{"_id":"6238e3ce12a7f03adb71dcf7","slug":"music-relaxes-heart-and-mind-banwarilal-purohit-chandigarh-news-pkl4453045156","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल और दिमाग को सुकून देता है संगीत : बनवारीलाल पुरोहित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल और दिमाग को सुकून देता है संगीत : बनवारीलाल पुरोहित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। टैगोर थिएटर में सोमवार शाम को प्राचीन कला केंद्र की ओर से 51वां भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने किया। प्रशासक ने कला जगत की प्रसिद्ध हस्तियों को सम्मानित किया। इनमें तालयोगी पंडित सुरेश तलवलकर, सिद्धार्थ एवं अंजना राजन शामिल हैं। प्रशासक ने कहा कि संगीत दिल और दिमाग को सुकून देने के साथ-साथ सकारात्मकता प्रदान करता है। संगीत की थरैपी से कई बीमारियां भी दूर हुई हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही संगीत की साधना होती आ रही है। उन्होंने अकबर के दरबार में नवरत्नों में से एक तानसेन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कई राग को जन्म दिया। कहा जाता है कि उनके गायन से पत्थर भी पिघल जाता और जंगली जानवर भी शांत हो जाते थे। उन्होंने उपस्थित कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि आप लोग धन्य हैं जो युवा पीढ़ी को डिस्को जाने से बचाया।
सम्मान समारोह के बाद तालयोगी पंडित सुरेश तलवलकर ने मंच संभाला। उन्होंने निबद्ध बंदिश में पूजा से पवन हो मन शुरुआत की। इसके बाद आढ़ा चौताल में निबद्ध बंदिश हटो पिया अब निकन हो.. पेश की। उनकी बंदिशों और तबले की जुगलबंदी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सावनी तलवलकर ने तबले, नागनाथ अडगांवकर ने गायन, अभिषेक ने हारमोनियम पर उनका साथ दिया। कार्यक्रम के अंत में पंडित सुरेश तलवलकर के सह कलाकारों को सम्मान चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर केंद्र के सचिव सजल कौसर, रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर एवं निदेशक प्रोजेक्ट एवं डेवलपमेंट विभाग आशुतोष महाजन उपस्थित थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही संगीत की साधना होती आ रही है। उन्होंने अकबर के दरबार में नवरत्नों में से एक तानसेन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कई राग को जन्म दिया। कहा जाता है कि उनके गायन से पत्थर भी पिघल जाता और जंगली जानवर भी शांत हो जाते थे। उन्होंने उपस्थित कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि आप लोग धन्य हैं जो युवा पीढ़ी को डिस्को जाने से बचाया।
विज्ञापन
सम्मान समारोह के बाद तालयोगी पंडित सुरेश तलवलकर ने मंच संभाला। उन्होंने निबद्ध बंदिश में पूजा से पवन हो मन शुरुआत की। इसके बाद आढ़ा चौताल में निबद्ध बंदिश हटो पिया अब निकन हो.. पेश की। उनकी बंदिशों और तबले की जुगलबंदी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सावनी तलवलकर ने तबले, नागनाथ अडगांवकर ने गायन, अभिषेक ने हारमोनियम पर उनका साथ दिया। कार्यक्रम के अंत में पंडित सुरेश तलवलकर के सह कलाकारों को सम्मान चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर केंद्र के सचिव सजल कौसर, रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर एवं निदेशक प्रोजेक्ट एवं डेवलपमेंट विभाग आशुतोष महाजन उपस्थित थे।
विज्ञापन