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अंडरपास बनाने के मामले में सांसद और प्रशासन आमने-सामने
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 28 Feb 2017 01:25 AM IST
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अंडरपास की बजाए सब-वे बनाने की तैयारी में प्रशासन
- फोटो : File Photo
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अंडरपास बनाने के मामले में सांसद किरण खेर और प्रशासन आमने-सामने हैं। नए अंडरपास मामले में इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की राय सांसद खेर से एकदम भिन्न है। इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट शहर में कहीं भी कोई नया अंडरपास बनाने के पक्ष में नहीं है। चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद ने इस बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि अंडरपास बनाना समस्या का हल नहीं है बल्कि नई समस्याओं को बढ़ावा देना है।
अंडरपास बनने के बाद ट्रैफिक फ्लो इस ओर ज्यादा होगा। जिस कारण अंडरपास के आगे रोड पर जाम की स्थिति रहेगी। अंडरपास में भी वाहनों का जाम रहेगा। चार दिन पहले ही सांसद किरण खेर ने एडवाइजर परिमल राय को दो सेक्टरों की कनेक्टिविटी के लिए अंडरपास बनाने के लिए चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में सांसद ने लोगों की शिकायतों का हवाला दिया है।
इस चिट्ठी के बाद ही अंडरपास पर प्रशासन का रुख जाना गया। चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद ने कहा कि अंडरपास की बजाए सब-वे बनाना बेहतर विकल्प होगा। सेक्टर-17 और 16 को आपस में जोड़ने के लिए सब-वे बनाया जा रहा है। इसका डिजाइन फाइनल होने के बाद टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इसी तर्ज पर दूसरे सेक्टरों में भी सब-वे बनाए जा सकते हैं। जिस कारण पैदल यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। उन्हें रोड क्रॉस करने के लिए राउंडअबाउट पर नहीं पहुंचना पड़ेगा।
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अंडरपास बनने के बाद ट्रैफिक फ्लो इस ओर ज्यादा होगा। जिस कारण अंडरपास के आगे रोड पर जाम की स्थिति रहेगी। अंडरपास में भी वाहनों का जाम रहेगा। चार दिन पहले ही सांसद किरण खेर ने एडवाइजर परिमल राय को दो सेक्टरों की कनेक्टिविटी के लिए अंडरपास बनाने के लिए चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में सांसद ने लोगों की शिकायतों का हवाला दिया है।
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इस चिट्ठी के बाद ही अंडरपास पर प्रशासन का रुख जाना गया। चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद ने कहा कि अंडरपास की बजाए सब-वे बनाना बेहतर विकल्प होगा। सेक्टर-17 और 16 को आपस में जोड़ने के लिए सब-वे बनाया जा रहा है। इसका डिजाइन फाइनल होने के बाद टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इसी तर्ज पर दूसरे सेक्टरों में भी सब-वे बनाए जा सकते हैं। जिस कारण पैदल यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। उन्हें रोड क्रॉस करने के लिए राउंडअबाउट पर नहीं पहुंचना पड़ेगा।
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चीफ इंजीनियर ने कहा चंडीगढ़ प्रशासन नहीं बनाएगा कहीं अंडरपास
वहीं दूसरी ओर ट्रैफिक समस्या को दूर करने के लिए नॉन मोटर्राइज्ड वाहनों को बढ़ावा देना होगा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करने के साथ कार शेयरिंग शुरू करनी होगी। 60 किलोमीटर से अधिक एरिया में साइकिल ट्रैक बनाए जा रहे हैं। सभी सड़कों पर साइकिल ट्रैक कनेक्टिविटी की कोशिश की जा रही है। चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद ने बताया कि अंडरपास और फ्लाइओवर विदेशों में तोड़े जा रहे हैं। कहीं भी अब इन्हें न बनाकर दूसरे विकल्पों पर काम हो रहा है।
सब-वे केवल पैदल लोगों के लिए
सब-वे केवल पैदल लोगों के गुजरने के लिए ही होते हैं। यहां से कोई वाहन नहीं गुजर सकता। इससे पैदल यात्रियों की समस्या तो हल हो जाएगी लेकिन वाहन चालकों को राहत नहीं मिलेगी। सड़कों के बीच में बने डिवाइडर पर प्रशासन बड़ी ग्रिल लगा रहा है। जिससे अब पैदल यात्री को रोड क्रॉस करने के लिए राउंडअबाउट पर पहुंचना पड़ता है। ट्रैफिक अधिक होने के कारण यहां से निकलना भी आसान नहीं है। अधिकतर राउंड अबाउट पर ट्रैफिक सिग्नल ही नहीं है जिस कारण जैबरा क्रॉसिंग के लिए समय ही नहीं मिलता है।
सब-वे केवल पैदल लोगों के लिए
सब-वे केवल पैदल लोगों के गुजरने के लिए ही होते हैं। यहां से कोई वाहन नहीं गुजर सकता। इससे पैदल यात्रियों की समस्या तो हल हो जाएगी लेकिन वाहन चालकों को राहत नहीं मिलेगी। सड़कों के बीच में बने डिवाइडर पर प्रशासन बड़ी ग्रिल लगा रहा है। जिससे अब पैदल यात्री को रोड क्रॉस करने के लिए राउंडअबाउट पर पहुंचना पड़ता है। ट्रैफिक अधिक होने के कारण यहां से निकलना भी आसान नहीं है। अधिकतर राउंड अबाउट पर ट्रैफिक सिग्नल ही नहीं है जिस कारण जैबरा क्रॉसिंग के लिए समय ही नहीं मिलता है।