फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   mother donte her heart

मदर्स डे से पहले मां ने दिया सबसे बड़ा तोहफा, युवक के दिल को धड़कन देकर दुनिया से हुईं विदा

Sun, 14 May 2017 09:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 14 May 2017 09:32 AM IST
विज्ञापन
mother donte her heart
चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल
मदर्स डे की पूर्व संध्या पर एक मां ने दुनिया से जाते-जाते दूसरी मां को अनमोल तोहफा दे दिया। चंडीगढ़ सेक्टर- 25 निवासी जसविंदर कौर को एक्सीडेंट के बाद पीजीआई में दाखिल कराया गया था। ब्रेन डेड होने के बाद उनके अंगों को डोनेट किया गया। जसविंदर का हार्ट लुधियाना के जगरांव के रहने वाले 23 वर्षीय युवक के काम आ गया।
विज्ञापन


युवक का हार्ट सिर्फ 20 प्रतिशत काम कर रहा था। डाक्टरों ने कह दिया था कि युवक ज्यादा दिन तक नहीं जी सकता। युवक की मां प्रकाश कौर ने बताया कि मुझे परमात्मा पर पूरा विश्वास था। डोनर जसविंदर मेरे लिए परमात्मा का स्वरूप बनकर आई। मेरे लिए यह किसी अनमोल तोहफे से भी बढ़कर है। 
विज्ञापन


पिछले साल से बिगड़ने लगी थी तबीयत
युवक के पिता कुलदीप ने बताया कि नवंबर में उनके बेटे को खांसी आनी शुरू हो गई थी। लुधियाना के डीएमसी में चेस्ट स्पेशलिस्ट ने जांच की। लेकिन हार्ट का चेकअप नहीं किया। उल्टा एलर्जी की दवा दे दी। इसके बाद वे वापस गांव चले गए। वहां दोबारा से तबीयत खराब हो गई। फिर से स्थानीय डाक्टर को दिखाया। डाक्टर ने इको चेक किया तो पता चला कि हार्ट काम नहीं कर रहा। वहां से पीजीआई ले आए। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पीजीआई का चौथा ट्रांसप्लांट
पीजीआई का यह चौथा ट्रांसप्लांट है। इससे पहले पीजीआई तीन ट्रांसप्लांट कर चुका है। दुर्भाग्य से दो मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि एक पेशेंट ठीक है। जसविंदर कौर के परिजनों ने जैसे ही आर्गन डोनेशन की अनुमति दी, उसके बाद पीजीआई की टीम ट्रांसप्लांट में जुट गई। कई टीमों ने इस काम को अंजाम दिया है। इसमें ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर, रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी और कार्डियोलाजी की टीम व अन्य स्टाफ ने अहम भूमिका निभाई।

'दूसरों का दुख देख नहीं पाती थीं मेरी मां'

mother donte her heart
पीजीआई में सुविधा
डोनर जसविंदर कौर के बेटे गगनदीप ने बताया कि उनकी मां हमेशा दूसरों की मदद करने में आगे रहती थीं। खाना, कपड़े और गरीब लड़कियों की शादी में आर्थिक मदद करती थीं। किसी का भी दुख देखकर वह रोने लगती थीं। हादसे के बाद जब उनके बचने की कोई आस नहीं रही तो हमने उन्हें हमेशा देखने के लिए उनके अंगों को डोनेट करने का फैसला लिया।

इससे उनकी पीड़ितों की मदद करने की ख्वाहिश भी पूरी हो गई। जसविंदर सेक्टर 25 में रहती थीं। दस मई को एक वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी थी। इससे वे गंभीर घायल हो गई थीं। जसविंदर की दोनों किडनी, एक पेनक्रियाज, दोनों कोर्निया और हार्ट जरूरतमंद मरीजों के काम आ गए और उन्हें नई जिंदगी मिल गई।


जसविंदर कौर के परिजनों की हिम्मत को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उनके इस कदम से समाज में आर्गन डोनेशन के लिए और जागरूकता बढ़ेगी। परिजनों की ख्वाहिश को पूरी करने के लिए पीजीआई की टीम ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी।
डा. विपिन कौशल नोडल आफिसर रोटो पीजीआई
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed