पेशावर हमले से हरे हुए मुल्तानी दंपति के जख्म
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाक के पेशावर में हुई तालिबान की कायराना हरकत ने यहां देश में एक बार फिर से उन लोगों के जख्मों को हरा कर दिया, जिनके मासूमों के सीने को आतंकियों की गोलियों ने छलनी किया है। अंबाला शहर के जंडली में रहने वाले रिटायर्ड सूबेदार अतर सिंह मुल्तानी का परिवार भी अपने जिगर के टुकड़ों को आतंकी हमले में खो चुका है। उनका दर्द तो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
अपने दो बच्चों को खोने के बाद अब ये मुल्तानी दंपति अपने सूनी गोद के साथ अपने दिलों में दर्द लिए जिंदगी काट रहे हैं। पेशावर में हुए आतंकी हमले ने उनकी आंखों में थमे आंसुओं के सैलाब को फिर से बहने को मजबूर कर दिया है।
स्कूली बच्चों पर अंधाधुंध बरसाई थी गोलियां
14 मई 2002 में जम्मू के कालूचक्क सेक्टर में सुबह के पौने सात बज रहे थे। सूबेदार अतर सिंह मुल्तानी सांभा सेक्टर बार्डर पर अपनी पलटून के साथ तैनात थे। कालूचक्क में आर्मी क्वार्टर में क्वार्टर नंबर एक में सूबेदार मुल्तानी की पत्नी अपनी 16 साल की बेटी अमनदीप कौर व 13 साल के बेटे जतिंद्र सिंह के लिए नाश्ता तैयार कर रही थी।
दोनों बच्चे स्कूल जाने के लिए तैयार हो रहे थे और जल्दी ही स्कूल बस आने वाली थी। क्वार्टर के गेट नंबर 2 से तीन आतंकी क्वार्टर कांप्लेक्स में दाखिल हुए और उन्होंने क्वार्टर नंबर 1, 2 और 6 का दरवाजा खटखटाया। तीनों ने आर्मी की ही वर्दी पहनी हुई थी और हाथों में एके 47 राइफल ली हुई थी।
जम्मू में आतंकियों ने 12 साल पहले खेला था खूनी खेल
क्वार्टर नंबर एक में सूबेदार मुल्तानी की पत्नी निर्मल कौर ने जैसे ही दरवाजा खोला तो आर्मी ड्रेस में खड़े आतंकी ने एकदम बंदूक चला दी। गोली निर्मल कौर की बाजू पर लगी और वे साथ ही बने बाथरूम की ओर गिरी। निर्मल कौर ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया। इसके बाद आतंकी ने बाथरूम के दरवाजे को गोलियों से छलनी कर दिया, लेकिन वे बच गई। उसके बाद आतंकी अंदर कमरे में दाखिल हुए और स्कूल के लिए तैयार हो रहे दोनों बच्चों को गोलियों से से छलनी कर दिया।
ऐसा ही उन्होंने क्वार्टर नंबर दो में किया। वहां आतंकियों ने सूबेदार गुरदेव की पत्नी व बच्ची को मार दिया। क्वार्टर नंबर छह में बैटरी हवलदार मैनेजर की पत्नी और दो माह की बच्ची को गोलियों से छलनी कर दिया। उसके बाद आतंकी नीचे आए और उन्होंने क्वार्टर परिसर में ही स्कूल बस का इंतजार कर रहे स्कूली बच्चों पर गोलियां चला दीं।
इस हादसे में आर्मी स्कूल कालूचक्क के 25 छात्र, 3 जवान, दो सैनिकों की पत्नियां व एक दुधमुही बच्ची की जान आतंकियों ने ले ली। बाद में आर्मी ने तीनों आतंकियों को घेर लिया और उन्हें भी मार गिराया। सूबेदार मुल्तानी ने अपने दोनों बच्चे खो दिए और पत्नी बड़ी मुश्किल से बची, लेकिन पेशावर के हमले ने फिर से मुल्तानी दंपति के जख्मों को हरा कर दिया।