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गजब, अब गेहूं-गन्ने के भूसे से बन जाएगा मशरूम

Fri, 20 Mar 2015 04:48 PM IST
सादिक अली/अमर उजाला, रोहतक
सादिक अली/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 20 Mar 2015 04:48 PM IST
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mushroom now made at wheat waste material

हरियाणा और पंजाब के किसानों के लिए अच्छी खबर है। अब हिमाचल के पहाड़ों पर मिलने वाली मशरूम को गेहूं और गन्ने के भूसे से तैयार किया जाएगा। भूसे से कल्टीवेशन के बाद तैयार मशरूम की क्वालिटी और वैरायटी पहले से बेहतर होगी। इसे दिल की बीमारी, डायबिटिज और मोटापे के इलाज में प्रयोग किया जा सकेगा। किसानों को भूसे का पैसा तो मिलेगा ही साथ में मशरूम के लिए भूसे की कमी भी दूर होगी। बिना ज्यादा जगह और लागत के आमदनी दो से तीन गुना तक होगी।

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हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी शिमला के प्रोफेसर अनंत सागर का कहना है कि मशरूम में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और फाइबर्स होते हैं। ये दिल के बीमारियों के अलावा मोटापा कम करने और डायबिटिज के रोगियों के लिए मुफीद हैं। मशरूम ज्यादातर पहाड़ों पर होती है और पैदावार बहुत कम है। ऐसे में इसका उत्पादन और वैरायटी बढ़ाने के लिए कल्टीवेशन प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके लिए यूजीसी ने 12 लाख रुपये का अनुदान भी दिया है।
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यूं होगा कल्टीवेशन
प्रोफेसर अनंत ने बताया कि मशरूम को गेहूं के दानों पर डाल कर पहले बीज बनाया जाता है। 15 किलो मशरूम तैयार करने के लिए 10 किलो गेहूं को उबालकर कर उस पर मशरूम का पाउडर डाला जाता है। 3 माह में गेहूं बीज के रूप में आ जाता है। गेहूं और गन्ने के भूसे से तैयार 10 किलो कम्पोज में 10 ग्राम बीज डाले जाते हैं।
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इस मिश्रण को 25 दिनों के लिए एक पॉलीथिन में पैक करके 25 डिग्री तापमान में अंधेरे में रखा जाता है। 25 दिन बाद इस पैक को खोल कर हवादार कमरे में 25 दिन और रखा जाएगा। इससे मशरूम अंकुरित होना शुरू हो जाएंगे।

5 हजार की लागत में 15 हजार कमाई

mushroom now made at wheat waste material

प्रोफेसर अनंत बताते हैं कि इसमें सभी की कमाई है। जो कल्टीवेशन करेगा उसे ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होगी। महज पांच हजार रुपये के खर्च पर तीन माह में उसे 15 हजार रुपये के मशरूम मिल जाएंगे।

केवल दो आदमी ही इस काम को आसानी से कर सकते हैं। हरियाणा और पंजाब से गेहूं और गन्ने का भूसा लाया जाएगा। जिससे यहां के किसानों को वेस्टेज माल से भी कमाई होने लगेगी। गेहूं और गन्ने का भूसा किसी काम नहीं आता है। इसे जलाना ही पड़ता है। जलाने की बजाय मशरूम बनाने के काम में लिया जाएगा।

पैटेंट की तैयारी
एमडीयू के डीडीई हॉल में जेनेटिक्स विभाग की ओर से ‘थैरापुयटिक पोटेंशियल ऑफ नैचर प्रोडक्ट्स : करंट इनोवेशंस एंड फ्यूचर ट्रेंड्स’ विषय पर पर आयोजित नेशनल कांफ्रेंस में प्रोफेसर अनंत ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का पैंटेंट कराने की भी पूरी तैयारी हो चुकी है। जल्द ही पैटेंट भी उनके नाम हो जाएगा।

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