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दुनिया भर में नाम है पानीपत की टैक्सटाइल नगरी के उत्पादों की
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत
Updated Tue, 19 Jan 2016 01:58 PM IST
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हरियाणा का पानीपत शहर टैक्सटाइल नगरी के नाम से जाना जाता है। आजादी के बाद स्थापित हैंडलूम व पिटरलूम इकाइयों ने तेजी से विस्तार करते हुए आधुनिक टैक्सटाइल उद्योग का रूप लिया है। पानीपत की इस इंडस्ट्री में सूक्ष्म और लघु इकाइयों का है। इन इकाइयों की संख्या करीब आठ हजार है। इनमें डोमेस्टिक में बैडशीट, पर्दे, सोफा कवर, मेट, रजाइयां, कवर व कंबल तैयार होते हैं और एक्सपोर्ट में कारपेट, दरियां, मैट, बाथमेट, पर्दे व कंबल बनाए जाते हैं।
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स्माल स्केल इंडस्ट्री का पांच हजार करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट व करीब 25 हजार करोड़ रुपये का डोमेस्टिम मार्केट है। यहां ढाई से तीन लाख मजदूर काम करते हैं। पानीपत में मीडियम उद्योग की भी करीब 150 इकाइयां हैं और दो हजार करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट व डोमेस्टिक टर्न ओवर है। इन उद्योगों से 50 हजार लोग जुड़े हैं। मीडियम उद्योग में मुख्यत कंबल, मिंक, स्पीनिंग मिल हैं। यहां पर ऑटोमेटिक पावरलूम, स्टल व लैसलूम पर काम होता है।
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कुशल श्रमिकों की कमी
कुशल और योग्य श्रमिकों की कमी सूक्ष्म और लघु इकाइयों के लिए बड़ी समस्या है। जरूरत के मुताबिक समय पर कारीगर न मिल पाने से कई तरह की दिक्कतें आती हैं।
वित्त जुटाना
सूक्ष्म उद्योगों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत वित्त जुटाना है। इन उद्यमियों को कोलेटेरल सिक्योरिटी के बिना कर्ज भी नहीं मिल पाता।
आधारभूत सुविधाओं का अभाव
स्माल स्केल इंडस्ट्री मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रही है। इतना बड़ा डोमेस्टिक व एक्सपोर्ट बाजार होने के बाद भी पर्याप्त सुविधाएं जैसे बिजली, पानी व सड़क तक ठीक नहीं हैं। एक बार बिजली फाल्ट आने पर इसे ठीक होने में कई घंटे लगा दिए जाते हैं। गर्मिंयों में बड़े बड़े पावर कट उत्पादन पर विपरीत असर डालते हैं।
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जरूरतों पर ध्यान
सूक्ष्म उद्योग को टैक्स से छूट मिले। एक्सपोर्ट ड्यूटी सरकार कम करे और इंपोर्ट ड्यूटी को बढ़ाना चाहिए। इससे चीन और अन्य देशों के माल से मुकाबला करने में आसानी होगी। रॉ मैटीरियल उपलब्ध कराना, बैंकों से कम ब्याज दर पर लोन के अलावा इनकम टैक्स व वैट में भी छूट देने की जरूरत है। इसके अलावा हैंडलूम का अलग से सेक्टर भी होना चाहिए। मीडियम उद्योग को बनाए रखना बहुत जरूरी है। चूंकि मीडियम उद्योग पर ही सूक्ष्म व स्माल उद्योग निर्भर है।
मनरेगा को इंडस्ट्री से जोड़कर काम हों
उद्योगों के सामने सबसे बड़ी समस्या लेबर की है। उद्योगों को स्कील्ड लेबर ही नहीं अकुशल लेबर भी नहीं मिल पाती। उद्योगपतियों की माने तो मनरेगा के लागू होने के बाद श्रमिकों व लेबर की मार और बढ़ गई। आज लेबर नहीं मिल पा रही है। उद्यमियों की मांग है कि मनरेगा को इंडस्ट्री से जोड़कर काम किया जा सकता है। इसका एक हिस्सा सरकार दे और एक हिस्सा उद्यमी। इससे सरकार की स्कीम भी सफल होगी और उद्योगों को श्रमिक भी मिल सकेंगे।
हैंडलूम उद्योग को चीन व तुर्की से चुनौती
पानीपत के हैंडलूम उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे बड़ी चुनौती चीन और तुर्की से है। पानीपत का माल क्वालिटी में तो इन देशों से बेहतर है मगर कीमत में मुकाबला नहीं कर पा रहा। इसकी वजह चीन और तुर्की में इस इंडस्ट्री का कर मुक्त होना है।
इतिहास
आजादी के बाद पाकिस्तान के मुल्तान समेत कई प्रदेशों से बुनकर पानीपत आकर बसे। इन्होंने धीरे-धीरे अपने काम शुरू किए और सबसे पहले हैंडलूम व पीटरलूम शुरू किया। वे यहां हाथ से दरी व चादरें बनाने लगे। हाथों से तैयार माल पानीपत से बाहर ले जाकर बेचने लगे। धीरे-धीरे काम बढ़ गया और फिर प्रदेश की सीमाओं से बाहर तक फैल गया।
क्या कहते हैं उद्यमी
उद्योगों के लिए सरकार की नीतियां ठीक नहीं है। उद्यमी छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान में ही लगा रहता है। ऐसे में वह बड़े काम कर ही नहीं पाता। सरकार को ही इन उद्योग को बढ़ावा देने की योजना बनानी पड़ेगी।
- रोशन लाल गुप्ता, उपाध्यक्ष, हरियाणा व्यापार मंडल
एक्सपोर्टर के सामने बिजली की सबसे बड़ी समस्या है। उद्योगों को नियमित बिजली नहीं मिल पाती। जनरेटर का सहारा लेना पड़ता है। इससे लागत बढ़ जाती है। पानीपत टेक्सटाइल नगरी होने के बाद भी कोई माल डिपो नहीं है। माल लेकर दिल्ली या गन्नौर जाना पड़ता है। ट्रकों में पोर्ट तक माल ले जाने में समय के साथ पैसा भी ज्यादा लगता है।
-रामनिवास गुप्ता, पूर्व प्रधान एक्सपोर्ट एसोसिएशन पानीपत
पानीपत हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व सरकार को देता है, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता। सड़कें खस्ता हाल हैं और बिजली व पानी की किल्लत है। उद्यमी अपने दम पर उद्योग को संभाले हुए है।
- सुखमाल जैन, एक्सपोर्ट पानीपत
पानीपत की इंडस्ट्री में पर्याप्त सुविधा नहीं हैं। योजनाएं सरकारी फाइलों में दबकर रह जाती हैं। मेक इन इंडिया बनाने से पहले उद्यमियों को तैयार करना होगा। इसके बिना मेक इन इंडिया का सपना साकार नहीं हो सकता।
- यशपाल मलिक, चेयरमैन, स्माल स्केल इंडस्ट्री पानीपत