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ये लागू हुआ तो जल्द नहीं बढ़ेंगे बिजली के बिल
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 07 Dec 2013 01:43 AM IST
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यूटी में मल्टी ईयर टैरिफ लागू करने का प्रस्ताव एक साल के लिए टल गया है। यह प्रस्ताव 2015 से तीन से पांच सालों के लिए लागू होगा।
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केंद्र शासित प्रदेशों और गोवा के लिए गठित ज्वाइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जेईआरसी) शहर में मल्टी ईयर टैरिफ प्लान को लागू करने से पहले शहर के लोगों की राय लेना चाहता है।
जेईआरसी के सदस्य 12 दिसंबर को चंडीगढ़ आ रहे हैं। वे सेक्टर-10 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स के सभागार में लोगों की मल्टी ईयर टैरिफ पर राय जानेंगे।
जेईआरसी ने पहले इसे 2014 से लागू करने को कहा था। प्रशासन के बिजली विभाग से तीन से पांच सालों के लिए एग्रीगेट रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) भेजने को कहा था।
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मल्टी ईयर टैरिफ प्लान पांच सालों के लिए लागू हो जाने के बाद शहर में बिजली के रेट में हर साल बढ़ोतरी नहीं होगी और जेईआरसी की ओर से मंजूर रेट तीन से पांच सालों के लिए प्रभावी रहेंगे।
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अभी प्रशासन हर साल जेईआरसी को एआरआर भेजता है। उसके आधार पर जेईआरसी तय करता है कि बिजली के रेट में बढ़ोतरी करनी है या नहीं?
अब जेईआरसी की ओर से मल्टी ईयर टैरिफ प्लान 2015 से लागू करने के फैसले के बाद जेईआरसी ने प्रशासन से वर्ष 2014-15 के लिए एग्रीगेट रेवेन्यू रिक्वायरमेंट भेजने को कहा है।
हालांकि एआरआर भेजने की अंतिम तिथि 30 नवंबर थी। लेकिन, प्रशासन ने जेईआरसी से अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। प्रशासन अब जल्द ही इसके लिए कंसलटेंट नियुक्त करेगा।
2014 से होना था लागू
कुछ महीने पहले सेक्टर-19 स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स में शुक्रवार को आयोजित जन सुनवाई सत्र के दौरान जेईआरसी के तत्कालीन चेयरमैन वीके गर्ग ने कहा था कि अगले साल से चंडीगढ़ में भी मल्टी ईयर टैरिफ लागू किया जाएगा।
चंडीगढ़ के बिजली विभाग के एसई एमपी सिंह ने कहा कि जेईआरसी के सदस्य 12 दिसंबर को जन सुनवाई सत्र आयोजित कर रहे हैं इसमें मल्टी ईयर टैरिफ प्लान पर लोगों की राय जानी जाएगी।
यह होगा फायदा
मल्टी ईयर टैरिफ लागू होने से बिजली विभाग को हर साल बिजली के रेट में बढ़ोतरी को लेकर जेईआरसी के पास याचिका दायर नहीं करनी पड़ेगी।
लोगों पर भी हर साल बोझ नहीं पड़ेगा। चंडीगढ़ में तीन सालों तक बिजली के रेट में लगातार बढ़ोतरी हुई। हालांकि पिछले साल जेईआरसी ने रेट में बढ़ोतरी की मंजूरी नहीं दी।
आयोग के गठन से पहले तक बिजली के रेट में बढ़ोतरी का फैसला प्रशासन को लेना होता था। इससे चंडीगढ़ में कई साल तक बिजली के रेट में बढ़ोतरी ही नहीं होती थी, लेकिन पिछले चार सालों में चंडीगढ़ में बिजली के रेट काफी अंतर आए हैं।