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3 भाषाएं, 11 शायर और शायराना हुआ पंजाब कला भवन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 12 Apr 2014 01:43 PM IST
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‘हमसे जितनी हो सकी, हमने रोशनी करदी, जुगनुओ तुम्हारी भी थोड़ी जिम्मेदारी है।’ रुड़की के शायर अलीम वाजिद ने जैसे ही यह शेर पढ़ा तो पंजाब कला भवन का ऑडीटोरियम तालियों से गूंज उठा।
युवा लेखक कला मंच चंडीगढ़ की और से और हरियाणा उर्दू अकादमी और पंजाबी साहित्य अकादमी के सौजन्य से त्रिभाषी ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे में देशभर के कुल 11 शायरों ने हिस्सा लिया।
मुशायरे की शुरुआत पंचकूला के शायर शम्स तबरेजी ने सभी शायरों से जानपहचान कराते हुए की। इसके बाद हरमीत विद्यार्थी ने अपने कलाम तूं रिशतियां दे सागर विच्च उतर के वेखीं, मैंनू जे मिलणां चाहें, खुद विच्च उतर के वेखीं ने भी रंग जमा दिया।
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मुशायरे को आगे बढ़ाते हुए कुराली के अतिर जिया ने अपने कलाम पढ़े, जिनके बाद साहिल माधोपुरी ने मेरी बुलंदियों में तुझे क्यों मलाल है, मुझको नवाजने में तो उसका कमाल है भी काबिलेगौर रहा मुसव्विर फिरोजपुरी ने अपने शेयर बीवी के वास्ते ले आया लिपस्टिक, लेकिन मां का टूटा चश्मा भी देखा है तूने, से माहौल भावुक कर दिया।
इसके बाद इशा नाज और नवीन नीर ने अपने शेरों से हाजिरी लगाई। नवीन ने अपना कलाम जब चलने की धुन होगी तो सफर भी आएंगे, उड़ने की अगर सोचेंगे तो पर भी आएंगे पेश किया।
महफिल में इसके बाद प्रमुख शायर जसवंत जफर, निर्मल दत्त, शम्स तबरेजी और सलीम जुवेरी ने अपने कलाम पढ़े। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डा. देशराज सपरा, निदेशक, हरियाणा उर्दू अकादमी शामिल हुए।
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युवा लेखक कला मंच चंडीगढ़ की और से और हरियाणा उर्दू अकादमी और पंजाबी साहित्य अकादमी के सौजन्य से त्रिभाषी ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे में देशभर के कुल 11 शायरों ने हिस्सा लिया।
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मुशायरे की शुरुआत पंचकूला के शायर शम्स तबरेजी ने सभी शायरों से जानपहचान कराते हुए की। इसके बाद हरमीत विद्यार्थी ने अपने कलाम तूं रिशतियां दे सागर विच्च उतर के वेखीं, मैंनू जे मिलणां चाहें, खुद विच्च उतर के वेखीं ने भी रंग जमा दिया।
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मुशायरे को आगे बढ़ाते हुए कुराली के अतिर जिया ने अपने कलाम पढ़े, जिनके बाद साहिल माधोपुरी ने मेरी बुलंदियों में तुझे क्यों मलाल है, मुझको नवाजने में तो उसका कमाल है भी काबिलेगौर रहा मुसव्विर फिरोजपुरी ने अपने शेयर बीवी के वास्ते ले आया लिपस्टिक, लेकिन मां का टूटा चश्मा भी देखा है तूने, से माहौल भावुक कर दिया।
इसके बाद इशा नाज और नवीन नीर ने अपने शेरों से हाजिरी लगाई। नवीन ने अपना कलाम जब चलने की धुन होगी तो सफर भी आएंगे, उड़ने की अगर सोचेंगे तो पर भी आएंगे पेश किया।
महफिल में इसके बाद प्रमुख शायर जसवंत जफर, निर्मल दत्त, शम्स तबरेजी और सलीम जुवेरी ने अपने कलाम पढ़े। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डा. देशराज सपरा, निदेशक, हरियाणा उर्दू अकादमी शामिल हुए।