{"_id":"7aa43db189e347a3630287d4e4eb588f","slug":"msme-haryana-ambala-chemical-pharma-industry-story-hindi-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा की केमिकल-फार्मा इंडस्ट्री में नहीं सुबह की दस्तक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा की केमिकल-फार्मा इंडस्ट्री में नहीं सुबह की दस्तक
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला कैंट
Updated Thu, 21 Jan 2016 02:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा में अंबाला से बहादुरगढ़ और यमुनानगर से रेवाड़ी तक फैला फार्मास्युटिकल उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए टॉनिक का काम कर सकता है। नई उद्योग नीति के तहत राज्य सरकार फार्मा पार्क बनाने करने की तैयारी कर रही है।
विज्ञापन
हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रीयल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) के अधिकारियों के अनुसार कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) के नजदीक प्रस्तावित फार्मा पार्क के लिए एचएसआईआईडीसी ने जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। इस पार्क की स्थापना से निवेशकों को एक ही स्थान पर सभी तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
विज्ञापन
प्रदेश में केमिकल और फार्मा उद्योग की मौजूदा स्थिति पर नजर डाली जाए तो देश के बाकी राज्यों की भांति ये उद्योग छोटे और बड़े दोनों स्तर पर चीन से केमिकल आयात पर निर्भर हैं। केमिकल उद्योग की 100 से अधिक इकाइयां पूरे राज्य में स्थापित हैं, लेकिन फरीदाबाद और गुड़गांव में यह उद्योग क्लस्टर का रूप लेने जा रहा है।
विज्ञापन
राजधानी से सटे होने के कारण इन दोनों जिलों में केमिकल इंडस्ट्री को माल की ढुलाई और आमद के साधन पहले ही मुहैया कराए जा चुके हैं। दूसरी ओर, फार्मा उद्योग में सभी जिलों में लघु और मध्यम दर्जे के फार्मा उद्योग जारी हैं, जिनमें ड्रेसिंग कॉटन से लेकर सर्जिकल उपकरण, कैप्सूल और विभिन्न प्रकार की दवाइयां, वेटरिनरी दवाएं तैयार हो रही हैं।
हिमालच और उत्तरखंड में छूट की अवधि खत्म
हिमाचल और उत्तराखंड में 10 वर्षों के लिए मिलने वाली छूट की अवधि के खत्म होने वाली है। ऐसे में हरियाणा सरकार की कोशिश है कि फार्मा कंपनियों को टैक्स सहित अन्य मदों में राहत देकर फार्मास्युटिकल सेक्टर को प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिए अलग-अलग स्तर पर विचार चल रहा है।
उत्तराखंड और हिमाचल में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स छूट की घोषणा के तहत 2010 से पहले इन राज्यों में काम शुरू करने वाली इकाइयों को 10 वर्षों तक टैक्स की रियायत देने की घोषणा की गई थी। जैसे जैसे मियाद खत्म हो रही है, कंपनियां एक बार फिर दूसरे प्रदेशों की तरफ रुख कर रही हैं। हरियाणा में करीब 300 छोटी और मध्यम दर्जे की कंपनियों के साथ-साथ कुछ अग्रणी कंपनियां भी हैं।
हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल के प्रेसिडेंट केसी गोयल के मुताबिक प्रदेश में फार्मा कंपनियों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो रही है, लेकिन प्रदेश सरकार की कोशिश है कि हिमाचल से कंपनियां बेचकर लौटने वाली यूनिट को हरियाणा में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
इसका असर आने वाले दो-तीन वर्षों में दिखने की उम्मीद है। गोयल के मुताबिक दवाइयों के लिए चीन के सॉल्ट की प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्धता के कारण भी फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए दिक्कतें बढ़ी हैं, लेकिन देश में तैयार होने वाले सॉल्ट की गुणवत्ता चीन के मुकाबले काफी बेहतर है।
पंचकूला में 10 साल से पलायन का दर्द
हिमाचल सरकार के लुभावने ऑफर्स ने पंचकूला की फार्मा इंडस्ट्री को पलायन करने पर मजबूर तो किया पर अभी 20 इंडस्ट्री ऐसी हैं जो पंचकूला में टिकी हैं। जो इंडस्ट्री बची हैं वह टैक्स और बिजली की दरों के बीच संघर्ष कर रही हैं। बची हुई फार्मा इंडस्ट्री दो सौ लोगों को रोजगार दे रही हैं। दस साल पहले यह संख्या 50 थी। हिमाचल सरकार ने बद्दी में लुभावने ऑफर दिए तो कई फार्मा इंडस्ट्री वहां शिफ्ट कर गईं। अब पंचकूला में फार्मा की सबसे बड़ी यूनिट वीनस रेमेडीज की है। यहां कई छोटी इकाइयां हैं।
सुविधाओं की कमी
पंचकूला की फार्मा इंडस्ट्री के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी है। यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर, बिजली के रेट के साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम की कमी के कारण इंडस्ट्री के उद्यमियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिस कारण नई इंडस्ट्री लगाने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पाता है।
टैक्स का बोझ
पंचकूला में प्रोडक्शन कास्ट अधिक है और दवाओं की एमआरपी पर लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी ज्यादा है। ऐसी स्थिति में वह खरीदार नहीं मिलते।