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चंडीगढ़ : लोगों में जगा रहे साइक्लिंग की अलख, साथ में पर्यावरण को भी कर रहे सुरक्षित

Sat, 21 Nov 2020 05:55 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 21 Nov 2020 05:55 PM IST
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Motivational story of Cycling groups of Chandigarh
साइकिलगीरी समूह। - फोटो : अमर उजाला

चंडीगढ़ में साइक्लिंग का क्रेज बढ़ा है तो इसका श्रेय शहर के उन समूह को देना जरूरी है, जो पिछले कुछ सालों से लोगों को साइकिल चलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ये वे लोग जिन्होंने न सिर्फ शहर में साइकिल के कल्चर को बढ़ाया है बल्कि पर्यावरण को सुरक्षित बनाने में भी सहयोग दिया है। इनको देखकर कई लोगों ने साइकिल की सवारी शुरू की है। कई तो ऐसे भी हैं जिन्होंने इन ग्रुप को देखकर अपना भी एक ग्रुप बना लिया है। 

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ग्रुप में साइकिल चलाने का अपना एक अलग मजा है। इसमें सीखने को बहुत कुछ मिलता है। ग्रुप में हर फील्ड के व्यक्ति होते हैं, जो अपनी-अपनी फील्ड से जुड़ी बातें साझा करते हैं। कुछ नई बातें और कुछ अनुभव होते हैं जो आपको ग्रुप में सीखने को मिलते हैं। इनसे जुड़ने के लिए न तो कोई फीस है और न ही सदस्यता। फेसबुक, इंस्टाग्राम में इन्हें ढूंढ़िए और इनके साथ जुड़कर साइक्लिंग का लुत्फ उठाएं।
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साइकिलगीरी : साइक्लिंग के जरिए जोड़ रहा शहर को

  • तीन साल पहले डॉ. सुनैना बंसल व अमान भुल्लर ने की शुरुआत।
  • 700 से ज्यादा सदस्य जुड़ चुके हैं अब तक।
  • शनिवार : 20 से 30 किलोमीटर की साइक्लिंग।
  • रविवार : 40 से 50 किलोमीटर की साइक्लिंग।

तीन साल पहले डॉ. सुनैना बंसल व अमान भुल्लर ने चंडीगढ़ में साइक्लिंग को प्रमोट करने के लिए साइकिलगीरी नाम से एक ग्रुप की शुरुआत की। आज इस ग्रुप के साथ करीब 700 से ज्यादा सदस्य जुड़ चुके हैं। इनका मकसद लोगों को साइकिल के प्रति जागरूक करना है। ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट अक्षित पासी ने बताया कि वे लोगों को इस बात के लिए प्रेरित करते हैं कि चंडीगढ़ व आसपास के इलाकों में जाने के लिए कार की बजाए साइकिल का इस्तेमाल करें। 

साइक्लिंग के अलावा वे सदस्यों के साथ त्योहार व स्पेशल डे भी मनाते हैं। इससे ग्रुप के लोग अपनापन महसूस करते हैं और लोग जुड़ते चले जा रहे हैं। वीकेंड पर साइक्लिंग का शेड्यूल तय होता है। इसकी जानकारी ग्रुप के सभी सदस्यों को सोशल मीडिया के जरिए दी जाती है। रूट की पूरी जानकारी देने के साथ यह भी बताया जाता है कि उस दिन का मौसम क्या होगा, रूट में क्या-क्या परेशानियां आ सकती हैं। साथ में क्या-क्या ले जाना है, इस बारे में भी बताया जाता है। वीकेंड राइड में शनिवार को 20 से 30 किलोमीटर व रविवार को 40 से 50 किलोमीटर की साइक्लिंग की जाती है।

साइक्लोट्राइब : मकसद साइक्लिंग के जरिए ट्राइसिटी में नई जगहों को ढूंढना

  • इन खूबसूरत जगहों को ढूंढकर लेते हैं प्रकृति का नजारा
  • यूनिवर्सिटी में केमिस्ट शॉप चलाने वाले दीपक सिंगला तीन साल पहले वजन को नियंत्रित करने के लिए शुरू की साइक्लिंग

यूनिवर्सिटी में केमिस्ट शॉप चलाने वाले दीपक सिंगला ने अपने वजन को नियंत्रित करने के उद्देश्य से तीन साल पहले जो साइक्लिंग की राह पकड़ी थी, उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। खुद तो साइकिल की सवारी की, साथ ही लोगों को भी अपने साथ जोड़ा। दीपक के साथ पीयू के पीएचडी स्टूडेंट के साथ शहर के जुनूनी साइक्लिस्ट जुड़े हैं। 



इनमें पीयू के पीएचडी स्टूडेंट्स कल्याण वैध, बैंकर सुधीर संधू, प्रतीक गुप्ता, तलविंदर चीमा व संजीव पठानिया शामिल हैं। इनके ग्रुप का मकसद साइक्लिंग के साथ-साथ ट्राइसिटी की उन जगहों की खोजबीन करना है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ये वे जगह हैं, जहां पर लोग साइकिल का आनंद उठाने के साथ प्रकृति के नजारों का भी लुत्फ उठा सकते हैं। दीपक बताते हैं कि उनके ग्रुप के साथ कोई भी सदस्य जुड़ सकता है। उनके ग्रुप का फेसबुक व इंस्टाग्राम में पेज है। हर वीकेंड पर ग्रुप के साथी साइक्लिंग पर जाते हैं।

ट्राइसिटी ऑन पेडल : उद्देश्य साइक्लिंग के जरिये एक-दूसरे को बांटते हैं खुशियां

  • सनथ गोयल ने इसी साल किया इस ग्रुप का निर्माण
  • साइक्लिंग में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर हैं सनथ
  • साइक्लिंग के जरिए उन चुनिंदा जगहों पर जाते हैं, जो प्रकृति के बहुत करीब होती हैं




साइक्लिंग के इस ग्रुप का निर्माण इसी साल अप्रैल में हुआ है। इस ग्रुप के मुखिया सनथ गोयल ने बताया कि इसका मकसद साइक्लिंग के जरिए एक-दूसरे के बीच खुशियां बांटनी हैं। नए लोगों को अपने साथ जोड़कर उन्हें फिट रखना है। सनथ खुद साइक्लिंग में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर हैं और अन्य लोगों के लिए मोटिवेशन का काम करते हैं। 

उन्होंने बताया कि साइक्लिंग के जरिए वे उन जगहों पर जाते हैं, जो नेचर के बहुत करीब होती हैं। वहां जाकर जो सुकून मिलता है, शायद वो कहीं और मिल पाए। उनका कहना है कि साइक्लिंग आपको फिट तो रखती है और नई चीजों को एक्सप्लोर करने में बहुत मददगार साबित होती है। साइक्लिंग करने के साथ-साथ कई स्किल सीखने को मिलती है। जैसे कि कई लोग फोटोग्राफी सीख गए हैं। प्रकृति से जुड़ने का मौका मिलता है और इसके प्रति संवेदनशील बनते हैं। सनथ ने यह भी कहा कि यदि किसी को अच्छा नागरिक बनना है तो वे साइक्लिंग करें। अपने आप उसमें कई सारे गुण आ जाएंगे।

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