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इन्होंने कमीशन एजेंट से शुरूआत की थी, आज उद्योगपति हैं

Sat, 16 Jan 2016 01:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल Updated Sat, 16 Jan 2016 01:50 PM IST
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msme special, karnal rice producer anil garg success story

करनाल की अनाज मंडी से बतौर कमीशन एजेंट से शुरुआत करने के बाद एक सफल उद्योगपति तक का सफर अनिल गर्ग ने बखूबी तय किया है। पहले एक राइस मिल में हिस्सेदारी की, यहां से अनुभव हासिल किया और अपना राइस मिल स्थापित कर लिया।

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आज उसी मेहनत और लगन का नतीजा है कि अरोमा एग्रोटेक के नाम से विदेशों में चावल बिकता है। दुनिया के 22 देशों में एरोमा एग्रोटेक का कारोबार है। अब चार सौ करोड़ का टर्नओवर है। अरोमा एग्रोटेक के निदेशक अनिल गर्ग को हाल ही में एमएसएमई की ओर से ऑउट स्टेंडिंग अवार्ड के लिए चयनित किया गया है।
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पिता ने की शुरुआत, बेटे ने दी गति

वर्ष 1987 में अरोमा एग्रोटेक के निदेशक अनिल गर्ग के पिता जिया लाल गुप्ता ने घरौंडा की मंडी में कमीशन एजेंट का कार्य शुरू किया था। उन्होंने एक राइस मिल में पार्टनरशिप कर ली। इसी के साथ 1994 में पेस्टीसाइड और फर्टिलाइजर का कार्य भी शुरू किया। यहां पर भी गर्ग परिवार को सफलता मिली और बिजनेस और बढ़ता चला गया।
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यहीं से उन्होंने एक राइस मिल स्थापित करने की सोची। प्लान और प्रोजेक्ट बना तो वर्ष 2004 में अरोमा एग्रोटेक के नाम से गांव गढ़ी मुलतान के पास शेलर स्थापित कर लिया। पूरा बिजनेस उनके बेटे अनिल गर्ग ने संभाला। दस साल में ईरान, खाड़ी देशों सहित 22 देशों में अरोमा एग्रोटेक का नाम है। कुल कारोबार का 85 प्रतिशत निर्यात से होता है। एक्सपोर्ट में अनिल गर्ग के भाई सुशील गर्ग भी उनकी मदद करते हैं।

पांच एकड़ से की थी शुरुआत
गर्ग फैमिली ने वर्ष 2004 में पांच एकड़ में राइल मिल की स्थापना की थी। बिजनेस अच्छा चला तो राइस मिल का क्षेत्र और कैपिसिटी भी और बढ़ गई। धीरे-धीरे शेलर के साथ लगती जमीन ली और आज 18 एकड़ में यह शेलर स्थापित है। शेलर में विश्व की अत्याधुनिक मशीनें हैं। इनमें चावल को साफ करने के अलावा, धोने और पालिस आदि के साथ-साथ पैकेजिंग की भी सुविधा है। शुरू में 50 कर्मचारियों से यह शेलर शुरू किया था, लेकिन आज 400 कर्मचारी यहां पर अपना रोजगार चला रहे हैं।


चावल का कारोबर काफी बड़ा है और इसमें प्रतियोगिता भी कड़ी है। क्वालिटी के आधार पर ही पहचान बनती है। भारत जैसा बासमती किसी देश में पैदा नहीं होता। इस कारोबार में काफी स्कोप है।
-अनिल गर्ग, निदेशक, अरोमा एग्रोटेक

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