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मां ने गुरु बनकर दिया ज्ञान.. बच्चों ने इंटरनेशनल स्तर पर बनाई पहचान

Mon, 06 Jul 2020 12:42 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 06 Jul 2020 12:42 AM IST
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Mother gave knowledge by becoming a guru .. Children made recognition at international level
चंडीगढ़। गुरुपूर्णिमा का दिवस गुरु और शिष्य के लिए अटूट बंधन के लिए जाना जाता है। गुरु ही है जो शिष्य को सही रास्ता दिखाता और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। शहर के ऐसे इंटरनेशनल खिलाड़ी है जिनकी मां ही उनकी गुरु हैं। मां ने उन्हें रास्ता दिखाया और आज वह इस मुकाम तक पहुंचने में कामयाब रहे। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर इन खिलाड़ियों ने अपनी भावनाओं को अमर उजाला के साथ साझा किया।
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‘गोल्डन गर्ल’ को मां ने सिखाया निशाना साधना
इंटरनेशनल शूटर और सटीक निशाने के लिए मशहूर ‘गोल्डन गर्ल’ अंजुम मोदगिल अपनी मां शुभ मोदगिल को अपना गुरु मानती हैं। उन्होंने कहा है कि मां की बदौलत ही आज वह इस मुकाम तक पहुंची है। उन्होंने बताया कि मां शुभ मोदगिल एनसीसी कैडेट रहते हुए शूटर रहीं। शूटिंग रेंज पर अभ्यास के दौरान वह मुझे भी साथ ले जाती थीं। इस दौरान मां को शूटिंग करता देखा तो खुद भी शूटर बनने का फैसला लिया। मुझे मां ने गुरु के रूप में शूटिंग की पहली ट्रेनिंग दी।
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मां ने सहयोग से बनी इंटरनेशनल तैराक
इंटरनेशनल तैराक चाहत अरोड़ा के लिए उनकी मां गीता अरोड़ा ही गुरू है। उन्होंने कहा कि मेरा शुरू से तैराकी की ओर ध्यान था। मां ने मेरी बात को जानते हुए तैराकी के खेल के लिए प्रेरित किया। मेरी मां अभी भी रोजाना सुबह और शाम बेटी के साथ ट्रेनिंग पर जाती हैं। देश हो या विदेश टूर्नामेंट के दौरान भी मेरे साथ ही रहती हैं। मां के सहयोग से देश की महिला टीम में अपना सिक्का जमा चुकी चाहत अरोड़ा मेडल जीत रही हैं।
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मां की बदौलत बनी विकेट कीपर
तानिया भाटिया आज भारतीय महिला टीम की विकेटकीपर हैं। इस मुकाम तक पहुंचने पर वह अपनी मां सपना भाटिया का योगदान मानती हैं। उन्होंने कहा कि बचपन से ही मां मुझे क्रिकेट अकादमी लेकर जाती थी और शाम को दोबारा लेने आती थी। उनकी प्रेरणा, लगन और मेहनत से आज इस मुकाम पर पहुंच सकी हूं। उन्होंने कहा कि जब भी कभी परफारमेंस खराब होती तो मां हौसला देती है और दोबारा से कोशिश करने के लिए कहती हैं।
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