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पंचकूला की ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री में भी काफी दमखम है
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Sun, 24 Jan 2016 03:54 PM IST
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एचएमटी से जन्मी पंचकूला की ऑटो इंडस्ट्री में काफी दमखम है। एचएमटी से आगे भी उसने अपनी मार्केट पंजाब और हिमाचल में बना ली है। सरकार से सहयोग और एक बड़ी मदर यूनिट की इंट्री पंचकूला की इंडस्ट्री में जान डाल सकती है। पंचकूला की ऑटो इंडस्ट्री एचएमटी की स्थापना के बाद यहां वर्ष 1986 में खोली गईं।
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एचएमटी के बंद होने के बाद इनकी हालत खराब होने लगी। मगर इस इंडस्ट्री ने खुद को साबित किया और यह आज भी आगे बढ़ रही है। यहां करीब 60 इकाइयां पार्ट्स बना रही हैं। अब ये हिमाचल और पंजाब की ट्रैक्टर कंपनियों के लिए पार्ट्स बनती हैं। कुछ सोनालिका की वेंडर इकाइयों के तौर पर आगे बढ़ रही हैं।
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कच्चे माल की दिक्कत
पंचकूला की ऑटो इंडस्ट्री के लिए कच्चा माल जुटाना एक बड़ी समस्या है। पंचकूला में जो मैटेरियल आता है वह बाहर से ही मंगवाना पड़ता है। इसके कारण मैटेरियल की कास्ट तीस फीसदी ज्यादा होती है। इंडस्ट्री के लिए टाटा, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और जिंदल से लोहा मंगवाया जाता है। इसके साथ ही मंडी गोबिंदगढ़ की रोलिंग मिल्स से भी यह खरीदा जाता है। कास्टिंग और फोर्जिंग के लिए भी मैटेरियल मंगवाया जाता है।
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डाटा
60 एमएसएमई इकाइयां
500 करोड़ रुपये का टर्नओवर
5000 लोगों को मिल रहा रोजगार
पंचकूला के ऑटो इंडस्ट्री प्लेयर्स के लिए कंपटीशन ज्यादा है। सरकार राहत दे तो शायद उस कंपटीशन में स्टैंड कर जाएं।
- विकास मखारिया, हारवे मेटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
ऑटो इंडस्ट्री के लिए मदर प्लांट जरूरी है, रेलवे और डिफेंस के लिए मैन्युफैक्चरिंग की जा सकती है। इस दिशा में कोई बड़ा प्लांट यहां लगाया जाए तो इंडस्ट्री बढ़ेगी।
- कुनाल जैन, मेसर्स केन
पंचकूला की इंडस्ट्री को नई दिशा की जरूरत है। हमारी क्षमताएं किसी से कम नहीं है। खरादीर हो तो इंडस्ट्री का दम किसी से कम नहीं है।
- डीसी जैन, अध्यक्ष, एचएमटी एनसीलिएरी वेलफेयर एसोसिएशन