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Chandigarh News: नगर निगम का ‘महंगा’ टेंडर, एसी की मरम्मत पर मार्केट रेट से ज्यादा खर्च का आरोप
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चंडीगढ़। नगर निगम एक बार फिर अपने टेंडर के रेट्स को लेकर सवालों के घेरे में घिर गया है। इस बार का मामला एसी की मरम्मत पर मार्केट से ज्यादा खर्चा करने से जुड़ा है। जिसमें तय किए गए दामों को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता (एक्टीविस्ट) आरके गर्ग ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि नगर निगम ने डेढ़ टन के स्प्लिट एसी की गैस भरने जैसे कार्यों के लिए 4147.81 रुपये प्रति यूनिट की दर निर्धारित की है, जो बाजार भाव से काफी अधिक है। गर्ग के मुताबिक कई मरम्मत कार्यों में 50 से 70 फीसदी तक रेट ज्यादा लगाए गए हैं।
वर्ष 2025-26 के लिए नगर निगम के इलेक्ट्रिकल सब डिवीजन नंबर-1 और 2 के तहत सामुदायिक केंद्रों और एनआरबी बिल्डिंग में एयर कंडीशनर की मरम्मत और रखरखाव के लिए हाल में टेंडर जारी किया गया है, जिसमें यह रेट तय किए गए हैं। यह एयर कंडीशनर की मरम्मत, कंप्रेसर बदलने, गैस भरने सहित अन्य कार्यों के लिए जारी किया गया है। आरके गर्ग का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब नगर निगम या प्रशासन के टेंडरों में इस तरह की अनियमितताएं सामने आई हों। ज्यादातर टेंडर जानबूझकर ''इंफ्लेटेड रेट्स'' के साथ पास किए जाते हैं ताकि ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन मामलों को लेकर ऑडिट विभाग पहले भी कई बार आपत्ति जता चुका है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता।
रेट्स में भारी अंतर का आरोप
जो टेंडर के दस्तावेज सामने आया है, उसमें उदाहरण के तौर पर स्प्लिट एसी (1.5 टन/2 टन) की गैस भरने के लिए प्रति यूनिट 4147.81 रुपये की दर दिखाई गई है। जबकि बाजार में यही सेवा आम तौर पर करीब 2500 रुपये में उपलब्ध है। इसी तरह तीन या चार टन के डिफेक्टिव कंप्रेसर की रिप्लेसमेंट के लिए 35,522.98 रुपये तक की दर दिखाई गई है, जो वास्तविक लागत से काफी ज्यादा मानी जा रही है। दो टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें से एक टेंडर की कुल राशि 11,64,303.59 रुपये है, जिसमें दर्जनों कार्यों के लिए निर्धारित दरें शामिल हैं। आरके गर्ग का कहना है कि यदि इन्हीं कार्यों को बाजार दरों पर कराया जाए, तो कुल राशि पर काफी पैसों की बचत हो जाएगी। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे टेंडर की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स का पैसा इस तरह बर्बाद नहीं होना चाहिए।
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वर्ष 2025-26 के लिए नगर निगम के इलेक्ट्रिकल सब डिवीजन नंबर-1 और 2 के तहत सामुदायिक केंद्रों और एनआरबी बिल्डिंग में एयर कंडीशनर की मरम्मत और रखरखाव के लिए हाल में टेंडर जारी किया गया है, जिसमें यह रेट तय किए गए हैं। यह एयर कंडीशनर की मरम्मत, कंप्रेसर बदलने, गैस भरने सहित अन्य कार्यों के लिए जारी किया गया है। आरके गर्ग का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब नगर निगम या प्रशासन के टेंडरों में इस तरह की अनियमितताएं सामने आई हों। ज्यादातर टेंडर जानबूझकर ''इंफ्लेटेड रेट्स'' के साथ पास किए जाते हैं ताकि ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन मामलों को लेकर ऑडिट विभाग पहले भी कई बार आपत्ति जता चुका है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता।
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रेट्स में भारी अंतर का आरोप
जो टेंडर के दस्तावेज सामने आया है, उसमें उदाहरण के तौर पर स्प्लिट एसी (1.5 टन/2 टन) की गैस भरने के लिए प्रति यूनिट 4147.81 रुपये की दर दिखाई गई है। जबकि बाजार में यही सेवा आम तौर पर करीब 2500 रुपये में उपलब्ध है। इसी तरह तीन या चार टन के डिफेक्टिव कंप्रेसर की रिप्लेसमेंट के लिए 35,522.98 रुपये तक की दर दिखाई गई है, जो वास्तविक लागत से काफी ज्यादा मानी जा रही है। दो टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें से एक टेंडर की कुल राशि 11,64,303.59 रुपये है, जिसमें दर्जनों कार्यों के लिए निर्धारित दरें शामिल हैं। आरके गर्ग का कहना है कि यदि इन्हीं कार्यों को बाजार दरों पर कराया जाए, तो कुल राशि पर काफी पैसों की बचत हो जाएगी। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे टेंडर की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स का पैसा इस तरह बर्बाद नहीं होना चाहिए।
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