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वित्तीय संकट से निपटने की तैयारी: साढ़े चार साल बाद संपत्ति कर बढ़ाएगा चंडीगढ़ निगम, बैठक में आएगा एजेंडा
Wed, 18 Dec 2024 01:18 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 18 Dec 2024 01:18 AM IST
सार
अधिकारियों का कहना है कि महंगाई और बढ़ते खर्चों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया है। अब 24 दिसंबर को होने वाली सदन की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव लाया जाएगा। हालांकि इस एजेंडे पर पार्षदों का क्या रुख रहता है, ये देखना अहम होगा।
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चंडीगढ़ नगर निगम
- फोटो : फाइल
विस्तार
चंडीगढ़ नगर निगम वित्तीय संकट से निपटने के लिए एक बार फिर से संपत्ति कर बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। 24 दिसंबर को होने वाली सदन की बैठक में इस संबंध में एजेंडा लाया जाएगा। साढ़े चार साल बाद निगम संपत्ति कर में वृद्धि का प्रस्ताव लाएगा।
इससे पहले अप्रैल 2020 में करीब 20 फीसदी संपत्ति कर बढ़ाया गया था। नगर निगम कई अन्य तरीकों से भी आय बढ़ाने पर विचार कर रहा है, जिनमें नए करों का प्रस्ताव और मौजूदा शुल्कों में संशोधन शामिल है।
नगर निगम पिछले कई महीने से वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। खर्चों और आय के बीच बढ़ते अंतर ने निगम को राजस्व बढ़ाने के लिए नए रास्ते तलाशने पर मजबूर कर दिया है। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि पुडुचेरी भी चंडीगढ़ जैसा ही है, लेकिन वहां संपत्ति कर चंडीगढ़ से करीब दोगुना है। नगर निगम ने आखिरी बार अप्रैल 2020 में संपत्ति कर की दरों में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद से अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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अधिकारियों का कहना है कि महंगाई और बढ़ते खर्चों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया है। अब 24 दिसंबर को होने वाली सदन की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव लाया जाएगा। हालांकि इस एजेंडे पर पार्षदों का क्या रुख रहता है, ये देखना अहम होगा, क्योंकि निगम ने हाल ही में बिजली के बिलों में लगने वाले एमसी टैक्स को बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया था, जिसे पार्षदों के दबाव के बाद वापस लेना पड़ा था।
बता दें कि शहर में 26 हजार कमर्शियल और 80 हजार रेजिडेंशियल इमारतें हैं, जहां से हर साल नगर निगम को टैक्स आता है। नगर निगम ने पूरे शहर की कमर्शियल इमारतों को जोन ए, बी, सी और डी में बांटा हुआ है। वहीं रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को तीन जोन में बांटा गया है। हर जोन के अलग-अलग रेट हैं। कमर्शियल इमारतों में शहर में बनी दुकानें, शोरूम, संस्थान और औद्योगिक क्षेत्र के प्लाट शामिल है। शहर में नगर निगम प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से टैक्स चार्ज करता है।
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इससे पहले अप्रैल 2020 में करीब 20 फीसदी संपत्ति कर बढ़ाया गया था। नगर निगम कई अन्य तरीकों से भी आय बढ़ाने पर विचार कर रहा है, जिनमें नए करों का प्रस्ताव और मौजूदा शुल्कों में संशोधन शामिल है।
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नगर निगम पिछले कई महीने से वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। खर्चों और आय के बीच बढ़ते अंतर ने निगम को राजस्व बढ़ाने के लिए नए रास्ते तलाशने पर मजबूर कर दिया है। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि पुडुचेरी भी चंडीगढ़ जैसा ही है, लेकिन वहां संपत्ति कर चंडीगढ़ से करीब दोगुना है। नगर निगम ने आखिरी बार अप्रैल 2020 में संपत्ति कर की दरों में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद से अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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अधिकारियों का कहना है कि महंगाई और बढ़ते खर्चों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया है। अब 24 दिसंबर को होने वाली सदन की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव लाया जाएगा। हालांकि इस एजेंडे पर पार्षदों का क्या रुख रहता है, ये देखना अहम होगा, क्योंकि निगम ने हाल ही में बिजली के बिलों में लगने वाले एमसी टैक्स को बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया था, जिसे पार्षदों के दबाव के बाद वापस लेना पड़ा था।
बता दें कि शहर में 26 हजार कमर्शियल और 80 हजार रेजिडेंशियल इमारतें हैं, जहां से हर साल नगर निगम को टैक्स आता है। नगर निगम ने पूरे शहर की कमर्शियल इमारतों को जोन ए, बी, सी और डी में बांटा हुआ है। वहीं रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को तीन जोन में बांटा गया है। हर जोन के अलग-अलग रेट हैं। कमर्शियल इमारतों में शहर में बनी दुकानें, शोरूम, संस्थान और औद्योगिक क्षेत्र के प्लाट शामिल है। शहर में नगर निगम प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से टैक्स चार्ज करता है।
पीयू-पीजीआई को निगम ने भेजा है नोटिस
तमाम सख्ती के बावजूद नगर निगम बड़े डिफॉल्टर्स से संपत्ति कर वसूलने में विफल साबित हुआ है। निगम ने पीजीआई, पीयू समेत कई सरकारी संस्थाओं को भी संपत्ति कर का नोटिस भेजा है। इन्हें महीने के अंत तक का समय दिया गया है। हालांकि, कई सरकारी संस्थाओं की प्रतिक्रिया आई है कि जो नोटिस भेजा गया है वो तर्कसंगत नहीं है लेकिन निगम ने उन्हें कहा है कि वह टैक्स का पैसा जमा कराएं।टैक्स की रीकैलकुलेशन कराई जा सकती है और अगर उसमें टैक्स कम पाया जाता है तो निगम वह पैसा वापस कर देगा। आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि कई सरकारी संस्थाओं को नोटिस भेजा गया है। उनके पास महीने के अंत तक का समय है। हमने पूरा टैक्स जमा कराने का आग्रह किया है। बता दें कि निगम ने पीजीआई को 41.53 करोड़ और पंजाब यूनिवर्सिटी व पेक से करीब 81.6 करोड़ रुपये वसूलने के लिए नोटिस जारी किया है।
अन्य राजस्व स्रोतों पर भी विचार
संपत्ति कर के अलावा नगर निगम नए राजस्व स्रोतों की तलाश कर रहा है। इसमें विभिन्न शुल्कों में वृद्धि, नई सेवाओं के लिए शुल्क लागू करना और बकाया करों की वसूली तेज करना शामिल है। सूत्रों के अनुसार निगम पानी के कमर्शियल बिलों में भी कुछ बढ़ोतरी पर विचार कर रहा है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से राजस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी, जो वर्तमान में कई परियोजनाओं और बुनियादी सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरी है, क्योंकि पिछले कई महीनों से विकास कार्यों के टेंडर बंद हैं। पार्षदों के वार्ड डेवलपमेंट फंड से भी काम नहीं हो पा रहे हैं। निगम के पास सिर्फ कर्मचारियों को वेतन देने के ही पैसे बाकी हैं। हालांकि जनवरी के बाद से वेतन देने के लिए संकट पैदा हो जाएगा।यह टॉप सरकारी डिफॉल्टर्स, जिन पर करोड़ों बकाया
नाम बकाया टैक्स1. पंजाब यूनिवर्सिटी 67.53 करोड़
2. पीजीआई, सेक्टर-14 41.53 करोड़
3. पेक, सेक्टर-12 14.07 करोड़
4. स्पोर्ट्स कांप्लेक्स - 43 6.13 करोड़
5. निट्टर 3 करोड़
6. एयरफोर्स स्टेशन-28, 31 और 47 3.03 करोड़
7. पंजाब यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार 2.95 करोड़
8. सेक्टर-23 इलेक्ट्रिसिटी विभाग 2.70 करोड़
9. जिला अदालत कांप्लेक्स-43 - 1.03 करोड़