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फेक एनकाउंटर केस में सरकार की बड़ी कार्रवाई, 8 पुलिसवालों की नौकरी गई

Wed, 25 Oct 2017 10:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 25 Oct 2017 10:28 AM IST
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mukhjit singh mukha fake encounter case, eight policeman suspended
नौकरी से निकाला
गैंगस्टर के बहाने किए गए फेक एनकाउंटर के केस में हाईकोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया और आठ पुलिसवालों की नौकरी चली गई। मामल पंजाब का है। जून 2015 में अमृतसर पुलिस ने गैंगेस्टर के बहाने शिरोमणि अकाली दल नेता मुखजीत सिंह मुक्खा का फर्जी एनकाउंटर कर दिया था। मामले में 8 पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद पंजाब सरकार ने एक एसआई, एक एएसआई, 4 हेड कॉन्स्टेबल और 2 कॉन्स्टेबलों को निलंबित कर दिया है।
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हाईकोर्ट में मुक्खा की पत्नी द्वारा दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस आरके जैन ने पूछा कि दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। विभागीय कार्रवाई की दलील पर हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या कोई गिरफ्तारी हुई है। इसका जवाब न मिलने पर हाईकोर्ट ने दोपहर बाद पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा को कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिए। अतुल नंदा ने कोर्ट को बताया कि इन आठों दोषी कर्मियों में से चार को निलंबित कर दिया गया है। शाम होते होते इनकी संख्या 8 हो गई।
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कोर्ट ने कहा, यह आम फर्जी मुठभेड़ नहीं
एडवोकेट जनरल अतुल नंदा को जस्टिस जैन ने कहा कि यह कोई आम फर्जी मुठभेड़ का मामला नहीं है। इस मुठभेड़ में मुक्खा पर एके-47 से पुलिस कर्मियों ने ही 26 गोलियां चलाईं । ऐसे में इसके दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है। मुक्खा की विधवा हरजीत कौर को सरकार द्वारा माली की नौकरी का प्रस्ताव दिए जाने पर भी हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगते हुए पूछा कि क्या सरकार के पास पीड़िता के लिए कोई और नौकरी नहीं है।
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क्या था मामला
मुक्खा फर्जी मुठभेड़ मामले कि जांच के लिए गठित एसआईटी मुठभेड़ में शामिल आठ पुलिस कर्मियों को दोषी करार दे कार्रवाई की सिफारिश कर चुकी है। बावजूद इसकेकोई कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमृतसर पुलिस कमिश्नर को तलब कर लिया था। मुक्खा की विधवा हरजीत कौर के वकील महिंदर कुमार ने हाईकोर्ट को बताया था कि पुलिस ने आईपीसी की धारा- 304 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है जबकि इस रिपोर्ट से ही साबित हो जाता है की यह मामला 302 का है।
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