ़ाई कर रहे हैं।
इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के सेंटर से 681 कैदी बीपीपी (प्री बैचलर प्रोग्राम) कोर्स कर रहे हैं तो 151 कैदी बीए कर रहे हैं। इन सब की पढ़ाई सामग्री व पेपर आदि व लाइब्रेरी की पूरी देखभाल इमरान करता है और कैदियों को स्कूल में पढ़ाता भी है। उर्दू के स्टूडेंट्स 28 हैं तो अरबी के 17 हैं। इमरान ने बताया कि लाइब्रेरी में हजारों की संख्या में पुस्तकें हैं, जिनमें जीवनी व सभी विषयों की पुस्तकें हैं।
इमरान, कैदी ने बताया कि जेल में आने के बाद लगा कि जीवन समाप्त हो गया, लेकिन गीता पढ़ने के बाद फिर से उमंग है। गलत के खिलाफ लड़ने की और यतीम व अनपढ़ लोगों को शिक्षा देने की। जेल के अंदर भी रहकर मुझे यह कार्य करने को मिला मैं इसके लिए खुदा का शुक्रगुजार हूं। मेरी तमन्ना है कि सजा पूरी होने के बाद समाज के लिए काम करूं और लोगों को बताऊं कि भगवान एक ही है, बस रूप और नाम अलग अलग हैं।
शेर सिंह, जेल अधीक्षक, करनाल ने बताया कि इमरान जेल के कैदियों को जहां गीता का संदेश और अक्षर ज्ञान दे रहा है, वहीं नए बंदी को गीता भेंट कर नेक कार्य कर रहा है।